एनएसए, केंद्रीय मंत्री, पीएमओ और कैबिनेट सचिव सभी सवालों के घेरे में; सीबीआई डीआईजी ने लगाए गंभीर आरोप

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, सोमवार , 19-11-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सीबीआई के डीआईजी एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल पर एजेंसी की गतिविधियों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि डोवाल ने सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के घर पर छापे की योजना पर रोक लगा दिया था। गौरतलब है कि सिन्हा ही अस्थाना के घूस लेने के आरोपों की जांच कर रहे थे। उनके साथ टीम में शामिल एजेंसी के दूसरे सदस्यों का थोक भाव में तबादला कर दिया गया था। इसके साथ ही उन्होंने केस में शामिल दो दलालों को डोवाल का बेहद नजदीकी बताया है।

सिन्हा ने याचिका में कहा है कि शिकायतकर्ता साना सतीश बाबू ने उन्हें बताया था कि केंद्रीय कोयला और खनन राज्य मंत्री हरिभाई परथीभाई चौधरी ने सीबीआई से संबंधित मामलों में सहयोग करने के लिए कई करोड़ रुपये घूस के तौर पर लिए। गुजरात से जुड़े एमपी चौधरी को पीएम मोदी का बेहद करीबी माना जाता है।

याचिका में ये भी कहा गया है कि रॉ अफसर सामंत गोयल की बातचीत के एक सर्विलांस में उन्हें ये कहते हुए सुना गया कि पीएमओ ने सीबीआई मुद्दे को मैनेज कर दिया। और उसी रात अस्थाना मामले की जांच कर रही पूरी सीबीआई टीम हटा दी गयी।

सिन्हा ने इस बात का भी दावा किया है कि साना सतीश बाबू ने मोईन कुरैशी केस में सीवीसी केवी चौधरी से मुलाकात की थी और केंद्रीय विधि सचिव सुरेश चंद्रा ने 11 नवंबर को साना से संपर्क कर उसे प्रभावित करने का प्रयास किया था।

अपनी याचिका में सिन्हा ने कहा है कि “मनोज प्रसाद (अस्थाना मामले में गिरफ्तार दलाल) के मुताबिक मनोज और सोमेश के पिता श्री दिनेश्वर प्रसाद रॉ के ज्वाइंट सेक्रेटरी पद से रियाटर हुए और मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से उनका नजदीकी रिश्ता है। सीबीआई हेडक्वार्टर में लाए जाने के बाद मनोज ने कई बातों में सबसे पहली बात यही कही थी। और चकित होने के साथ ही इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि एनएसए श्री डोवाल के साथ नजदीकी रिश्ता होने के बावजूद सीबीआई उसे कैसे उठा सकती है।” 

याचिका के मुताबिक प्रसाद ने दावा किया था कि हाल में “ उसके भाई सोमेश और सामंत गोयल ने एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत मामले में एनएसए अजीत डोवाल की मदद की थी।”

सिन्हा ने इस बात का भी दावा किया है कि फ्रांस के लियोन में अपना एक डेलीगेट नियुक्त करने के लिए इंटरपोल के चुनाव से भारत ने अपना हाथ खींच लिया था। उनके मुताबिक इसके लिए ज्वाइंट डायरेक्टर एके शर्मा को एक मनोनीत सदस्य के तौर पर भेजा जाना था। 

याचिका में कहा गया है कि “चुनाव इस साल नवंबर के किसी तीसरे सप्ताह में होने थे। और सितंबर में किसी समय श्री एके शर्मा को बैठक के लिए विदेश जाना था लेकिन आखिरी समय पर उनकी यात्रा को एकाएक रद्द कर दिया गया। ये सूचित किया गया कि भारत चुनाव से अपना हाथ खींच रहा है।”

सिन्हा ने याचिका में दावा किया है कि अस्थाना के खिलाफ 15 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज कराने के बाद सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने एएसए अजीत डोवाल को 17 अक्तूबर को इसकी सूचना दी थी।

याचिका के मुताबिक “और फिर उसी रात ये बात पता चली कि एनएसए ने श्री राकेश अस्थाना को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात बतायी। माना जाता है कि श्री राकेश अस्थाना ने अपनी गिरफ्तारी को रोकने की एनएसए से गुजारिश की।”

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि मामले के जांच अफसर एके बस्सी ने अस्थाना का सेलफोन जब्त करने और घर पर जांच करने की इजाजत मांगी तो “सीबीआई के डायरेक्टर ने तुरंत इजाजत नहीं दी और बताया कि एनएसए ने ऐसा करने की अनुमति नहीं दी है।” 

याचिका में बताया गया है कि 22 अक्तूबर को जब ऑन रिकार्ड निदेशक से अनुमति मांगी गयी तो एक बार फिर उन्होंने उसको खारिज कर दिया।

याचिका कहती है कि “पूछताछ किए जाने पर डायरेक्टर/ याचिकाकर्ता ने उत्तर दिया कि उनको एनएसए/अजीत डोवाल से हरी झंडी नहीं मिल रही थी।”

सिन्हा ने अपनी याचिका में दावा किया है कि जब 20 अक्तबूर को डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार के घर पर छापे डाले जा रहे थे तो सीबीआई निदेशक ने उनसे उसे रोक देने के लिए कहा। याचिका कहती है कि “…..आवेदक....निदेशक से पूछा, जिसका डायरेक्टर ने जवाब दिया कि ये निर्देश एनएसए श्री डोवाल के यहां से आया है।”

सिन्हा ने इस बात का दावा किया है कि मनोज प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद बस्सी के पास दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात एक डीसीपी का कॉल आया जिसका उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।

याचिका के मुताबिक “बाद में स्पेशल सेल के एक और इंस्पेक्टर ने फोन किया और ये जानने की कोशिश की कि क्या सही में मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच से पता चला कि पूछताछ का स्रोत कैबिनेट सचिवालय था।”

सामंत गोयल की बातचीत का हवाला देते हुए- जिसकी सीबीआई ने स्नूपिंग की है- सिन्हा ने आरोप लगाया कि ये पीएमओ था जिसने 23 अक्तूबर को सीबीआई के बड़े अफसरों को हटाने का निर्देश दिया था।

सिन्हा ने याचिका में बताया कि “23.10.2018 को आवेदक को डीआईजी/डीडी (एसयू) द्वारा सूचना दी गयी कि किसी ने सामंत गोयल को फोन किया और उससे मदद करने के लिए कहा जिसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि पीएमओ के सहयोग से चीजें मैनेज कर ली गयी हैं और सब कुछ ठीक-ठाक है। उसी रात पूरी जांच टीम को शिफ्ट कर दिया गया।”

सुप्रीम कोर्ट के सामने मौजूदा केस के संदर्भ का बगैर जिक्र किए याचिकाकर्ता ने एमओएस हरिभाई चौधरी पर घूस लेने का आरोप लगाया।

याचिका में कहा गया है कि “किसी समय जून 2018 के पहले पखवाड़े में मौजूदा समय में भारत सरकार के कोयला और खनन राज्य मंत्री हरिभाई परथी भाई चौधरी को कुछ करोड़ रुपये दिए गए थे। श्री साना के मुताबिक श्री हरिभाई ने एमओएस (पी) जिसे सीबीआई निदेशक रिपोर्ट करते हैं, के जरिये हस्तक्षेप किया था। पैसा अहमदाबाद के एक विपुल के जरिये दिया गया था। इन सारे तथ्यों का खुलासा साना द्वारा 20.10.2018 को दोपहर से पहले किया गया था। मैंने तत्काल मामले की जानकारी डायरेक्टर और एडी (एके शर्मा) को दे दी थी।”

याचिका कहती है कि आलोक वर्मा और अस्थाना- दोनों मामलों में साना सतीश बाबू का बयान बेहद महत्वपूर्ण है- के खिलाफ लगे घूस के आरोपों की जांच को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीवीसी को दिए जाने के बाद मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता को प्रभावित करने की कोशिश की गयी। उन्होंने बताया कि साना से संपर्क में बने रहने के लिए केंद्रीय विधि सचिव सुरेश चंद्रा लगातार कोशिश करते रहे।

याचिका में बताया गया है कि “श्री साना ने 08.11.2018 की शाम को ह्वाट्सएप पर उनसे बातचीत की। केंद्रीय विधि सचिव श्री सुरेश चंद्रा ने कहा कि वो नीरव मोदी से जुड़े किसी मामले में लंदन में हैं और वो कैबिनेट सचिव श्री पीके सिन्हा का संदेश उन्हें पहुंचाने के लिए पिछले चार-पांच दिनों से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं। और कि केंद्र सरकार उनकी पूरी रक्षा करेगी। और मंगलवार (13 नवंबर को) वहां भीषण बदलाव होगा और ये कि बुधवार को (14 को) उन्हें उनसे (सुरेश चंद्रा) मिलना चाहिए।”

सिन्हा ने दावा किया है कि मोईन कुरैशी केस में साना ने सीवीसी केवी चौधरी से मुलाकात की थी। और चौधरी ने अस्थाना से साना के खिलाफ सबूतों के बारे में पूछा था।

याचिका में कहा गया है कि “साना ने इस बात का भी खुलासा किया था कि उसने सीवीसी श्री केवी चौधरी से एक शख्स गोरंटला रमेश (साना के मुताबिक सीवीसी श्री केवी चौधरी का घनिष्ठ रिश्तेदार और हैदराबाद स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल का मालिक है) के साथ दिल्ली में किसी स्थान पर मुलाकात की थी और मोईन कुरैशी केस के सिलसिले में बात की थी। उसी के बाद सीवीसी ने राकेश अस्थाना को अपने निवास पर बुलाया और उनसे जानकारी हासिल की। श्री राकेश अस्थाना ने सीवीसी को बताया कि सबूत के तौर पर उनके खिलाफ बहुत ज्यादा कुछ नहीं है।”

सिन्हा ने दावा किया है कि मनोज प्रसाद से पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि उसकी लंदन में स्टर्लिंग बायोटेक के नितिन संदेसरा से भी मुलाकात हुई थी। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया है कि मनोज और साना के बीच संदेशों का आदान-प्रदान शिकायत में किए गए घूस के जिक्र की पुष्टि करता है।


 

  








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