लोया केस में सनसनीखेज खुलासा, याचिकाकर्ता ने कहा- मैं आरएसएस नेता भैया जी जोशी के इशारे पर करता था काम

BREAKING NEWS , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 26-04-2018


rss-loya-petition-bhaiyaji-joshi-nagpur-funding-suraj-fadnavis

महेंद्र मिश्र

नई दिल्ली। लोया मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मामले में सबसे पहले याचिका दायर करने वाले सूर्यकांत उर्फ सूरज लोलगे ने कहा है कि वो आरएसएस के सर कार्यवाह भैया जी जोशी यानी संगठन के नंबर दो नेता के इशारे पर काम करता था। सूरज का कहना है कि उन्होंने किसी भी कीमत पर याचिका वापस नहीं लेने की बात कही थी। इसके साथ ही लोलगे ने इशारे में बताया कि इसके लिए उसे नियमित तौर पर आरएसएस से भुगतान होता है। लोलगे ने अपनी बातचीत में भैया जी जोशी से इस सिलसिले में कई बार मुलाकात का भी जिक्र किया है।

ये सारी बातें लोलगे की एक शख्स के साथ फोन पर हुई बातचीत में सामने आयी है। आपको बता दें कि सबसे पहले “दि कारवां” मैगजीन में लोया की मौत के मामले में उनके परिजनों के हवाले से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गयी थी। मैगजीन में ये खबर 20 नवंबर 2017 को प्रकाशित हुई थी। उसके एक हफ्ते बाद लोलगे ने बांबे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में लोया की मौत की जांच समेत छह मामलों में याचिका दायर कर दी थी। बाद में जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो दूसरी याचिकाओं की तरह उसका भी सर्वोच्च अदालत में तबादला हो गया।

 

https://www.youtube.com/watch?v=ElEkpoz_abg&feature=youtu.be

सुले (काल्पनिक नाम) और सूरज लोलगे की बीच हुई इस बात-चीत को सुनने के बाद तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है। मूल बातचीत मराठी में हुई है इसका यहां हिंदी अनुवाद दिया जा रहा है। 

सुले: और तुझे आरएसएस कह रहा है कि तू वह केस (लोया वाला केस) निकाल डाल, फिर। 

सूरज: कौन सा केस? 

सुले: क्या कहा आरएसएस ने केस वापस नहीं लेने का, तू कह रहा था न कि तू आरएसएस के मन से चलेगा, उससे चलेगा

सूरज: हां, हां, हां लोया का केस वापस नहीं लेने का ऐसा डायरेक्ट ही कहा। 

सुले: आरएसएस वाले तुझे क्यों कहेंगे, भाई? 

सूरज: बिल्कुल, कह रहे। इसलिए बता रहा हूं मैं। 

सुले: किसने कहा, कोई नहीं है, किसी ने नहीं कहा तुझे। 

सूरज: क्या....भाऊ!

सुले: कब कहा तुझे आरएसएस वालों ने, मुझे ये तो बता? 

सूरज: भैयाजी जोशी ने कहा ना मुझे, कोठेकर के थ्रू, इसलिए मैं ..

सुले: क्या कहा? 

सूरज: कहा, वापस नहीं लेना सूरज, तुझे वापस लेने के लिए दबाव लायेगा, करके वापस नहीं लेना

सुले: कौन सा केस, यह वाली 

सूरज: लोया वाली 

सुले: हां, ठीक है ..बाबा 

सूरज: ठीक 

प्रदीप: हां, हां 

 

https://www.youtube.com/watch?v=ujwC2BVEI1k&feature=youtu.be

बात का सलिसिला यहीं नहीं रुकता। आगे सूरज भैया जी जोशी के साथ न केवल अपने सीधे रिश्तों का जिक्र करता है बल्कि जरूरत पड़ने पर उनसे मिलने के बारे में बताता है। साथ ही इस केस के बदले में संघ से होने वाले नियमित भुगतान होने की बात को भी इशारे में स्वीकार करता है।

सुले: क्या हुआ तुम्हारे वह आरएसएस वालों का, फ़ोन आया कि छोड़ दिया उन्होंने साथ? 

सूरज: नहीं, हैं ना वह हमारे साथ...कोई विषय ही नहीं भाई..

सुले: हम्म...हम्म...हम्म

सूरज: हम्म..

सुले: नहीं तो तुमने जो कहा वो मिल रहे हैं कि नहीं मिल रहे हैं? 

सूरज: मिल रहे हैं ना वो। 

सुले: कौन कौन, लेकिन वह डायरेक्ट नहीं मिल रहे हैं ना आपको, कि डायरेक्ट मिले?

सूरज: भाऊ डायरेक्ट मिले ना 

सुले: कौन-कौन थे उसमें? 

सूरज: उपेन्द्र कोठेकर के थ्रू मिलना होता है। उस दिन नागपुर में ही थे ना। 

सुले: कौन?

सूरज: भैयाजी जोशी। 

सुले: फिर तुम्हारी हुई क्या मुलाकात?

सूरज: अपनी वैसी डायरेक्ट नहीं होती भाऊ मुलाकात। अपने को एक के थ्रू ही बात करना पड़ता है।   

सुले: हम्म... हम्म... यानि...समझा नहीं मैं, यानि यह तुम जहां जाते हो 

सूरज: जहां मैं जाता हूं न कोठेकर, कोठेकर के थ्रू ही डायरेक्ट मुलाकात होती है....यानि अपनी बात होती है, वह भी बड़ा आदमी है ना, उसे सिक्योरिटी है, मुझसे अगर मिलेगा तो लोगों के नज़र में नहीं आएगा, फिर यह.. 

सुले: किसे? 

सूरज: भैयाजी जोशी को भी सिक्योरिटी है ना

सुले: उन्हें कैसी है? 

सूरज: सिक्योरिटी है ना भाई, सह कार्यवाह हैं, उन्हें भी सिक्योरिटी है पुलिस की। 

सुले: वह भी बड़े हैं क्या? 

सूरज: फिर क्या, सेकंड नंबर की पोस्ट है ना, संघ की। 

सुले: अच्छा..अच्छा..अच्छा..अच्छा..अच्छा, इसलिए तुम इधर, दूसरी तरफ जाकर मिलते हो, फिर 

सूरज: फिर वैसा ही तो है भाऊ, सहकार्यवाह हैं वह, सेकंड नंबर की पोस्ट है।

सुले: फिर कांटेक्ट कैसे होता है, फिर 

सूरज: मोबाइल पर

सुले: हम्...हम्..हम्, ठीक है, जाने दो अब, लेकिन उन्होंने यह तो कहना चाहिए आपको...

सूरज: क्या भाऊ 

सुले: सपोर्ट, बाकी तो सपोर्ट करने को नहीं होना क्या उन्होंने तुमको? 

सूरज: है है वह कोई विषय नहीं। 

सुले: हुम्...हुम्..

तस्वीर तब और साफ हो जाती है। जब अपने को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले सूरज लोलगे के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडनवीस के साथ कई फोटो सामने आते हैं। इतना ही नहीं इस बात का भी खुलासा होता है कि लोलगे पहले से ही बीजेपी का सदस्य है। उससे संबंधित कई फोटो और दस्तावेज सामने आ गए हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि लोलगे ने आरएसएस की तीन साल की बौद्धिकी भी कर रखी है। और वो अकेले नहीं बल्कि उसकी मां भी बीजेपी की न केवल सदस्य रही है बल्कि दोनों ने नागपुर में अपने क्षेत्र से पार्षद का टिकट भी मांगा था। देवेंद्र फडनवीस के साथ लोलगे की एक तस्वीर 2013 की है। और कई जगहों पिर इन तस्वीरों में वो फडनवीस की मौजूदगी में भाषण देते हुए दिख रहा है। एक तस्वीर में तो बाकायदा आयोजकों के बैनर पर उसका नाम और मोबाइल नंबर लिखा हुआ है।

देवेंद्र फडनवीस के साथ लोलगे।

 

लोलगे द्वारा दिया गया चंदा।

अभी तक लोया मामले पर नजर रखने वालों के लिए सूरज लोलगे एक सामाजिक कार्यकर्ता था जो इस मामले की हकीकत सामने लाना चाहता था। लेकिन जैसी चीजें सामने आ रही हैं वो उतनी सीधी नहीं हैं। लोलगे के इन रिश्तों और भैया जी जोशी के निर्देशन में काम करना इस पूरे प्रकरण को एक नया मोड़ दे देता है। आखिर आरएसएस के दूसरे नंबर के नेता भैया जी जोशी का इस केस से क्या रिश्ता हो सकता है? कहीं इसके तार बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से तो नहीं जुड़े हैं? क्योंकि शाह सोहराबुद्दीन केस में मुख्य आरोपी थे। जिसकी सुनवाई जज लोया कर रहे थे। इसके साथ ही देवेंद्र फडनवीस के साथ सूरज लोलगे की कई तस्वीरें इस आशंका को और पुख्ता कर देती हैं। 

लोलगे की एक फडनवीस के साथ तस्वीर।

 

लोलगे द्वारा दिया गया चंदा।

अगर लोया मामले की प्रगति पर नजर डाली जाए तो 20 नवंबर 2017 को पहली बार खबर “दि कारवां” मैगजीन में छपती है। उसके तुरंत बाद 22 नवंबर 2017 को फडनवीस की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ अहमदाबाद में मुलाकात होती है। जहां फडनवीस मुंबई से कार से जाते हैं। उसके बाद लौटते ही उन्होंने उसी दिन डिस्क्रीशनरी जांच बैठा दी। उसके बाद 27 नवंबर 2017 को सूरज लोलगे बांबे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में इस याचिका को डाल देता है। जिसमें लोया के अलावा वकील खंडाल्कर की मौत की जांच और एडवोकेट सतीश यूके की जान के खतरे के मामले को शामिल किया गया था। इसके साथ ही तीन और मामले इसमें जोड़ दिए गए थे। जिसमें स्थानीय पुलिस और सीबीआई के अलावा राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को पक्ष बनाया गया था।

टिकट के लिए आवेदन।

एकबारगी किसी को भी ये शख्स जेन्यूइन लग सकता है। देखने पर सार्थक काम के लिए लड़ता हुआ दिख सकता है। लेकिन अगर इस मामले को एक दूसरे नजरिये से देखें और जिसमें पूरा मामला एक लंबी प्लानिंग का हिस्सा हो। जैसा कि लोया की याचिका की परिणति में देखा जा सकता है तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाएगी। इस कड़ी में ये शख्स जो अभी लोया को न्याय दिलाता हुआ दिख रहा है वही उसके खिलाफ काम करता हुआ दिखने लगेगा। इस मामले में शायद यही हुआ है। इस लिहाज से ये पूरी याचिका ही किसी के निर्देश पर डाली गयी थी और पूरी तरह से प्रायोजित थी। नागपुर बेंच की याचिका में डाले गए लोलगे के फोन नंबर पर इन पंक्तियों के लेखक ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उससे संपर्क नहीं हो सका। बार-बार दूसरी तरफ से यही जवाब आ रहा था कि मोबाइल बंद है।

पूरी बातचीत नीचे सुनी जा सकती है:   

 

 

https://www.youtube.com/watch?v=du4i7DeoK7g&t=79s




Tagrss loya petition bhaiyaji suraj

Leave your comment











KK Singh :: - 04-26-2018
अब भी किसी को फासीवाद एक "संभावना" या ट्रेंड तक ही नजर आता है, तो वह किसी ना किसी तरह से फासीवाद और उसके समर्थकोंं के ही कैम्प को मजबूत करता है! फासीवाद को हराना ही अभी के समय की राजनितिक जरुरत है. राष्ट्रिय स्तर के फासीवादी विरोधी मंच की जरुरत है, जिसमे सभी क्रन्तिकारी, प्रगतिशील दल, व्यक्ति शामिल हों. वैसे हम समय के हिसाब से इसे देखें तो हम समय से पीछे हैं! पर जो भी हम खो चुके हैं वह केवल अब शिक्षा सिखने के लिए है, अभी हमें आगे बढ़ने की जरुरत है, एक संघर्ष की, एक मजबूत क्रन्तिकारी संघर्ष की! डरते हैं, तो भी हमारे साथ आयें, परदे के ही पीछे से ही सही, पर सही धारा के साथ आयें!