मेडिकल घोटाले में जज बने "मंदिर के पंडा", पढ़िए दलालों से हुई बातचीत

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 18-01-2018


sc-cbi-medical-scam-trust-tape-kuddusi-yadav-vishwanath

जनचौक डेस्क

(मेडिकल घोटाला मामले में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की भूमिका की जांच की मांग के साथ मामला और गहरा गया है। इस मामले में आरोपियों के बीच टेलिफोनिक बातचीत का एक टेप बाहर आ चुका है। सीबीआई से लीक हुइ इस टेप में दलाल विश्वनाथ अग्रवाल, ओडीशा हाईकोर्ट के पूर्व जज आईएम कुद्दुसी और प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के प्रबंधक बीपी यादव के बीच बातचीत शामिल है। पेश है यहां पूरी बातचीत-संपादक)  

विश्वनाथ: हां मैं सोचता हूं। उनका किसमें है, किस मंदिर में ये है- इलाहाबाद के मंदिर में या फिर दिल्ली के मंदिर में?

कुद्दुसी- नहीं, नहीं, अभी ये किसी मंदिर में नहीं है। अब इसे होना है।

विश्वनाथ- हां, हां, हां! अच्छा तो अब आप बात कर सकते हैं, वो उसे कर देंगे। जिसके बारे में मैंने वहां बात की थी।

कुद्दुसी- क्या आप निश्चित कह रहे हैं (पक्का)

विश्वनाथ- हां, हां, उसमें आप एक चीज देखिए...100 फीसदी, हमारा आदमी जो हमारा कैप्टन है, ये कैप्टन के जरिये होना है, इसलिए समस्या क्या है। बताइए?

बताया जा रहा है कि ये बातचीत 3 सितंबर 2017 को हुई। और उसके बाद याचिका एक दिन बाद 4 सितंबर 2017 को दायर हुई। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी की। जिसे कोर्ट में आर्टिकल 32 के तहत स्वीकार किया गया था। एक अज्ञात व्यक्ति जिसके बारे में माना जा रहा है कि वो कोर्ट में पक्ष में आदेश करवाएगा उसे कैप्टन के नाम से बुलाया जा रहा है।

कुद्दुसी और विश्वनाथ अग्रवाल के बीच 3 और 4 सितंबर को टेलिफोनिक बातचीत दिखाती है कि दोनों सुप्रीम कोर्ट में ट्रस्ट की अपील पर बात कर रहे हैं। और फिर यादव से भारी रकम की उगाही के लिए सौदा कर रहे हैं। घूस देने वाला और उनको हासिल करने वाले भी ‘चाय बेचने वाले की सरकार’ से डरते लग रहे हैं। जैसा कि वो हर किसी को देख रही है यही समस्या है।

यादव- अच्छा उस दिन मैं हाईकोर्ट चला गया था। देखिए दोस्त उस समय पैसा फंस गया था। नहीं मैंने बहुत साफ-साफ बात की। इसीलिए मैं गया। वहां से उन्होंने एक आदेश दिया। यहां आने के बाद उसको उन्होंने खारिज कर दिया। उन्होंने एक नयी याचिका दायर करने के लिए कहा। धारा 32 के तहत एक नयी याचिका दायर की गयी है। इसके लिए पहले तारीख तय की गयी थी लेकिन अब उसे उन्होंने 11 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। इसलिए अब हम क्या चाहते हैं कि कल तुम्हारा टिकट बनवाते हैं और उसके लिए मुझे दुख है। विश्वनाथ जी इसे आपको दे देंगे और अब आप हम लोगों का वो काम करा दीजिए।

विश्वनाथ- नहीं, काम की केवल 100 फीसदी ही नहीं बल्कि 500 फीसदी गारंटी है। लेकिन सामान को पहले देना होगा और वो किसी तरह की बैठक से इंकार कर रहे हैं क्योंकि जो सरकार इस समय चल रही है-चाय वालों की सरकार। वो सब कुछ देख रही है यही सबसे बड़ी समस्या है।

यादव- मैं उनसे मिलना नहीं चाहूंगा। मैं मिलना नहीं चाहता हूं।

विश्वनाथ- हां, मिलना नहीं है। वो घर जाएंगे उनका मानना है कि वो हर चीज (सरकार के बारे में) नहीं देख रही है। इसलिए काम 100 फीसदी होने की गारंटी है। ये तभी बातचीत हो चुकी है। इसीलिए मैं दौड़ते हुए गया और फिर दौड़ते हुए आया।

यादव- नहीं, नहीं, कोई बात नहीं है। अग्रवाल जी, अच्छा तो हम आपका टिकट भेज देंगे। कल आप आइये, ओके, आप करके हमें बताइये।

यादव- अरे मैं पहले निश्चिंत होना चाहता था। हर शख्स अजीब है। इसलिए मैं चाहता हूं कि जज के साथ हमारे अच्छे रिश्ते हों। क्योंकि जज के शब्दों पर हमें ज्यादा विश्वास होता है।

विश्वनाथ- नहीं, नहीं, मैं उसकी पुष्टि कर दूंगा। वरना मैं ऐसा क्यों कहूंगा क्योंकि हम इस काम को कर रहे हैं। व्यापार के लिए ये बहुत जरूरी है। मेडिकल के लोग जरूरी हैं उसमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन लोग वहां अगर प्रसाद नहीं दिया जाता है तो कुछ नहीं होगा।

यादव- नहीं, प्रसाद जरूरी है। हम प्रसाद देंगे। हमें प्रसाद देना है।

विश्वनाथ- काम 100 फीसदी हो जाएगा। लेकिन मैं कल या उसके बाद बोलने नहीं जा रहा हूं। आप सामान और दूसरी चीजें तैयार रखिए....अगर दिया जाता है तो हम इसे 100 फीसदी करने की गारंटी देते हैं....

...कुद्दुसी- उन्होंने बताया कि याचिका डाल दी है। आज उन्होंने सोमवार की तारीख दी है। वो पूछ रहे हैं कब- ये कितना होगा और कैसे और दूसरी बात वो कैसे भरोसा करें कि उनका काम निश्चित हो जाएगा।

विश्वनाथ- क्या ये वही मेडिकल के लोग हैं?

कुद्दुसी- हां, हां

विश्वनाथ- अच्छा तो आने वाले सोमवार की तारीख को मामले की सुनवाई है?

विश्वनाथ- अच्छा तो क्या ये रिव्यू है?

कुद्दुसी- नहीं नहीं, ये धारा-32 के तहत एक नयी याचिका है।

विश्वनाथ- अच्छा, अच्छा अच्छा। उसमें इस तरह की कोई गारंटी नहीं है। अगर वो सामान देते हैं तो काम 100 फीसदी हो जाएगा।

कुद्दुसी-नहीं, वो कह रहे हैं कि अगर वहां पैसा है तो किसी को घर में जाना चाहिए और किसी को बात करनी चाहिए।

विश्वनाथ-नहीं, उनकी बात ठीक है लेकिन ये अच्छा नहीं है अगर वो हम पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।

कुद्दुसी- नहीं, नहीं वो हम पर विश्वास कर रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि अगर मामला किसी तीसरे शख्स के पास है तब ये कैसे हो पाएगा। क्योंकि वो कह रहे हैं कि अगर हमारा काम नहीं हो पाता है तो उनकी स्थिति बहुत खराब हो जाएगी।

विश्वनाथ-नहीं नहीं, काम होगा। नहीं तो क्या हम लोग वैसे ही आग में कूदना चाहते हैं? उन्हें बता दीजिए कि काम 100 फीसदी हो जाएगा। इसीलिए उनकी मदद की जा रही है।

कुद्दुसी- हां, आप इन चीजों को देखिए। हा हा हा.

विश्वनाथ- हां, हां, काम 100 फीसदी होगा। हम लोग उनसे बात कर चुके हैं इसीलिए हम आप लोगों से बात कर रहे हैं। नहीं तो हम आप से ये नहीं कह रहे होते।

दोनों 4 सितंबर की तारीख के बाद अगले 11 सितंबर को आने वाले सोमवार की बात कर रहे हैं। जब ट्रस्ट का मामला कोर्ट में लगा था। 11 सितंबर को जस्टिस मिश्रा की बेंच ने मामले की सुनवाई 18 तारीख को बढ़ा दी जब उन्होंने आखिरी फैसला सुनाया।

रकम को लेकर गहन सौदा-

पूरी बातचीत में तीनों आरोपियों को ट्रांसफर किए जाने वाले पैसे के सौदे के बारे में बातचीत करते हुए सुना गया। उदाहरण के लिए यादव, विश्वनाथ अग्रवाल और कुद्दुसी के बीच बातचीत के इस हिस्से में वो इस मसले पर बात कर रहे हैं कि कैसे जज तक इस पैसे को भेजा जाएगा और उसे कहां दिया जाएगा। लगता है कि पैसे को विभिन्न शब्दों के जरिये संबोधित किया गया है जिसमें बही (किताबें), गमला और प्रसाद शामिल हैं।

यादव-बताइये हमें क्या देना है। मेरे पास केवल एक कालेज है। मैं किसी दूसरे पर भरोसा नहीं कर सकता हूं।

विश्वनाथ- 1 पर इसे कर दिया जाएगा।

यादव- साफ-साफ मुझे बताइए। हमें क्या देना होगा। हमारी बहुत ज्यादा क्षमता नहीं है। अगर बॉस वहां हों तो उनसे बात करवाइये। मैं बॉस से बात करूंगा।

विश्वनाथ- नहीं वहां कोई समस्या नहीं है। हम काम को निश्चित करवाएंगे।

विश्वनाथ- नहीं उन्होंने 1 के लिए कहा है। मैंने एक के लिए बात की थी उन्होंने 3 कहा। 2.5 वहां देना है। 50 हम लोगों के पास रहना है।

कुद्दुसी- ऐसे में कितना एडवांस में देना है।

विश्वनाथ- एडवांस अभी....उस समय उन्होंने कहा था कि पुनर्विचार याचिका के लिए 100 लोगों को दें। अगर पुनर्विचार की इजाजत मिल जाती है तब वो चीज आपको भी पता चल जाएगी....उसके बाद हम..

कुद्दुसी- इसलिए आप एक काम करिए। आप एक काम करिए। उनके केस की सोमवार को सुनवाई है। तारीख को 3-4 दिनों तक के लिए स्थगित कर दीजिए।

विश्वनाथ- सोमवार को हम तय करेंगे। वो हमें सामान देंगे- कुछ 2 से 2.5; कोई समस्या नहीं कुछ आदेश दे दिया जाएगा। पापा यहां देखिए। ये न तो मुझे समस्या में डालेगा और न ही आपको। क्योंकि वहां एसोसिएशन बातचीत करेगा। अगर नहीं पहुंचता है तो हम बहुत बड़ी समस्या में फंस जाएंगे। अगर हम काम करने में सफल नहीं होते हैं तब हम सामान को लौटा देंगे। काम होने में रत्ती भर भी शक नहीं है। हमने उनसे बिल्कुल साफ-साफ बात की है। और उसे इजाजत दे दी जाएगी।

कुद्दुसी- यहां उनसे बात करिए।

विश्वनाथ- हां, बातचीत बिल्कुल साफ थी। उसके हिसाब से तीन की गणना हुई है। वो इसे तीन से कम में नहीं करेंगे।

यादव- हेलो

विश्वनाथ- हां, हमने पिछली बार भी बात की थी। सर से एक के लिए लेकिन वो तीन मांग रहे थे। अगर तीन दिया जाता है तो उन सभी को इजाजत दे दी जाएगी जिन्होंने आवेदन डाला है। मैंने उन्हें बताया उस समय वो 5 की बात कह रहे थे। वो 15 ईंटों के बारे में बोल रहे थे। यहां तक कि पिछली बार भी वो उतने की ही बात कह रहे थे।

यादव- अच्छा तो क्या पूरा पैसा एडवांस में जाएगा।

विश्वनाथ- सर, मैं यहां कोई जोखिम नहीं लेना चाहता हूं। क्योंकि ये 100 फीसदी की गारंटी है। किसी तरह का अगर मगर नहीं। एक बार काम हो जाएगा सर 10 से 15 महीने बैठेंगे। 14-15 काम हो सकते हैं। यहां तक कि आप भी विश्वास करेंगे। वो इसे 101 फीसदी करेंगे।

यादव-अच्छा तो हमें कब देना होगा, बता दीजिए।

विश्वनाथ-तारीख 11 की है। तो इसलिए अगर ये 6-7 के बीच पहुंच जाए तो हम उसे करवाना निश्चित कर देंगे। आपका काम 11 तरीख को हो जाएगा।

यादव-यार 2.5 के साथ कर दीजिए। मेरी क्षमता केवल 2.5 की है। इसी में कर दीजिए।

विश्वनाथ- सर मैं झूठ नहीं बोलता। पहले ये 18 के लिए पांच था। बातचीत के बाद गणना अंत में 15 के लिए तीन तय हुआ। हमने उन्हें आश्वस्त किया कि 4 और आएंगे।

यादव- सुनिये अभी आप हमसे 2 ले लीजिए और जैसे ही आदेश आएगा। बच्चों के एडमिशन शुरू हो जाएंगे। हम एक करोड़ जज को भेज देंगे। आपकी जगह पर, कुद्दुसी सर के घर, इसको इस तरह से कर लीजिए।

विश्वनाथ- सर मैं बात करूंगा और सुबह तक इसके बारे में कुछ निश्चित बता पाऊंगा।

सीबीआई की ट्रांसस्क्रिप्ट इस बात को दिखाती है कि घूस देने की बातचीत जारी थी और उसे मामले के नतीजे को प्रभावित करना था। ये साफ नहीं है कि योजना सफल हुई कि नहीं या फिर उसका नतीजा क्या रहा। जो बात सामने आयी वो ये कि प्रत्येक कदम पर प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के पक्ष में फैसला हुआ।

                          (दि वायर, अंग्रेजी से साभार)










Leave your comment











Saghir Ahamad :: - 01-18-2018
लोकतंत्र का सत्यानाश हो रहा है ।ये तो बहुत पहले से होता था लेकिन अब नंगा हुआ है