जम्मू में आयुध डिपो के सामने मकान बनाने पर अड़े बीजेपी नेता, एतराज जताने पर सेना को कर रहे हैं बदनाम

ख़ास रपट , नई दिल्ली, सोमवार , 14-05-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आर्मी के आयुध भंडार डिपो के नजदीक सूबे के आला बीजेपी नेताओं द्वारा गैर कानूनी निर्माण कार्य का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एतराज जताने पर उल्टा नेताओं ने सेना को ही घेरे में ले लिया और उस पर आस-पास के लोगों को परेशान करने का आरोप लगा दिया। इसका सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि ये जमीन बीजेपी नेताओं द्वारा जम्मू-कश्मीर बैंक से पावर प्लांट बनाने के मद में लिए गए 29.31 करोड़ के कर्जे में से खरीदी गयी है। और कर्जे को वापस न करने पर बैंक ने अब उसे एनपीए घोषित कर दिया है। इस पूरे मामले में बीजेपी के कोई अदना नेता नहीं बल्कि सूबे के चोटी के नेताओं में शुमार स्पीकर निर्मल सिंह और उप मुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता शामिल हैं।

पूरा घटनाक्रम 

जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता कविंदर गुप्ता, मौजूदा स्पीकर निर्मल सिंह और जम्मू-पुंछ से सांसद जुगल किशोर ने मिलकर हिमगिरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के तहत 2014 में नगरोटा स्थित आर्मी हथियार डिपो के पास 12 एकड़ जमीन खरीदी। उसके बाद निर्मल सिंह ने डिपो से महज 530 वर्ग मीटर की दूरी पर अपने 2000 वर्ग मीटर प्लाट में निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

निर्माण शुरू होता देख आर्मी की 16वीं कॉर्प्स के लेफ्टिनेंट जनरल सरनजीत सिंह ने 19 मार्च 2018 को स्पीकर निर्मल सिंह को खत लिखा। इस खत में उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को जाहिर किया। जिसमें इस निर्माण में तमाम नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया था। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात 7 अगस्त 2015 को जम्मू के कलेक्टर द्वारा जारी किया गया नोटिफिकेशन था। जिसमें डिपो की चाहरदीवारी के एक हजार गज के भीतर में किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी थी।

लेफ्टिनेंट जनरल ने निर्मल सिंह से रिहाइशी मकान के निर्माण कार्य पर फिर से विचार करने की गुजारिश की थी। और उसे हथियारों के अड्डे के पास होना उसके लिए भी खतरनाक बताया था। लेकिन सत्ता के अहंकार में निर्मल सिंह ने उनके विरोध को खारिज कर दिया। ऊपर से सेना पर ही राजनीतिक मंशा से काम करने का आरोप जड़ दिया। वो यहीं नहीं रूके इससे भी दो कदम आगे जाकर उस पर आस-पास के नागरिकों को परेशान करने का आरोप लगा दिया।

निर्मल सिंह का विवादित मकान।

इस मामले का एक दूसरा भी पक्ष है जो इससे भी ज्यादा स्याह है। जमीन खरीदने वाले इस हिमगरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर जम्मू-कश्मीर बैंक का 29.31 करोड़ रूपये कर्ज है। जिसे बैंक ने पिछले साल दिसंबर में एनपीए घोषित कर दिया। इस मामले में बैंक ने उप मुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता, स्पीकर निर्मल सिंह उनकी पत्नी ममता सिंह औऱ बीजेपी के लोकसभा सदस्य जुगल किशोर समेत कंपनी के 20 शेयर धारकों, निदेशकों और गारंटरों को नोटिस भेजा था। नोटिस पाने वालों में आरएसएस के प्रचारक भदरवाह और हेडगेवार स्मारक समिति के चेयरमैन सुरिंदर मोहन गुप्ता भी शामिल थे।

इस नोटिस के मुताबिक बैंक की जम्मू स्थित लिंक रोड शाखा ने हिमगिरी को हिमाचल के चंबा जिले में एक पावर प्रोजेक्ट को लगाने के लिए 2012 में 18.50 करोड़ लोन आवंटित किया था जिसमें 56.83 की क्रेडिट सुविधा भी थी। आपको बता दें 2015 से तब के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह के पास ही पावर मंत्रालय भी था। बाकी लोन बैंक ने बाद में दिया था। 

हिमगिरी इंफ्रास्ट्रक्चर को 3 मेगावाट का ये हाइडल पावर प्रोजेक्ट 2001 में उस समय मिला था जब प्रेम कुमार धूमल हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। लेकिन न तो ये पावर प्रोजेक्ट शुरू हो सका और न ही उस पर कोई काम हुआ। लिहाजा उस पैसे को इस जमीन की खरीद में इस्तेमाल कर लिया गया। अब आगे की कहानी और भी दिलचस्प है। इस जमीन के खरीदने के एक साल के भीतर जम्मू-कश्मीर की गठबंधन सरकार ने इस जमीन को आईआईटी, आईआईएम और चिड़ियाघर स्थापित करने के लिए चिन्हित कर लिया।

कांग्रेस ने आज इन सारे मसलों को उठाते हुए सीधे पीएम मोदी पर निशाना साधा है। उसने कहा है कि क्या मोदी अपने इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। जिन्होंने न सिर्फ देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया है बल्कि सेना को भी अपमानित करने का काम किया है। साथ ही पार्टी ने निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला कहा कि मोदी के 56 इंच का सीना यहीं काम करता दिख रहा है जिसमें उनके नेता अवैध रूप से जमीन कब्जा करने और भारतीय सेना पर हमले करने में इस्तेमाल कर रहे हैं।

  (कुछ इनपुट इंडियन एक्सप्रेस से और कुछ कांग्रेस की विज्ञप्ति से लिए गए हैं।)










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KK Singh :: - 05-15-2018
आरएसएस और भाजपा का असली रूप तो इनके अंग्रेजों द्वारा बनाये गए दिन से ही पता है. अभी भी इनके काम के रवैये में कोई अंतर नहीं पड़ा है! बड़े देशी और विदेशी पूंजीपतियों की चाटुकारिता, देश के सम्पदा को लुटना और बेचना, जनता को लूटना इनका मुख्य मकसद है! पेट्रोल, डीजल, खाद्य सामानों के एकाधिकार कीमत, बढ़ते कर पर माफ़ होते कर्ज और टैक्स अम्बानी और आदनी के, घटते रोजगार, घटते शिक्षा और सवास्थ्य सेवाएं कुछ उदहारण हैं! फौजियों को ओआरओपी (OROP) नहीं दिए, जो आज भी, 1068 दिन से जंतर मंतर पर धरना और प्रदर्शन कर रहे है. और बावजूद मोदी द्वारा आश्वासन के, फौजियों के वोट लेकर, धोखा दिया! देश द्रोहियों, पूंजी के चमचों, जनता विरिधियों को हराओ!

Jyotisna :: - 05-14-2018
Congress mahamurkh hai or BJP Ko milkar dono party mahamurkh bna Rahi hai. Congress kyo evm Ko ban karne ke liye andolan nahi Karti. Loktantra me esa possible hi nahi hai ki BJP Ko chodar baake rajnetik dal evm se sehmat nahi hai to ku ballet paper se chunav ke liye pahal nahi karte. JIS Desh ke carorepati Ra ki sadke har saal ukhaad kar dubara banyi jaati hai bha election commission ka paper ballet ka trfff sahi nahi hai. JIS prkaar Desh ki army ke sansadhao or Takat Ko badane ke liye budget nahi dekha jata hai. Bese hi ballet paper se aane bale budget ki chinta ECI Ko nahi karna chahiye. Banisbat Desh me election commission ki khud ki chavi Ko banane ka kaam karna chahiye. Yadi Congress Abhi bhi evm ban karvane ke liye Anya dalo ke sath lambband nahi Hoti to yeh saaf tour par Desh Ko samajh Lena chahiye ki EVM ki loot me Congress bhi saath hai. Thank chour chour mosere bhai.