फ्रांसीसी पेपर “ले मोंदे” ने खोला राफेल की तीन गुना कीमतों का राज, निपटाया गया था अंबानी का 11 हजार करोड़ का विवाद

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, शनिवार , 13-04-2019


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जनचौक ब्यूरो

आज ही फ्रेंच अखबार ले मोंदे ने बताया है कि अनिल अम्बानी की फ्रेंच सरकार ने 143.7 करोड़ यूरो यानि लगभग 11 हज़ार करोड़ रुपये की टैक्स माफ़ी इसी शर्त पर की थी कि इंडियन गवर्नमेंट 36 राफेल विमानों को 128 राफेल के कुल दाम में खरीदेगी और साथ ही इस पर टैक्स भी जुड़ेगा। यही वजह है कि राफेल की कीमत तीन गुना बढ़ गयी |

इस इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के अनुसार अनिल अम्बानी की एक टेलिकॉम कंपनी फ्रांस में रजिस्टर्ड है। और 2007 से 2012 के बीच जांच करने पर उस पर कुल 153 करोड़ यूरो की चोरी पकड़ी गयी | जिस पर अम्बानी ने सत्तर लाख यूरो देने का प्रस्ताव दिया। लेकिन उस वक़्त वहां की सरकार ने नहीं माना और 2015 तक मामला खिंचता रहा | बाद में जब राफेल डील हुई तो इस मामले का सेटिलमेंट किया गया और फ्रांस सरकार ने सत्तर लाख यूरो लेकर मामले को रफा दफा कर दिया।

पर अब यहां यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि फ्रांस में इसका खुलासा होने के बाद वहां की आर्थिक अपराध शाखा और प्रवर्तन शाखा मामले का स्वतंत्र जांच करेगी और इसमें ओलेंदे और वर्तमान राष्ट्रपति दोनों के फंसने की आशंका बहुत प्रबल है |सनद रहे की यह 26 अक्तूबर 2018 को शेरपा नामक एक फ्रेंच एनजीओ ने फ्रेंच अथॉरिटीज को राफेल में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी और इस सौदे से जुड़े सभी व्यक्तियों की जांच की मांग की थी | इसी जांच में यह तथ्य सामने आया। और अब वहां इस पर आगे कार्रवाई होगी।

अनिल अंबानी भारत में डसॉल्ट एविएशन के छत्तीस फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों की इस बिक्री के मुख्य लाभार्थियों में से एक हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी हैं। इस मसले पर सरकार के विरोध के बगैर एक दिन भी नहीं जाता। विपक्ष सीधे-सीधे मोदी पर 7.9 अरब यूरो के इस अनुबंध का लाभ अपने चहेते उद्योगपति को देने का आरोप लगा रहा है। इस सिलसिले में सरकार ने फ्रांस सरकार से 2015 में बातचीत की और फिर इसमें मोदी ने अपने दोस्त अंबानी का पक्ष लिया।

फ्रांस में, भ्रष्टाचार विरोधी एनजीओ शेरपा ने 26 अक्तूबर, 2018 को, राष्ट्रीय वित्तीय कार्यालय (पीएनएफ) के साथ, इस लेन-देन के आसपास के प्रभाव में भ्रष्टाचार और अवैध व्यापार के संदेह की जांच शुरू करने के लिए एक शिकायत दर्ज की।

अखबार से मिली जानकारी के अनुसार फ्रांस ने रिलायंस कम्युनिकेशंस अनिल अंबानी की ओर से एक फ्रांसीसी कंपनी के पक्ष में 143.7 मिलियन यूरो की कुल देय राशि की वसूली को रद्द कर दी है। यह विवाद फरवरी और अक्तूबर 2015 के बीच सुलझाया गया था, उस समय जब भारत और फ्रांस छत्तीस लड़ाकू विमानों की बिक्री पर बातचीत कर रहे थे।

उस साल क्या हुआ था? अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली फ्रांसीसी कंपनी रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस दूरसंचार सेवाओं को प्रदान करती थी। विशेष रूप से रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों के साथ यह यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक ट्रान्साटलांटिक पनडुब्बी दूरसंचार केबल आदि क्षेत्रों में सक्रिय थी।

(यह खबर अभी मूल रूप से फ्रेंच भाषा में है। कैलाश सरन और गिरीश मालवीय ने गूगल की मदद से इसका कुछ तर्जुमा किया है। वही ऊपर दिया जा रहा है।) 

 








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