कितनी व्यवहारिक है राहुल की न्यूनतम आय योजना?

ख़ास रपट , नई दिल्ली, मंगलवार , 26-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा घोषित की गयी न्यूनतम आय योजना चुनाव में गेमचेंजर साबित हो सकती है। हालांकि अभी तक उन्होंने पूरी योजना का खुलासा नहीं किया है और न ही ये बताया है कि इस पूरे लक्ष्य को हासिल कैसे किया जा सकता है। लेकिन मोटी-मोटी बात उन्होंने जो कही है वह यह कि देश के सबसे निचले पायदान पर खड़े 20 फीसदी लोगों यानी 5 करोड़ परिवारों के तकरीबन 25 करोड़ लोगों को न्यूनतम आय की गारंटी करेंगे।

उनका कहना है कि हर परिवार को न्यूनतम 12000 रुपये की आय होनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने देश की आय का डेटा विश्लेषण किया है जिसके मुताबिक तकरीबन 5 करोड़ परिवारों की हर माह आय 5 से लेकर 6 हजार रुपये है। लिहाजा इसे 12 हजार रुपये करने के लिए सरकार उन्हें अतिरिक्त 6000 रुपये प्रतिमाह मुहैया कराएगी। इस तरह से तकरीबन हर साल सरकार को प्रति परिवार के हिसाब से 72 हजार रुपये की व्यवस्था करनी होगी। और नीचे के 20 फीसदी परिवारों को मुहैया कराने के हिसाब से यह रकम तकरीबन 360000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो जाती है। जो नरेगा में जाने वाले 55 हजार करोड़ का लगभग सात गुना है।

राहुल ने इसे ग्राउंड ब्रेकिंग आइडिया करार दिया है साथ ही कहा है कि यह देश की गरीबी पर मर्मांतक हमला है। प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने कहा है कि यह मेरा वादा है और न्याय जरूर होगा। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इसको लागू कैसे किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी रकम कहां से आएगी। और इससे होने वाले राजकोषीय घाटे से सरकार कैसे निपटेगी। ये कई सवाल हैं जिनका उत्तर आना अभी बाकी है। 

हालांकि पार्टी ने इसका अभी पूरा खुलासा नहीं किया है और उसका कहना है कि इस मसले पर दुनिया भर के बड़े अर्थशास्त्रियों से विचार-विमर्श हो चुका है। पूर्व वित्तमंत्री और घोषणापत्र कमेटी के चेयरमैन पी चिदंबरम ने बताया कि पार्टी ने अर्थशास्त्रियों से राय-मशविरा किया है। और यह बिल्कुल संभव है। हम राजकोषीय घाटे को मैनेज करने में सक्षम होंगे। यह पूछे जाने पर कि यह जीडीपी का लगभग 1.5 फीसदी होगा इसकी भरपाई कैसे करेंगे। चिदंबरम ने कहा कि यह घोणापत्र का वादा है और सरकार द्वारा पारित होने वाली योजना में उसका पूरा विवरण होगा।

लाख टके का सवाल यही है कि कहां से आएंगे 3.6 लाख करोड़ रुपये। हालांकि सरकार पर हमले के नजरिये से राहुल ने जरूर यह बात कह दी कि अगर मोदी 3.5 लाख करोड़ रुपये पूंजीपतियों को दे सकते हैं तो कांग्रेस भी गरीबों के लिए 3.6 करोड़ रुपये जुटा सकती है। सरकार पर हमले और विपक्षी नेता की भूमिका के लिहाज से यह बात समझी जा सकती है लेकिन सचाई यह है कि यह रकम हर साल जुटानी होगी। हालांकि राहुल ने इस बात को साफ नहीं किया कि अगर इस न्यूनतम रकम की गारंटी की जाएगी तो दूसरी सब्सिडियों का क्या होगा जो जनता को किसी न किसी रूप में मुहैया करायी जाती हैं।

जानकारों का कहना है कि दोनों योजनाएं एक साथ नहीं चलायी जा सकती हैं। और अगर ऐसा हुआ तो सरकार पर बोझ बहुत बढ़ जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक प्रस्तावित योजना से जीडीपी में होने वाले राजकोषीय घाटे में 1.9 फीसदी की बढ़त हो जाएगी जो देश के हेल्थ बजट में खर्च होने वाले जीडीपी के 1.4 फीसदी हिस्से से भी ज्यादा होगा।

बहरहाल इसको लेकर सरकार में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस का यह इतिहास रहा है कि वह गरीबी उन्मूलन के नाम पर गरीबों की भावनाओं से खेलती रही है। उनका कहना था कि कांग्रेस आज जिस बात का वादा कर रही है मोदी सरकार उसे पहले ही पूरा कर चुकी है। उन्होंने इसे सीधा-सीधा धोखा करार दिया।


    

 








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