चार पूर्व जजों ने लिखा चीफ जस्टिस को खत, कहा-नियम बनने तक 5 वरिष्ठ जजों को सौंपे जाएं अहम केस

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, रविवार , 14-01-2018


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जनचौक डेस्क

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के चार पूर्व न्यायाधीशों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को खुला खत लिखा है। जिसमें उन्होंने केसों का उचित तरीके आवंटन न होने पर चिंता जाहिर की है। इस मामले में उन्होंने सुझाव भी दिया है। जिसके तहत उनका कहना है कि सभी महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों को कोर्ट के पांच सबसे वरिष्ठ जजों की संविधान पीठ द्वारा देखा जाना चाहिए। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज पीबी सावंत, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एपी शाह, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के चंद्रू और बांबे हाईकोर्ट के पूर्व जज एच सुरेश शामिल हैं।

पत्र में इन जजों ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने केसों खासकर संवेदनशील मामलों के आवंटन से संबंधित गंभीर मसलों को सामने लाने का काम किया है। जजों ने कहा कि उन्होंने मुकदमों को उचित तरीके से आवंटित न किए जाने और उन्हें किसी खास बेंच को मनमाने तरीके से आवंटित करने पर चिंता जाहिर की है। जिनकी अध्यक्षता आमतौर पर जूनियर जज करते हैं। पत्र लिखने वाले जजों ने कहा कि इसका कानून के शासन और न्यायिक प्रशासन पर बहुत हानिकारक प्रभाव पड़ेगा।

जजों ने कहा कि “ हम चार जज इस बात से सहमत हैं कि हालांकि मुख्य न्यायाधीश रोस्टर का मास्टर होता है और वो बेंचों को कामों को आवंटित कर सकता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उसे इस काम को मनमानी तरीके से करने की छूट मिल जाती है। जिसमें संवेदनशील मामले चुने गए जूनियर जजों की बेंचों के हवाले कर दिए जाएं।”

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का हल होना जरूरी है और केसों के वितरण और बेंचों के आवंटन में ऐसे साफ नियम और मानदंड बनाए जाने की जरूरत है। जो तार्किक होने के साथ-साथ निष्पक्ष और पारदर्शी हों। सुप्रीम कोर्ट और न्यायिक व्यवस्था में लोगों के विश्वास की बहाली के लिहाज से इसे तुरंत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब तक इसको नहीं किया जाता है तब तक के लिए सभी महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों को 5 वरिष्ठ जजों की संवैधानिक पीठ के हवाले कर दिया जाना चाहिए। केवल यही एक तरीका लोगों को ये विश्वास दिलाने में सहायक होगा कि सुप्रीम कोर्ट निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है। और रोस्टर के मास्टर के तौर पर मनचाहा नतीजा हासिल करने के लिए चीफ जस्टिस की शक्तियों को किन्हीं खास, महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इसलिए हम सभी इस दिशा में तत्काल कदम उठाये जाने की आप से निवेदन करते हैं।  

 






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