साक्षी महाराज के मुंह से निकल गयी असली बात! कहा- देश में नहीं होंगे 2024 के बाद कोई चुनाव

विवाद , , शुक्रवार , 15-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि 2024 के बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ''हमारे नेता मोदी सारे विश्व के नेता हैं और सारे देश में चर्चा है, मोदी हैं तो देश है।'' वह उन्नाव में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। आपको बता दें कि साक्षी महाराज यहीं से बीजेपी के सांसद भी हैं।

बीजेपी सांसद के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वह जिस बात की पहले से आशंका जता रहे थे उसको साक्षी महाराज ने खुलकर कह दिया है।

साक्षी महाराज ने कहा कि ''अब जो चुनाव होगा वो देश का चुनाव होगा। मैं संन्यासी हूं और कह रहा हूं कि ये चुनाव देश का आखिरी चुनाव है और 2024 में चुनाव नहीं होगा।'' उन्होंने कहा कि केवल यही चुनाव है, ये चुनाव देश के नाम पर लड़ा जा रहा है।

बीजेपी सांसद के बयान के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ''बीजेपी ने अपना मक़सद साफ़ कर दिया। मैं तो पहले से ही कह रहा हूं की मोदी और अमित शाह की जोड़ी दोबारा आ गयी तो वे संविधान बदल देंगे और चुनाव करवाना ही बंद कर देंगे। हिटलर ने भी ऐसा ही किया था।''

शायद यही सही बात है जो अनजाने में साक्षी महाराज के मुंह से निकल गयी। बुद्धिजीवियों का एक हिस्सा पूरे मामले को इसी रूप में देख रहा है। उसका मानना है कि यह देश, लोकतंत्र और उसके संविधान को बचाने का चुनाव है। लिहाजा दांव पर पूरा गणतंत्र है। उसका कहना है कि अगर इस बार मोदी फिर से जीत गए तो आने वाले दिन देश के लिए किसी कयामत से कम नहीं होंगे। 

एक दूसरे हिस्से का मानना है कि अभी तक कमान बीजेपी और उसके नेताओं के हाथ थी। और आरएसएस खुलकर आने के बावजूद पर्दे के पीछे से ही काम कर रहा था। लेकिन 2019 में अगर बीजेपी की सरकार बन गयी तो पूरी कमान आरएसएस अपने हाथ में ले लेगा। उस आईने में रखकर साक्षी महाराज की बात को आसानी से समझा जा सकता है। क्योंकि खुद आरएसएस अपने संगठन के भीतर लोकतंत्र का पक्षधर नहीं रहा है।

उसके यहां पदाधिकारियों का चुनाव नहीं बल्कि मनोनयन होता है। और ऊपर से हिंदू राष्ट्र में विश्वास करने वाला संगठन देश के संचालन के लिहाज से पुरानी वर्ण व्यवस्था को आदर्श प्रणाली के तौर पर देखता है। लिहाजा उसके लिए अपने राज्य में उसको हासिल करना ही सबसे बड़ा लक्ष्य होगा। जिसकी पहली और आखिरी शर्त है लोकतंत्र का खात्मा। संविधान को तिलांजलि। और गणतंत्र को इतिहास बना देना। क्योंकि इन तीनों की कब्रों पर ही कोई हिंदू राष्ट्र खड़ा हो सकता है। जो देश में आरएसएस-बीजेपी का आखिरी लक्ष्य है।








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Jitendra Kumar :: - 03-17-2019
So nice

Umesh Chandola :: - 03-15-2019
यूं भी तो यह पूंजीवादी लोकतंत्र है या नि १% की नंगी ताना शाही । नेहरू ने कैसे केरल की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को बर्खास्त किया था। और १९७५ ? सर्वहारा की यानि ९९% की तानाशाही ही अधिकतम लोक शाही है।