राज्यसभा उपसभापति चुनाव में एनडीए की जीत के मायने

राजनीति , , बृहस्पतिवार , 09-08-2018


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चंद्र प्रकाश झा

केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) में शामिल जनता दल (यूनाइटेड) के प्रत्याशी के रूप में पत्रकार रहे हरिवंश नारायण सिंह  के आज राज्य सभा का उपसभापति निर्वाचित होने के मायने गहरे हैं।  उन्होंने विपक्ष के प्रत्याशी और कांग्रेस सदस्य बीके हरिप्रसाद को हरा दिया है। एनडीए प्रत्याशी को 125 और विपक्षी प्रत्याशी को  105 वोट मिले। हरिवंश को एनडीए के अलावा ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बीजू जनता दल, तेलांगाना राष्ट्र समिति , अन्ना द्रमुक और मनोनीत सदस्यों का भी समर्थन मिला।

हरिवंश  बिहार के मुख्यमंत्री एवं जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। वह करीब 25 बरस तक हिंदी दैनिक प्रभात ख़बर के संपादक रहे जो अब रांची के साथ-साथ  झारखंड और बिहार के अलावा पूर्वोत्तर के भी कुछेक जगहों से छपता है।  वह दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री  चंद्रशेखर के सूचना सलाहकार भी रहे थे।  बीके हरिप्रसाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं। वह पहली बार 1990 में कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य बने।

जीत -हार में 20 वोटों के फर्क से इस चुनाव का पूरा खुलासा नहीं हो सकता। भारतीय संसद के इस स्थाई ऊपरी सदन में कुल 245 सीटें हैं।  एक सीट रिक्त है। अमर सिंह और रीताव्रत बनर्जी असंबद्ध सदस्य हैं।  मौजूदा कुल  244 सदस्यों में से  237 ने ही भाग लिया।  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के तीनों , जम्मू-कश्मीर को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दोनों और आंध्र प्रदेश के विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस के भी दोनों सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया। 

तमिलनाडु के द्रविड़ मुनेत्र कषगम के चार सदस्यों में से दो ही मतदान में भाग ले सके।  ऐसे में मतदान में 237 सदस्यों ने ही भाग लिया जिसके मद्देनज़र सदन की प्रभावी बहुमत संख्या 119 ही रह गई थी। मतदान मंभ भाग लेने वालों  में विपक्षी  कांग्रेस के साथ ही समाजवादी पार्टी , तृणमूल कांग्रेस , तेलुगु देशम पार्टी , बहुजन समाज पार्टी  और वामपंथी  दलों के उपस्थित सदस्य भी शामिल थे।

भारतीय जनता पार्टी  , राज्य सभा में  सबसे बड़ी पार्टी  है। लेकिन भाजपा को कुल 245 सदस्यों के सदन में खुद के बूते स्पष्ट  बहुमत  हासिल  नहीं है। पर वह भारत के संविधान में  संशोधन लाने के लिए सदन में आवश्यक दो -तिहाई बहुमत , एनडीए और उसके बाहर के अन्य दलों के समर्थन से जुटाने के लिए लगातार आगे बढ़ रही है। हालांकि यह तत्काल आसान नहीं है।  जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा  देने के संवैधानिक प्रावधान , धारा 370 को निरस्त करने , समान नागरिक संहिता लागू करने  आदि उपाय करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरुरत है ।

भाजपा को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में खुद का स्पष्ट बहुमत मिला था।  लोकसभा में एनडीए को दो-तिहाई बहुमत भी हासिल है। मोदी सरकार को राज्यसभा में  दो -तिहाई बहुमत में कमी के कारण तीन तलाक पर अंकुश लगाने का  विधेयक , हाल  में ठंडे बस्ते में रखने के लिए  मजबूर होना पड़ा था।  सदन में स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण मोदी सरकार को संसद में कई संशोधन  अधिनियम  और विधेयक , वित्त विधेयक के रूप में पारित कराने का सहारा लेना पड़ा है।  वित्त विधेयक पर राज्यसभा की मंजूरी अनिवार्य नहीं है ।

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने इस चुनाव के बाद कहा कि यह सदन ' अब हरि भरोसे ' है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि हरिवंश  जी का पूरा परिवार जेपी और गांधी से जुड़ा हुआ है। मोदी जी ने यह भी कहा कि ' अगस्त क्रांति ' में बलिया का अहम योगदान रहा है और हरिवंश जी उसी भूमि से हैं। उन्होंने कहा कि  हरिवंश जी ने सादा जीवन जिया है और उन्हें पत्रकारिता  का बड़ा अनुभव है और सांसद के रूप में भी उनका कार्यकाल सफल रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह चुनाव अहम था, क्योंकि दोनों तरफ हरी थे। उम्मीद है हरी कृपा बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि अब संसद में सब हरि भरोसे है। उन्होंने बी के हरिप्रसाद को भी सदन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने और चुनाव लड़ने के लिए बधाई दी। यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने  विपक्ष की हार के बाद कहा , ' कभी हम जीतते हैं और कभी हम हारते हैं।' सदन में विपक्ष और कांग्रेस के नेता  गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आज एक पत्रकार  राजयसभा के उपसभापति बने हैं जिनका  अनुभव सदन के काम आएगा। उन्होंने हिंदी के प्रचार के लिए हरिवंश जी की सराहना करते हुए कहा अब वह किसी पार्टी-विशेष के नहीं  बल्कि सदन के उपसभापति हैं।

राज्यसभा भारत की केंद्रीय विधायिका , यानि संसद का उच्च सदन  है। इसकी अप्रैल में 2018 में रिक्त हुई  59 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव संपन्न हो जाने के बाद चार मनोनीत सीटें भरी जानी शेष थीं। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने हाल में मोदी सरकार की सलाह पर मीडिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ' विशेषज्ञ ' कहे जाने वाले राकेश सिन्हा समेत चार व्यक्तियों को मनोनीत किया है।  अन्य तीन में ओडिसा की विश्व प्रसिद्ध नृत्यांगना , सोनल मान सिंह , पाषाण शिल्पकार रघुनाथ मोहपात्रा  के अलावा  उत्तर प्रदेश के पूर्व भाजपा सांसद रामसकल भी हैं ।

अनिवार्य तो नहीं है लेकिन मनोनीत सदस्य आम तौर पर औपचारिक , अनौपचारिक रूप से सत्ता पक्ष के साथ हो जाते है।  संविधान के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाने वाले सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे विषयों के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है।

स्वतंत्र भारत में द्वितीय सदन की उपयोगिता अथवा अनुपयोगिता के संबंध में संविधान सभा में विस्तृत बहस हुई थी। द्विसदनी केंद्रीय विधायिका बनाने का निर्णय मुख्य रूप से इसलिए किया गया  कि  उसे भारत जैसे विशाल और विविधताओं वाले देश में केन्द्रीयतावादी की जगह संघीयतावादी  राजनीति व्यवस्था के लिए सर्वाधिक सहज  माना गया। संविधान के अनुच्छेद 80 में राज्य सभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित की गई है।  इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। कुल  238 सदस्य, राज्यों के और संघ -राज्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि होते हैं। राज्य सभा के सदस्यों की वर्तमान संख्या 245 है।  इनमें से 233 सदस्य राज्यों और दिल्ली तथा  जैसे संघ- राज्य क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं।

राज्यसभा एक स्थायी सदन है।  यह भंग नहीं होता।  प्रत्येक दो वर्ष बाद राज्य सभा के एक-तिहाई सदस्य सेवा-निवृत्त हो जाते हैं। राज्यसभा के सद्स्य मंत्रि परिषद के सदस्य बन सकते हैं। भारत के उपराष्ट्रपति इसके पदेन सभापति होते हैं। इसलिए सभापति का कार्यकाल 5 वर्षों का ही होता है। मौजूदा उपराष्ट्रपति एम वेंकैय्या नायडू इस पद पर 11 अगस्त  2017 को चुने गए थे।  राज्य सभा अपने सदस्यों में से एक उपसभापति का भी चयन करती है। राज्यसभा में वर्ष 1969 तक वास्तविक अर्थ में विपक्ष का कोई नेता नहीं होता था। उस समय तक सर्वाधिक सदस्यों वाली विपक्षी पार्टी के नेता को बिना किसी औपचारिक मान्यता विपक्षी नेता मानने की प्रथा थी।

विपक्ष के नेता के पद को संसद में ' विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम (1977 ) द्वारा मान्यता प्रदान की गई। संविधान की चौथी अनुसूची में राज्य सभा में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को स्थानों के आवंटन का उपबंध है। स्थानों का आवंटन प्रत्येक राज्य की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। राज्यों के पुनर्गठन तथा नएराज्यों के गठन के परिणामस्वरूप  राज्यों और संघ- राज्य क्षेत्रों को आवंटित राज्यसभा में निर्वाचित स्थानों की संख्या वर्ष 1952 से लेकर अब तक समय-समय पर बदलती रही है। प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों का निर्वाचन राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा ' एकल संक्रमणीय मत ' द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार किया जाता है।

राज्यसभा के वेबसाईट से  मिली जानकारी के अनुसार सदन में अभी भाजपा के 69 और विपक्षी कांग्रेस के 50 सदस्य हैं।  सदन में एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 85 मानी जाती है  स्पष्ट बहुमत के लिए 126 सदस्यों के समर्थन की जरुरत है।  सदन में मौजूद कुल 30 दलों में से  अन्ना द्रमुक  , तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के  13 -13 , बीजू जनता दल , जनता दल यूनाइटेड के 9 -9 ,  तेलंगाना राष्ट्र समिति के 6  , राष्ट्रीय जनता दल और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 5-5  , द्रमुक , बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 4 -4 , शिव सेना , शिरोमणि अकाली दल के 3 -3 , वाईएसआर कांग्रेस , जम्मू -कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के   2-2  ,  जनता दल सेकुलर , केरल कांग्रेस ,इंडियन नेशनल लोक दल , इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग   , बोडोलैंड पीपुल्स पार्टी , नगा पीपुल्स फ्रंट और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया - अठावले के एक -एक सदस्य हैं। शेष अन्य दलों के अथवा निर्दलीय हैं।

राज्य सभा की अप्रैल में 2018 में रिक्त हुई  59 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव संपन्न हो जाने के बाद चार मनोनीत सीटें भरी जानी शेष थी।  उस द्विवार्षिक चुनाव में निर्वाचित सदस्यों में उत्तर प्रदेश से  भाजपा नेता  अरुण जेटली  प्रमुख हैं जो पिछले छह बरस से गुजरात से सदन के सदस्य थे।

राज्य सभा की निवर्तमान सदस्य फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन (सपा) भी छह बरस के एक और कार्यकाल के लिए फिर उत्तर प्रदेश  से ही निर्वाचित होने में कामयाब रहीं। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर निर्विरोध जीत गए थे। बाद के चुनाव में जीतने वालों में कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ( बंगाल ) , भाजपा प्रवक्ता नरसिम्हा राव ( यूपी ) और कर्नाटक से रिपब्लिक टीवी के मालिक राजीव चंद्रशेखर ( भाजपा ) प्रमुख हैं। 

निवर्तमान सदस्यों में से जो चुनांव में नहीं उतरे उनमें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य , क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर और अभिनेत्री रेखा प्रमुख हैँ। उत्तर प्रदेश से भाजपा ने नौ सीटें जीत कर राज्य सभा में अपनी ताकत बढ़ाई . कर्नाटक से बतौर भाजपा प्रत्याशी निर्वाचित राजीव चंद्रशेखर के ' हितों के टकराव ' को लेकर कुछ विवाद है।  शराब कारोबारी विजय माल्या , भारतीय बैंकों से लिए सैंकड़ों करोड़ रूपये के ऋण और ब्याज चुकाए बगैर लन्दन फरार होने के पहले इसी तरह कर्नाटक से बतौर निर्दलीय भाजपा के समर्थन से जीते थे।

माल्या के भी मामले में भी ' हितों का टकराव' था। उन्हें किंगफिशर विमानन कम्पनी का मालिक होने के बावजूद विमानन मामले की संसदीय सलाहकार कमेटी सदस्य भी बना दिया गया था। राजीव चंद्रशेखर , रक्षा कारोबारी होने के बावजूद रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार कमेटी के सदस्य भी हैं। वह सदन में पहले निर्दलीय सदस्य थे।

जनता दल -यूनाइटेड के सदस्य हरिवंश जी के उपसभापति चुन लिए जाने से पार्टी को निश्चय ही गौरव मिला है। पर यह भी गौरतलब है कि  सबसे अमीर राज्यसभा सदस्य , बिहार से जनता दल (यूनाइटेड) के ही  महेंद्र प्रसाद है जिनकी घोषित संपत्ति करीब 4 हज़ार करोड़ रुपये की है।  एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ' नामक एक गैर-सरकारी संगठन की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की गई है।

(चंद्र प्रकाश झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और हर विषय पर पैनी नजर रखने के लिए जाने जाते हैं।)








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