“मोमेंटम झारखंड” साबित हुआ महाघोटाला, हाईकोर्ट ने दिया सरकार के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश

BREAKING NEWS , नई दिल्ली/रांची, शुक्रवार , 14-09-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली/ रांची। सरकार किस कदर लापरवाह हो सकती है उसकी नजीर झारखंड में आयोजित मोमेंटम झारखंड है। पूरा आयोजन ही महा घोटाला साबित हो गया है। इसका संज्ञान लेते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने ये आदेश इस मामले में दायर एक पीआईएल की सुनवाई के बाद दिया।

घोटाले की व्यापकता और गहराई नापने के लिए बस एक ही उदाहरण काफी होगा। सूबे में निवेश आमंत्रित करने के नाम पर हुए इस आयोजन में 39 दिन पहले बनी एक कंपनी ओरियंट क्राफ्ट फैशन पार्क वन एलएलपी भी शामिल हुई थी। इस कंपनी की कुल पूंजी 1 लाख रुपये थी। और उसका झारखंड सरकार के साथ 14 मार्च 2017 को इंडस्ट्रियल पार्क बनाने के लिए 1500 करोड़ रुपये का करार होता है। ये पूरी दुनिया में अपने किस्म का पहला उदाहरण होगा जिसमें किसी कंपनी को इतनी कम पूंजी पर इतने बड़े काम का ठेका मिला होगा। और गहराई में जाने पर पता चला कि पिता और पुत्र ही इस कंपनी के डायरेक्टर हैं।   

इसी तरह के सैकड़ों मामले पीआईएल का हिस्सा हैं। जिसे दीवान इंद्रनील सिन्हा ने दायर किया है। मामले की पैरवी एडवोकेट राजीव कुमार कर रहे हैं। पीआईएल की आज सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस डीएन पटेल ने ये आदेश पारित किया। इसमें झारखंड सरकार के अलावा दूसरे कई आरोपी हैं।

हाईकोर्ट में पीआईएल।

निवेश के नाम पर जनता के साथ हुए इस फ्राड की अब कलई खुलने की बारी है। आयोजन के समय ही ये बात सामने आ गयी थी कि पूरे मामले में फर्जीवाड़े का राज है। और जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। कहने को तो उससे झारखंड को बड़ा लाभ होता लेकिन वो मकसद पीछे छूट गया और फंड की बंदरबाट से लेकर प्राकृतिक संसाधनों और जनता की संपत्ति की लूट की साजिशें वहां ज्यादा दिखीं। यहां तक कि सरकार ने कई ऐसे करार किये जिसमें कंपनियां फर्जी निकलीं।

ओरिएंटल क्राफ्ट फैशन कंपनी ने सरकार से रेडीमेड कपड़ा बनाने वाली कंपनियों को सही जगह और माहौल मुहैया कराने का करार किया था। इसके साथ ही उसे दो निजी इंडस्ट्रियल पार्क भी बनाने थे। जिसके लिए जमीनें भी तय हो गयी थीं। खेलगांव में 28 एकड़ मिलना था जबकि इरबा में सरकार ने उसे 113 एकड़ जमीन देने का वादा किया था। इस 1500 करोड़ रुपये में 100 करोड़ रुपये पार्क के विकास पर खर्च किया जाना था।

इसके साथ ही उसके दावे भी बहुत बड़े थे। उसने 50 हजार लोगों को रोजगार देने का वादा किया था। इसी तरह से एक ऐसी कंपनी के साथ 6400 करोड़ रुपये का एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ था जिसका कोई नामोनिशान तक नहीं था। तीन अन्य कंपनियों की पूंजी महज 3 लाख रुपये थी और उनके साथ 2800 करोड़ रुपये का करार हुआ था।

अब ये सारे मामले पीआईएल के तौर पर झारखंड हाईकोर्ट के सामने हैं। और कोर्ट एक-एक मामले की जांच करेगा। लेकिन अभी शुरुआत में ही जब उसे शक हो गया तो उसने कार्रवाई भी अपने तरीके से शुरू कर दी है। एफआईआर उसी का नतीजा है।








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Arbind Kumar :: - 09-15-2018
इस मामले के सुञघार के ऊपर कारवाई होनी चाहिए

Adiya kumar dangi :: - 09-15-2018

Jyotish :: - 09-15-2018
Someone is claiming that it is fake.give any reference