सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगी राफेल की खरीद प्रक्रिया की जानकारी

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, बुधवार , 10-10-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से राफेल डील मामले में 36 लड़ाकू विमानों के खरीद की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने आज मामले की सुनवाई के बाद ये निर्देश जारी किया।

हालांकि बेंच ने इस बात को साफ किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विवरण में कीमतें या फिर भारतीय वायुसेना के लिए उपकरण की उपयोगिता उसके दायरे में नहीं आएगा।

इसके साथ ही एमएल शर्मा और विनीत धांडा की ओर से दायर पीआईएल पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि इस चरण में किसी भी तरह की नोटिस नहीं जारी की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इसकी अभी कोई जरूरत नहीं है। आदेश के पीछे उद्देश्य कोर्ट को केवल खुद को संतुष्ट करना है।

बुधवार को सुनवाई के दौरान एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बेंच से पीआईएल को स्वीकार नहीं करने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि “ये राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है....मी लार्ड संसद के भीतर 40 सवाल पूछे गए थे जिनका चयनित जवाब दिया गया....अगर नोटिस जारी होती है तो ये पीएम को होगी और इस तरह से.....परंपरागत तरीके से ये पीआईएल नहीं है जहां कमजोर वर्गों की सुरक्षा का हित जुड़ा हुआ हो.....ये याचिका अपनी प्रकृति में राजनीतिक है और सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लड़ाई में राजनीतिक लाभ पाने के उद्देश्य से दायर की गयी है।”

एजी ने आगे कहा कि “ये एक न्यायिक रूप से पुनर्विचार करने योग्य मुद्दा नहीं है। न्यायालय अंतरराष्ट्रीय समझौतों में हस्तक्षेप नहीं करते....एक घरेलू कोर्ट के लिए उसमें दखल उचित नहीं होगा।”

इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि “अगर हम निर्णय लेने की प्रक्रिया का विवरण एक सील बंद लिफाफे में मांगते हैं तो उस पर आप की क्या प्रतिक्रिया होगी? ये केवल जजों की अपनी संतुष्टि के लिए होगा बगैर टेक्नालाजी के पैमानों को छुए या फिर राष्ट्रीय घटनाक्रमों की शर्तों की उपयोगिता को जाने।”

गौरतलब है कि विनीत धांडा ने अपनी पीआईएल में कोर्ट से पूरे सौदे का विवरण देने के लिए केंद्र को निर्देश देने की बात कही है। इसमें यूपीए और एनडीए के दौर की कीमतों की तुलनात्मक अध्ययन की भी बात कही गयी है। इसके साथ ही डसाल्ट द्वारा रिलायंस को कांट्रेक्ट दिए जाने की भी जांच की मांग की गयी है। इसके पहले तहसीन पूनावाला ने भी मार्च महीने में एक पीआईएल दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।








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