सीआईसी ने अपनाया बेहद कड़ा रुख, आरबीआई से पूछा- लोन डिफाल्टरों की सूची क्यों नहीं हुयी अब तक प्रकाशित

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, मंगलवार , 06-11-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। अब तक का सबसे कठोर कदम उठाते हुए मुख्य सूचना आयुक्त यानी सीआईसी ने रिजर्व बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी कर उससे पूछा है कि आखिर बैंक लोग के डिफल्टरों की सूची अब तक क्यों नहीं जारी की गयी। इसके साथ ही सीआईसी ने ये पूछा है कि इन विलफुल डिफाल्टरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है? और अगर नहीं की गयी तो उसके पीछे वजह क्या है?

लाइव लॉ डॉट इन में सीआईसी की 2 नवंबर को प्रकाशित खबर में आरबीआई, पीएमओ और वित्त मंत्री से भी इसका जवाब देने के लिए कहा गया है। जिसमें उसने पूछा है कि जब फरवरी 2015 में तब के गवर्नर रघुराम राजन अलर्ट पत्र लिख रहे थे तब ये संस्थाएं क्या कर रही थीं?

सीआईसी ने मांगा 16 नवंबर तक जवाब

विलफुल डिफाल्टरों संबंधी एक याचिका पर विचार करते हुए सीआईसी के चेयरमैन श्रीधर आचार्यलु ने कहा कि  ‘कमीशन मानता है कि सैकड़ों करोड़ के  खराब लोन वाले विलफुल डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई न करने या फिर उनका नाम और पूरा विवरण जाहिर न करने का कोई आधार नहीं है। आरबीआई को सबसे पहले 1000 करोड़ रुपये लोन के डिफाल्टरों के नाम का खुलासा करना चाहिए। और फिर बाद के चरण में पांच दिन के भीतर 500 करोड़ या फिर उससे कम वालों का नंबर आना चाहिए। और फिर आरटीआई एक्ट के सेक्शन 4 (1)(b) के तहत इन सूचनाओं को बैंकों से हासिल कर उन्हें अपडेट करने और फिर समय-समय पर खुद उनका खुलासा करते रहना चाहिए।’

सुप्रीम कोर्ट और सीआईसी के आदेश को ठुकराने और नामों का खुलासा न करने के लिए आरबीआई गवर्नर को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए सीआईसी ने सीधे कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा कि इसके चलते उनके खिलाफ क्यों नहीं 16 नवंबर 2018 से पहले अधिकतम पेनाल्टी लगाया जाए। इसके साथ ही सीआईसी ने सूचना आयोग के संबंधित अधिकारियों से सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के आदेशों को लागू कराने की संभवानाओं को पता लगाने के लिए कहा है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई की अपील को खारिज कर गांधी के आदेश को बरकरार रखा था।

 

2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को लोन डिफाल्टरों के नाम को प्रकाशित करने का आदेश दिया था। इस आदेश के साथ ही केंद्र सरकार की मुसीबतें और बढ़ गयी हैं।










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