रात की रंगीन पार्टियां और गरबा था संदेसरा और अस्थाना का साझा प्यार

ख़ास रपट , नई दिल्ली, सोमवार , 05-11-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। वडोदरा पुलिस कमिश्नर रहते ही संदेसरा के साथ हो गया था अस्थाना का मजबूत रिश्ता संदेसरा समूह के लिए अगला ताज तेल की खोज और उसका व्यवसायिक उत्पादन साबित हुआ- स्टर्लिंग ग्लोबल नाम से बुलायी जाने वाली एक कंपनी। 

नवंबर 2011 में नितिन संदेसरा जो उस समय समूह के चेयरमैन थे , मिन्ट पेपर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि ‘जब हम लोगों ने 2001-2002 की शुरुआत में तेल व्यवसाय में जाना तय किया तो हम उसे बड़ा बनाना चाहते थे हाशिये पर रह जाना कोई मकसद नहीं था।’

और ये इतना बड़ा था कि 2004 के अंत में कंपनी को चार आनशोर ब्लाक में कच्चे तेल को निकालने और उसके उत्पादन का लाइसेंस मिलने के बाद नाईजीरिया के आरपरेशन में उसने 1.5 बिलियन डालर से ऊपर का निवेश कर दिया।

ग्रेट गैट्सबी, बड़ोदा शैली

वडोदरा आधारित होना भी संदेसरा और खासकर चेतन को दक्षिण मुंबई का जीवन जीने से नहीं रोक सका। राजनीति, व्यवसाय और बॉलीवुड के बीच विशिष्ट भारतीय गठजोड़ अंपड गांव में स्थित परिवार के 60,000 वर्ग फुट वाले फार्महाउस में सप्ताहांत दिखता था। ये फार्महाउस शहर से ठीक बाहर है।

चेतन की पत्नी दीप्ति संदेसरा खासकर इसके केंद्र में थीं: उनके सोशलाइट मित्रों में नीतू कपूर (रिषि कपूर की पत्नी और एक्ट्रेस), नीलम कोठारी (एक्ट्रेस और डिजाइनर) और सुनीता कपूर (डिजाइनर और अनिल कपूर की पत्नी) शामिल थीं।

एक बार जब संदेसरा देश छोड़ कर भाग गए तब नियमित तौर पर दीप्ति के सालों से जारी जन्मदिन की पार्टियों के विश्वसनीय दस्तावेज बन चुके मुंबई के टैबलायड प्रेस ने परिवार के भविष्य पर एक छोटी से लेकिन झटके भरी टिप्पणी की: मिरर की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘ऐसा लगता है कि फ्राड और सेलिब्रिटीज के बीच का रिश्ता अटूट है।’

‘दिल्ली कोर्ट से बड़ोदा और मुंबई आधारित दीप्ति संदेसरा, जिसे नीतू कपूर, महीप और सुनीता कपूर और नंदिता मेहतानी, सुरीली गोयल, सीमा खान और नीलम कोठारी जैसी मशहूर सोसाइटी लेडीज के घनिष्ठ मित्र के तौर पर जाना जाता था, के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के चंद दिनों बाद ही ऐसा हुआ।’

लेकिन यहां तक कि जब परेशानी बढ़ने लगी तब भी संदेसरा ने अपनी हाई-फाई गतिविधियां कम करना जरूरी नहीं समझा। दो साल तक इनकम टैक्स विभाग के लगातार वडोदरा (2011) के दौरे करने और गिने ना जा सकने वाले धन के बारे में सवालों के पूछे जाने - ये यही साल था जब ईडी ने भी दौरा किया और 2011 की विवादित डायरी हासिल की- और 6000 करोड़ रुपये के लोन के खराब (2012) हो जाने की बैंकों की चेतावनी के बाद भी उन्होंने अपना पुराना ठाट-बाट बनाए रखा।

उदाहरण के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया को 2013 में दिए गए एक इंटरव्यू में चेतन संदेसरा ने बताया था कि शहर के बाहर स्थित उनके बंगले का कैसे शाहरुख खान और हृतिक रोषन की पत्नियां क्रमश: गौरी खान और सुजैन सौंदर्यीकरण कर रही हैं।

पेपर को उन्होंने बताया कि ‘मेरी पत्नी गौरी और सुजैन से पार्टियों में मिलती है और उसकी मित्र है। हम अपने नये बंगले के लिए प्रोफेशनल इंटीरियर डिजायनर की तलाश कर रहे थे और हम जानते थे कि गौरी और सुजैन इंटीरियर डिजाइनिंग में हैं। उन्होंने कुछ डिजाइनों का प्रजेंटेशन दिया और हम लोगों को वो पसंद आ गया।’

उन्होंने इसमें आगे जोड़ा कि ‘बंगला दिसंबर (2013) तक तैयार हो जाएगा और उसके बाद हम वहां शिफ्ट हो जाएंगे। उस मौके के लिए हम लोग एक पार्टी के आयोजन की योजना बना रहे हैं जिसमें गौरी, सुजैन और बॉलीवुड के टॉप स्टार आमंत्रित किए जाएंगे।’

ये संदेसरा के जीने का तरीका था जिसमें वडोदरा शहर पर अपनी छाप छोड़ना शामिल था।

अस्थाना से मुलाकात

राजनीतिक निष्ठा के खुलेआम प्रदर्शन के मामले में संदेसरा ब्रदर्स कुछ ज्यादा ही मौन थे जबकि उस समय इस मामले में ज्यादातर गुजराती उद्योगपति उसको दिखाने से हिचकते नहीं थे।

हालांकि संदेसरा रिसर्जेंट ग्रुप ऑफ गुजरात- ये नाम 100 से ज्यादा स्थानीय गुजराती उद्योगपतियों द्वारा उस समय अपनाया गया था जिन्होंने 2002 के गोधरा दंगों के बाद सीआईआई के कुछ सदस्यों के खिलाफ जाकर तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ दिया था- के हिस्से थे लेकिन वो संगठन के सबसे प्रमुख चेहरों में नहीं शामिल थे।

ये काम उन उद्योगपतियों के जिम्मे था जो नरेंद्र मोदी के बेहद करीब थे: अडानी ग्रुप के गौतम अडानी, टोरेंट के सुधीर मेहता, निरमा के करसन पटेल और बेकरी इंजीनियर्स के अनिल बेकरी।

लेकिन संदेसरा वडोदरा को कुछ लौटाने में विश्वास करते थे और उस शहर को आकर देना चाहते थे जिसको उन्होंने अपना घर बनाया था। इसी चीज ने उन्हें सुपर कॉप राकेश अस्थाना से संपर्क में लाने का काम किया।

2008 में अस्थाना वडोदरा के पुलिस कमिश्नर नियुक्त किए गए। उस समय तक गोधरा ट्रेन बर्निंग केस के कोर्स को महत्वपूर्ण रूप से बदलने वाली स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम के मुखिया के तौर पर वो जाने-पहचाने अफसर बन चुके थे।

ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किससे बात करते हैं। वहां इस बात लेकर बहुत सारी स्टोरी हैं कि कैसे वडोदरा के पुलिस चीफ उनसे परिचित हुए और फिर बाद में संदेसरा परिवार के घनिष्ठ मित्र बन गए।  

एक वर्जन कुछ इस तरह का है: 2008 में अस्थाना के पुलिस कमिश्नर (उसके पहले वो आईजी के तौर पर पांच साल तक काम कर चुके थे) बनने के  कुछ ही दिनों बाद नितिन संदेसरा ने तय किया कि वो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर वडोदरा पुलिस मुख्यालय के सौंदर्यीकरण को स्पांसर करेंगे। गौरतलब है कि पीपीपी मॉडल उस दौर में पूरे देश में राज्य सरकार के विभागों का नियम बन गया था। और इसी सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया में अस्थाना संदेसरा के नजदीक आए।

कम से कम एक सूत्र ने बताया कि सौंदर्यीकरण की फंडिंग के क्रम में संदेसरा ग्रुप द्वारा दी गयी वित्तीय सहायता को क्रेडिट देते हुए पुलिस मुख्यालय ने उसकी एक पट्टिका भी लगायी थी। हालांकि वडोदरा शहर की पुलिस वेबसाइट इसका कोई जिक्र नहीं करती है।

एक दूसरा वर्जन ये है कि स्टर्लिंग हेल्थ मॉल के दौरे के दौरान अस्थाना की चेतन संदेसरा से मुलाकात हुई। इस मॉल में तीन फ्लोर पर जिम और हेल्थकेयर की सुविधा है जिसे परिवार ने शहर में खोला था। और खोलने के साथ ही ये मशहूर हो गया था। इसी शुरुआती मित्रता के रास्ते से संदेसरा वडोदरा पुलिस भवन के सौंदर्यीकरण में सहायता करने तक पहुंच गए। 

मौजूदा समय में जारी सीबीआई का विवाद

संदेसरा के सोशल सर्किल के दूसरे लोग नितिन संदेसरा और अस्थाना के साझे प्यार गरबा या फिर धार्मिक संगीत की बात बताते हैं जिसने वडोदरा में नवरात्रि के सीजन में 2010 में कंपनी की फंडिंग से मा-आरकी- जिसमें बताया जाता है कि अस्थाना कई बार शामिल हुए थे- का रिलांच किया था।

टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक गरबा से आने वाले सारे पैसे वडोदरा ट्रैफिक एजुकेशन ट्रस्ट (वीटीईटी) को जाएंगे। ऐसा फैसला लिया गया था। रिपोर्ट शहर के स्टॉक एक्सचेंज वाइस चेयरमैन सुधीर शाह को यह कहते हुए कोट करती है कि ‘ शुक्रवार की रात को शहर के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना की अध्यक्षता में वीटीईटी की बैठक के दौरान हम लोगों ने घोषणा की कि गरबा से पैदा हुआ फंड वीटीईटी को डोनेट किया जाएगा।’

ये तकरीबन यही समय था जब 2010-12 के बीच अस्थाना काे बेटे अंकुश अस्थाना ने भी स्टर्लिंग बायोटेक को एक इंटर्न के तौर पर ज्वाइन किया था और उनके लिए दो साल तक काम किया- ये आरोप सुप्रीम कोर्ट में एनजीओ कॉमन काज की ओर से पिछले साल दायर याचिका में लगाया गया था।

हाल के महीनों में अस्थाना की बेटी की शादी सीबीआई के स्कैनर में आयी जिसके कुछ हिस्सों का आयोजन बताया जाता है कि वडोदरा के बाहर स्थित संदेसरा के फार्म हाउस अंपड में हुआ था।

क्या अस्थाना और संदेसरा के बीच रिश्ते प्रकृति में बिल्कुल लेन-देन के थे? सीबीआई के कुछ लोगों पर संदेह करने के पर्याप्त सबूत हैं लेकिन अभी कुछ भी साबित नहीं हुआ है।

गुजरात आधारित एक बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनी के सीनियर एक्जीक्यूटिव ने कहा कि  ‘आप किसी के भी बारे में पूछिए तो वो बताएंगे कि किसी भी शहर से रिश्ता रखने वाले बिजनसमैनों का स्थानीय अथारिटी से दोस्ताना रिश्ता होगा। ये जरूरी बात नहीं है कि कोई घूस का ही मामला हो, बल्कि एक दूसरे के जानने का भी होता है। जब आईटी डिपार्टमेंट बुलाता है तो क्या इस तरह के किसी वरिष्ठ पुलिस अफसर का अपने साथ होना मददगार होता है? निश्चित तौर पर, लेकिन ये आखिरी तौर पर आपको बचा नहीं पाएगा।’

ईडी द्वारा 2011 में कंपनी के जब्त किए गए रिकार्ड में मिली 2011 की बदनाम डायरी बताती है कि बहुत कुछ अभी सतह के नीचे दबा हुआ है।

2017 में एक प्रेस कांफ्रेंस में एडवोकेट-एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने आरोप लगाया था कि डायरी में एंट्री इस बात का पर्दाफाश कर देती है कि अस्थाना ने तकरीबन 3.5 करोड़ रुपये बायोटेक से लिए थे।- हालांकि इसको लेकर कुछ बहस भी थी कि रिकार्ड में दर्ज ‘आरए’ राकेश अस्थाना हो सकता है या फिर इसका मतलब रनिंग एकाउंट होगा।

हालांकि हाल में एजेंसी के तीसरे सबसे वरिष्ठ अफसर (एके शर्मा) के नेतृत्व में शुरू हुई आंतरिक सीबीआई जांच में इस बात की जांच की जा रही है कि क्या अस्थाना ने अपने सीबीआई के प्रभाव को संदेसरा और स्टर्लिंग बायोटेक के दूसरे निदेशकों के खिलाफ जारी इनकम टैक्स की विभिन्न कार्रवाइयों को भटकाने के लिए किया था।

संदेसरा घराने का डाउनफाल

संदेसरा के साम्राज्य में क्रैक दो चरणों में आया जिनके बारे में जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। पहला उनके अगुवा बिजनेस वेंचर स्टर्लिंग बायोटेक में गिरावट का है। ढेर सारे प्रदूषण से जुड़े मुद्दों ने वडोदरा के बाहर स्थित इस कंपनी को एक साल के लिए बंद होने पर मजबूर कर दिया। यह एक ऐसी घटना थी जिससे वो फिर कभी उबर नहीं पाया। अगस्त 2008 में कंपनी का स्टॉक 196.50 पर ट्रेंड कर रहा था। वहां से वो एक साल बाद अक्तूबर 2009 में गिरकर 90.20 पर आ गया। और फिर 2012 में तो वो तकरीबन जीरो पर आ गया।

ये वही समय था जब - 2006 से आगे- संदेसरा ने बड़े स्तर पर उधार लेना शुरू किया। इसमें से ज्यादातर उधार देने वाले आंध्रा बैंक से जुड़े समूह थे जिसके निदेशक अनूप प्रकाश गर्ग को ईडी ने भाइयों से कैश पेमेंट हासिल करने के लिए बुक किया है।

इस मामले में ढेर सारे पब्लिक इस्टीमेट हैं कि उन्होंने कितना उधार लिया और उसका कितना परसेंट किस समूह की कंपनी को गया।

लेकिन एक नजर में बात करें तो संदेसरा समूह ने 2006 से लेकर 2011 के बीच 6000 करोड़ रुपये उधार लिए। इसका एक बड़ा हिस्सा तकरीबन 3000 करोड़ रुपये स्टर्लिंग बायोटेक को गया। लेकिन बाकी दूसरे कोर बिजनेस के विस्तार में बगैर किसी हिसाब के खर्च किया गया: स्टर्लिंग सेज (900 करोड़), नाईजीरिया में स्टर्लिंग आयल (1500 करोड़) और पीएमटी मशीन (300 करोड़)।

इसमें से कितना पैसा खराब बिजनेस के फैसले में चला गया और कितना फंड के डाइवर्जन का नतीजा है जैसा कि सीबीआई और ईडी आशंका जता रहे हैं? यही चीज है जिसकी मौजूदा समय में जारी जांच से पता चलेगा।

2012 से समूह की तस्वीर नाजुक दिखनी शुरू हो गयी थी। मई 2012 में निवेशकों के एक संस्थागत समूह ने संदेसरा ग्रुप के स्टर्लिंग बायोटेक द्वारा 2007 में पांच साल के लिए बेचे गए फारेन करेंसी कनर्वटेबिल बांड (एफसीसीबी) के आखिरी तारीख में भुगतान में नाकाम होने पर लंदन की कोर्ट में खींच लिया।

उस समय नितिन संदेसरा ने मीडिया में इसको अस्थाई तौर पर कैश में मिचमैच की बात कहकर खारिज कर दिया।  

लेकिन दूसरे लोग इसको लेकर ज्यादा आशावादी नहीं थे। स्टर्लिंग बायोटेक के कर्ज के बोझ पर 2010 में लिखते हुए मार्केट एनालिस्ट दीपक शेनाय ने कहा था कि ‘ आज (16 मई 2012 ) तकरीबन 184 मिलियन डालर पेमेंट किया जाना है- कुल 993.6 करोड़ रुपये। 

ऐसा लगता है कि स्टर्लिंग बायोटेक पैसा पा गया है। उनका हाल का नतीजा दिखाता है कि जेएफएम क्वार्टर में अकेले 92 करोड़ का नुकसान है यहां तक कि दिसंबर के क्वार्टर में भी नुकसान दिखा रहा है। प्रदूषण विरोधी मानकों के चलते उनका जिलेटिन का मुख्य व्यवसाय गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है और उनके CoQ10 उत्पाद को चीन उत्पादों की सस्ती कीमत के चलते चोट पहुंची है।

स्टर्लिंग बायोटेक को तो हम लोग पहले ही गया हुआ केस बता चुके हैं लेकिन उसका नतीजा किसी पहाड़ के गिरने से कम नहीं होगा।’

2017 तक ये बात बिल्कुल साफ हो चुकी थी कि ग्रुप के व्यवसाय के विस्तार की योजना फेल हो गयी है और खासकर दाहेज पोर्ट और जंबुसार प्रोजेक्ट बिल्कुल नाकाम हो गए हैं।

उसके नाईजीरियाई तेल व्यवसाय की जहां तक बात है तो उसने 2015 तक चेतावनी देना शुरू कर दिया था। उस साल कंपनी ने एस साहसिक रुख दिखाते हुए कहा कि वो तेल विस्तार के आपरेशन में 3 बिलियन डालर का निवेश करने जा रही है। और 2017 तक एक लाख बैरेल तेल प्रतिदिन के हिसाब से पैदा करेगी।

जून 2016 में तेल उद्योग से जुड़ी एक वेबसाइट पेट्रोवाच ने रिपोर्ट किया कि कैसे नाईजीरिया में कंपनी के ढेर सारे कर्मचारियों जिन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला, ने ट्विटर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद मांगी है।

‘ स्टर्लिंग आयल एक्स्प्लोरेशन एंड एनर्जी के बिलेनेयर मालिक नितिन संदेसरा द्वारा नाईजीरिया में कंपनी के कर्मचारियों पर कथित धमकी और दबाव के चलते उन्हें भारत सरकार से मदद मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा है।’

12 जून को कंपनी के एक कर्मचारी पार्थ कुमार ने सुषमा स्वराज को ट्वीट कर कहा कि ‘6-7 महीने से हम बगैर किसी पैसे के दास की तरह सातों दिन काम कर रहे हैं। अब वो हमारा वेतन और बकाया क्लीयर नहीं कर रहे हैं। अगर कोई शिकायत करता है तो कंपनी का मैनेजमेंट उसको और उसके परिवार को धमकी देता है।’

अक्तूबर 2017 में आखिरी झटका लगा जब सीबीआई ने संदेसरा समूह के मैनेजमेंट भाइयों, दीप्ति संदेसरा और अज्ञात प्राइवेट पर्सन्स और सरकारी नौकर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून और मनी लांडरिंग निरोधक कानून 2002 के तहत दो केस दर्ज किए।

एक एफआईआर कहती है कि ‘एक विश्वस्त सूत्र से पता चला है कि एम/एस स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड और उसके ऊपर दिए गए निदेशक और दूसरों ने एक दूसरे के साथ मिलकर बेईमानी की मंशा से आंध्रा बैंक और दूसरे पब्लिक सेक्टर के बैंकों को धोखा देने एक आपराधिक षड्यंत्र रचा।’

इसमें आगे लिखा गया है कि ‘स्टर्लिंग बायोटेक ग्रुप को 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन मिला जो अब एपीए में बदल चुका है।’

ईडी द्वारा पिछले शुक्रवार को दाखिल की गयी चार्जशीट और भी तगड़ी है। ये लोन की राशि को और भी ज्यादा बताती है- 8000 करोड़- और इस बात को विशिष्ट रूप से चिन्हित करती है कि बैंकों को धोखा देने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा गया था।

ईडी ने एक बयान में कहा था कि ‘अपनी फ्लैगशिप कंपनी की बैलेंससीट में उन्होंने छेड़छाड़ की है और बैंकों को ज्यादा लोन देने के लिए प्रेरित किया है। ऋण हासिल करने के बाद फंड का गैर अधिकृत उद्देश्यों के तहत कंपनियों के पूरे एक जाल में निवेश किया।’

लेकिन जब सीबीआई ने केस दर्ज किया तब तक बहुत देरी हो चुकी थी। संदेसरा फैमिली देश छोड़कर भाग चुकी थी- पहले कहा जाता है कि दुबई और उसके बाद नाईजीरिया। 

क्या उनके संपर्क और कथित घूस ने गिरफ्त मजबूत होने से पहले उन्हें भागने में मददगार साबित हुआ? ये समय बताएगा, लेकिन जनवरी 2018 में एडिशनल सेशन जज सिद्धार्थ शर्मा जो स्टर्लिंग केस से जुड़े छोटे व्यवसायियों की जमानत पर सुनवाई कर रहे थे, ने ईडी से बिल्कुल यहीं सवाल पूछा था।

शर्मा ने कहा था कि  ‘पूरी व्यवस्था ही भ्रष्ट है। आप (ईडी) लोग केवल छोटी मछलियों को पकड़ रहे हैं। मैं इस बात को लेकर चकित हूं कि आज की तारीख तक आरोपी कंपनी (स्टर्लिंग बायोटेक) का कोई अधिकारी, चार्टर्ड एकाउंटेंट और दूसरे लोग क्यों नहीं गिरफ्तार किए गए? पिक और चूज मत करिए।’

(ये लेख की दूसरी और आखिरी किश्त है जो मूल रूप से अंग्रेजी में दि वायर में प्रकाशित हुआ था।)

                                                        समाप्त








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