अनिश्चित काल के लिए बढ़ायी गयी आधार को मोबाइल से जोड़ने की मियाद

ज़रूरी ख़बर , नई दिल्ली, मंगलवार , 13-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आधार को मोबाइल, बैंक खातों समेत विभिन्न सारी योजनाओं से जोड़ने की मियाद को अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दी है। पहले इसकी मियाद 31 मार्च को खत्म हो रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि कोर्ट का फैसला आने तक आधार के साथ सेवाओं का लिंकेज जरूरी नहीं होगा। इसका मतलब है कि 31 मार्च की मियाद अपने आप खत्म हो जाती है।

हालांकि सेक्शन-7 के तहत कवर होने वाली योजनाओं पर ये आदेश लागू नहीं होगा। जिसमें वित्तीय और दूसरी तरह की सब्सिडी और सेवाएं शामिल हैं।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस बात को भी साफ किया कि पासपोर्ट जारी करने के लिए आधार की अनिवार्यता नहीं होगी। आदेश को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली बेंच ने जारी किया। जिसमें एके सीकरी, एएम खानविल्कर, डीवाई चंद्रचूड और अशोक भूषण दूसरे सदस्य हैं।

पिछले साल 15 दिसंबर को आधार को लिंक करने के लिए दी गयी 31 मार्च की मियाद में हस्तक्षेप करने से कोर्ट ने इंकार कर दिया था। लेकिन इस तारीख को अब आगे बढ़ा दिया गया है।

कोर्ट ने कहा कि “....हम इस बात का निर्देश देते हैं कि 15 दिसंबर 2017 को पारित आदेश को मामले की आखिरी सुनवाई और फैसला होने तक के लिए विस्तारित किया जाता है।” 

विस्तारण आधार के सेक्शन-7 के तहत सब्सिडी और दूसरी सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाओं और योजनाओं पर लागू होगा।

कोर्ट ने कहा कि “ भारत के एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि कोर्ट अंतरिम आदेश को आगे बढ़ाने के बारे में सोच सकता है। हालांकि सेक्शन-7 को कवर करने वाली सब्सिडी और दूसरी सेवाएं इसके तहत नहीं आएंगी। ”

कोर्ट में मामले की सुनवाई वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम का पक्ष रखने के साथ शुरू हुई। उनकी पूरी बहस आधार को मनी बिल के तौर पर पेश करने के इर्द-गिर्द केंद्रित थी। वो मनी बिल की पूरी अवधारणा को विस्तार से आयरलैंड के संवैधानिक प्रावधानों के जरिये व्याख्यायित करने की कोशिश कर रहे थे।

जिसमें उनका कहना था कि राज्यसभा की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है और आधार को मनी बिल के तौर पर पेश करने पर उसकी भूमिका दरकिनार हो जाएगी। जो संविधान के बुनियादी हिस्से या कहिए संघीय ढांचे को बहुत चोट पहुंचाएगी।

उन्होंने कहा कि हालांकि राज्यसभा ने बिल में कुछ संशोधन किया था लेकिन लोकसभा ने उसे दरकिनार कर दिया।

इस पर वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि आधार को पासपोर्ट के लिए अनिवार्य बना दिया गया है जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन है।

इस पर केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उचित तरीके से पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आधार का केवल पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरे पहचान पत्र जैसे वोटर आईडी, बिजली का बिल आदि भी मान्य हैं।

बहस को सुनने के बाद बेंच ने आधार से लिंक करने की आखिरी तारीख को अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया।










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