30 हजार करोड़ के आस-पास का है पूरा घोटाला,कारपोरेट मंत्रालय समेत कई जगहों पर हुई थी शिकायत

ख़ास रपट , , शुक्रवार , 16-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। पीएनबी घोटाले की रकम समय के साथ बढ़ती जा रही है। पंजाब नेशनल बैंक ने खुद माना है कि 293 एलओयूज के जरिये उसे 11400 करोड़ रुपये की चपत लगी है। और इस काम को डायमंड व्यवसायी नीरव मोदी ने अंजाम दिया है। इसके अलावा विभिन्न बैंकों द्वारा चार कंपनियों फायरस्टार इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, फायरस्टार डायमंड फेज, गीतांजली जेम्स और गीतांजली एक्सपोर्ट्स कारपोरेशन को दिए गए 9906 करोड़ रुपये के लोन को जोड़ दिया जाए। तो ये राशि बढ़कर 21306 करोड़ रुपये हो जाती है। इसमें अगर इस पूरे प्रकरण के दौरान पीएनबी के स्टाक एक्सचेंज में होने वाले घाटे को जोड़ दिया जाए जिसकी वैल्यू तकरीबन 7 हजार करोड़ रुपये बतायी जा रही है। तब ये राशि 28306 करोड़ के आस-पास पहुंच जाती है।

इसके अलावा डायमंड आरयूस, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड को दूसरे बैंकों द्वारा दिए गए कर्जे की रकम तकरीबन 3000 करोड़ रुपये है। जिससे संबंधित आज इंडियन एक्सप्रेस में रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई है। ऐसे में इन सब को मिलाकर सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि घोटाले की कुल राशि 30 हजार करोड़ रुपये से ऊपर जाती है।

इस बीच सामने आए कुछ और खुलासों ने सरकार को शर्मिंदा होने के लिए मजबूर कर दिया है। पीएमओ को 26 जुलाई 2016 को हरि प्रसाद द्वारा भेजी गयी शिकायत से पहले भी इसकी कई शिकायतें, कई दूसरे पीड़ितों द्वारा सरकार के कई महकमों में की जा चुकी हैं। और इन सबमें वो सारी आशंकाएं जताई गयी हैं जिनका देश इस समय सामना कर रहा है। यहां तक कि गुजरात हाईकोर्ट में भी एक शख्स ने लाल झंडी दिखायी थी।

वैभव खुरानिया नाम के एक शख्स ने 7 मई, 2015 को भारत सरकार के कारपोरेट अफेयर्स मंत्रालय में एक विस्तृत शिकायत की थी। उन्होंने बाकायदा गीतांजलि जेम्स और उसके मालिक मेहुल सी चौकसी को पार्टी बनाया था। 

कारपोरेट मंत्रालय को शिकायत।

अपनी शिकायत में उन्होंने मेहुल के बारे में कहा था कि “हमको पता चला है कि उसने केवल छोटे, मध्यम और बड़े निवेशकों को ही धोखा नहीं दिया है बल्कि ढेर सारे बैंकों और कोटक महेंद्रा, पीएनबी, आईसीआईसीआई, एलआईसी आदि जैसी दूसरी वित्तीय संस्थाओं को भी धोखा दिया है।” 

शिकायत में कहा गया था कि “कंपनी की सालाना रिपोर्ट देखने पर ऐसा लगता है कि वो भारत से बहुत सारा पैसा विदेश ले गया होगा और उसे वहां की कंपनियों में निवेश किया होगा। उसकी घरेलू कंपनियां घाटे में चल रही हैं और विदेशी कंपनियां फायदे में हैं। हमारे पास किसी तरह की विशेषज्ञता तो नहीं है जिससे हम इसका अध्ययन कर सकें कि ऐसा कैसे हो रहा है। लेकिन हम अपील करेंगे कि आप इसकी सीबीआई/ईडी/एसबीआई/ईओडब्ल्यू आदि किसी से जांच कराएं।” 

इस शिकायत में विनसम मामले का भी हवाला दिया गया है। जिसमें उसका मालिक जतिन मेहता 6500 करोड़ रुपये का धोखा देकर विदेश भाग गया था। इसमें तमाम बैंकों से लिए गए मेहुल के कर्जों को गिनाया गया है। ये कर्जे उस समय 4000 करोड़ रुपये से ऊपर थे। जो इलाहाबाद बैंक, आईसीआईसीआई, कारपोरेशन बैंक, आंध्रा बैंक, बैंक आफ बड़ौदा और बैंक आफ इंडिया से लिए गए थे।

शिकायत में खुरानिया ने कहा है कि “चौकसी दावा करता है कि उसे पैसे अपने व्यवसाय को फिर से जिंदा करने के लिए चाहिए लेकिन सचाई ये है कि वो इन सब पैसों को लेकर विदेश भाग जाने की फिराक में है।”

इसमें यहां तक इशारा किया गया है कि “हमें (हालांकि अभी बाजार से मिली ये अपुष्ट सूचना है) जानकारी मिली है कि उसने बेटा, बेटी, पत्नी आदि परिवार के सदस्यों को विदेश में शिफ्ट कर दिया है। और दुबई, यूएसए, बेल्जियम, सिंगापुर आदि में से किसी जगह पर अपना ठिकाना बना लिया है। जहां से वो अपने व्यवसाय की देखभाल कर सकता है....वो अपना सारा पैसा भारत से अपनी विदेशी कंपनियों में डायवर्ट कर रहा हो जिसके पीछे अपने निवेशकों, बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को धोखा देने के जरिये भागकर वहां बस जाने की एक गलत मंशा काम कर रही हो।” खुरानिया ने मेहुल के खिलाफ सेबी में भी शिकायत की थी। जिसकी रिसीविंग उनके पास मौजूद है। 

सेबी में शिकायत।

इसके अलावा गुजरात हाईकोर्ट में मेहुल चौकसी की ओर से दायर एक याचिका में दिग्विजय सिंह जडेजा नाम के एक शख्स ने शपथ पत्र दिया है। उस शपथ पत्र में जडेजा ने साफ-साफ कहा है कि “मैं माननीय कोर्ट का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि याचिकाकर्ता के ऊपर 9872 करोड़ रुपये का कर्ज है और ये कारपोरेट अफेयर्स मंत्रालय की वेबसाइट पर दर्ज है। और इस बात की पूरी आशंका है कि याचिकाकर्ता विजय माल्या की तरह देश छोड़कर भाग सकता है। उसकी पत्नी का दुबई के बुर्ज खलीफा में अपार्टमेंट है। और उसका नतीजा ये होगा कि उसके खिलाफ दायर कई याचिकाएं फिर पेंडिंग में रह जाएंगी।” 

हाईकोर्ट में मामला।

बैंक उस समय भी नींद से नहीं जागे जब 7 जून 2015 को रेटिंग एजेंसी केयर ने फायरस्टार इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड की बैंक सुविधाओं के लिए दी गयी अपनी रेटिंग को वापस ले लिया। बैंकों ने पता नहीं किन वजहों से इसकी पूरी तरह से अनदेखी कर दी।






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Karan Singh :: - 02-17-2018
इस घोटाले में सत्ताधरी लोगों का हाथ होने की पूरी संभावना है।

Dinesh Shah :: - 02-16-2018
When this government is found involved in some unsavory incident it hides under congress umbrella to justify itself,and create an illusion of its invincibility.

Dinesh Shah :: - 02-16-2018
When this government is found involved in some unsavory incident it hides under congress umbrella to justify itself,and create an illusion of its invincibility.