सोहराबुद्दीन मामले में चीफ आईओ तामगड़े का खुलासा, कहा-अमित शाह और 3 आईपीएस अफसर थे मुख्य षड्यंत्रकर्ता

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 22-11-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में मुख्य अनुसंधान अधिकारी (चीफ आईओ) रहे संदीप तामगड़े ने बुधवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि अमित शाह (भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष), आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन सोहराबुद्दीन, कौसर बी और तुलसी की हत्या के मुख्य षड्यंत्रकारी थे। संदीप तामगड़े ने बताया कि दोनों केस की जांच में इससे जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिले थे लिहाजा उन्होंने इनके खिलाफ चार्जशीट पेश की थी।

सीबीआई के तत्कालीन एसपी संदीप तामगड़े अमिताभ ठाकुर और विनय कुमार के बाद केस के चीफ आईओ बने थे। उसके बाद उन्होंने पूरे केस की जांच की थी। बचाव पक्ष के वकील वहाव खान के पूछने पर संदीप तामगड़े ने बताया कि उन्होंने राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, मार्बल व्यवसायी विमल पाटनी, हैदराबाद के आईपीएस सुब्रमण्यम और एसआई श्रीनिवास राव से पूछताछ कर इनके खिलाफ भी चार्जशीट पेश की थी।

वकील के पूछने पर चीफ आईओ संदीप ने बताया कि चार्जशीट में आए क्रिमिनल-पॉलिटीशियन नेक्सस शब्द में पॉलिटीशियन अमित शाह, गुलाब चंद कटारिया के लिए और क्रिमिनल सोहराबुद्दीन, तुलसी और आजम जैसे अन्य अपराधियों के लिए इस्तेमाल किया गया है। अहमदाबाद में पॉपुलर बिल्डर पर फायरिंग नेताओं ने अपराधियों के जरिए करवाई थी।

बचाव पक्ष के वकील बिन्द्रे ने चीफ आईओ से प्रश्न करते हुए कहा कि आपने चार्जशीट में लिखा है कि तुलसी को मौके पर दो अज्ञात लोग एक मारूती कार में लाए थे और इसके बाद पुलिस ने उसकी गोली मार कर हत्या कर दी थी और इसे एनकाउंटर बताया था। लेकिन दोनों अज्ञात लोग कौन थे और मारूती कार किसकी थी? इस पर चीफ आईओ कहना था कि सीबीआई ने इसकी कभी जांच नहीं की। 

कोर्ट रिकॉर्ड से गायब हुए शाह-कटारिया सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज 

चीफ आईओ से पूछताछ के दौरान कुछ ऐसे गवाहों के बयानों का जिक्र भी आया, जो कोर्ट रिकॉर्ड से गायब मिले। बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर चीफ आईओ ने कोर्ट को बताया कि मैंने मामले के आरोपी अमित शाह, गुलाब चंद कटारिया और विमल पाटनी से खुद पूछताछ कर इनके बयान लिखे थे और इन बयानों पर मैंने खुद हस्ताक्षर भी किए थे।

लेकिन जब बचाव पक्ष के वकील ने उन बयानों की कॉपी चाही तो पता चला कि यह कोर्ट रिकॉर्ड में हैं ही नहीं। जज एसजे शर्मा ने सीबीआई के सरकारी वकील बीपी राजू और सीबीआई इंस्पेक्टर विश्वास मीणा से पूछा कि ये बयान कहां हैं, तो उसके जवाब में विश्वास मीणा ने बताया कि स्टेटमेंट ऑफिस में हैं। इस पर बचाव पक्ष के वकील वहाव खान ने उन दस्तावेजों को उपलब्ध करवाने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया। गौरतलब है कि अमित शाह, गुलाब चंद कटारिया और विमल पाटनी तीनों ही इस केस से बरी हो चुके हैं, ऐसे में इनके बयान केस के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

चीफ आईओ ने कोर्ट को बताया कि जांच में तुलसी के भांजे कुंदन प्रजापति और उसके दोस्त से संबंधित ड्रग्स मामले के जांच अधिकारी और प्रार्थी दोनों के बयान लिए थे, उन्होंने बताया कि ये चार्जशीट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जब चार्जशीट देखी गई तो ये स्टेटमेंट भी कोर्ट रिकॉर्ड में नहीं मिले।

चीफ आईओ ने बताया कि उन्होंने आरोपी और हैदराबाद के एसआई श्रीनिवास राव से संबंधित 19 दस्तावेज जब्त किए थे। लेकिन आज कोर्ट रिकॉर्ड चेक करने पर सिर्फ एक ही दस्तावेज मिला। 18 दस्तावेज गायब हैं। कोर्ट रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेजों की फर्द जब्ती मौजूद है। जिनमें इन सभी दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, लेकिन ये सभी दस्तावेज कोर्ट रिकॉर्ड से गायब हैं। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि इन दस्तावेजों से साबित होता है कि श्रीनिवास राव 22 से 29 नवंबर 2005 के बीच आंध्र प्रदेश में अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे।

जज ने बरी हुए आरोपियों से संबंधित प्रश्न पूछने से वकील को मना किया

बचाव पक्ष के वकील ने चीफ आईओ संदीप से सोहराबुद्दीन और तुलसी एनकाउंटर से संबंधित कुछ प्रश्न किए जो बरी हो चुके आरोपियों से संबंध रखते थे,  इस पर जज एसजे शर्मा ने प्रश्न पूछने से वकील को मना कर दिया। इस पर वकील ने कोर्ट से निवेदन किया कि ये सभी षड्यंत्र का हिस्सा है और यह उसके मुवक्किल से संबंधित है, इसके बावजूद जज शर्मा ने बरी हो चुके आरोपियों से संबंधित प्रश्न करने की इजाजत उन्हें नहीं दी। 

वो प्रश्न जिन्हें जज एसजे शर्मा ने पूछने से मना कर दिया

-चीफ आईओ संदीप ने कहा कि सोहराबुद्दीन केस की अग्रिम जांच करते हुए मैंने गुलाब चंद कटारिया और विमल पाटनी से पूछताछ कर इनके खिलाफ प्रमाण रिकॉर्ड कर चार्जशीट पेश की थी। बचाव पक्ष के वकील ने आईओ से पूछा कि आपने इन साक्ष्यों को खत्म किया था क्या? तो जज एसजे शर्मा ने यह प्रश्न पूछने से वकील को रोक दिया।

-चीफ आईओ ने बताया कि तुलसी को अहमदाबाद पेशी के लिए लाने-ले जाने पर नवंबर और दिसंबर में गठित पुलिस एस्कॉर्ट पार्टी तुलसी एनकाउंटर के षड्यंत्र का हिस्सा थी। बचाव पक्ष के वकील ने पूछा कि क्या आपके पास इनके खिलाफ एविडेंस थे? जज ने यह सवाल भी पूछने से वकील को रोक दिया।

-चीफ आईओ ने बताया कि आरोपियों के षड्यंत्र को उसने कॉल डिटेल से भी साबित करने का प्रयास किया था। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने चीफ आईओ से पूछा कि आपने तुलसी एनकाउंटर से संबंधित जो कॉल रिकॉर्ड जुटाया था वे अलग-अलग आरोपियों से संबंधित थे? जज ने यह सवाल भी नहीं पूछने दिया।

-बचाव पक्ष के वकील ने चीफ आईओ से पूछा कि तुलसी केस में 9 आरोपी बरी हो चुके हैं, आपके पास इनके खिलाफ षड्यंत्र साबित करने का कोई एविडेंस नहीं था? चीफ आईओ ने कहा कि साक्ष्य थे, आपकी बात गलत है। लेकिन जज ने चीफ आईओ को उत्तर देने और वकील को प्रश्न पूछने से रोक दिया।

-बचाव पक्ष के वकील ने पूछा कि तुलसी केस में बरी हुए 9 आरोपी ट्रायल फेस कर रहे पुलिस कर्मियों के सुपीरियर अधिकारी थे? यह प्रश्न भी पूछने से जज ने वकील को रोक दिया।

-बचाव पक्ष के वकील ने चीफ आईओ से पूछा कि आपको जांच में ऐसा कोई एविडेंस नहीं मिला था, जो यह बताता हो कि तुलसी को मारने के आदेश अधिकारियों ने दिए थे? यह प्रश्न भी नहीं पूछने दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मिला था तुलसी एनकाउंटर का पत्र

चीफ आईओ संदीप ने तुलसी केस की चार्जशीट में उस पत्र का जिक्र किया हुआ है, जो सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर से पहले तुलसी के परिवार ने राजस्थान के तत्कालीन वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत को भेजा था। बचाव पक्ष ने चीफ आईओ से पूछा कि यह पत्र कहां है?

गौरतलब है कि चार्जशीट में लिखा है कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से पहले तुलसी के परिवार को डर था कि पुलिस उसका एनकाउंटर कर देगी, इसके चलते परिवार वालों ने तुलसी की सुरक्षा के लिए एक पत्र अशोक गहलोत को भेजा था। यह पत्र गहलोत ने तत्कालीन आईजीपी वीके गोदिका को भेज दिया था। उन्होंने यह पत्र तो प्राप्त किया था, लेकिन वे सेवानिवृत हो रहे थे,  इसलिए इसे अगले आईजीपी राजीव दासोत को जांच के लिए सुपुर्द कर दिया था।

सुबह 11 से रात 7.30 बजे तक चले बयान

कोर्ट में खास बात यह भी रही कि आज वकीलों के निवेदन करने के बावजूद जज ने लंच ब्रेक नहीं दिया और कहा क्रॉस पूरा करने के बाद ही सब उठेंगे। चीफ आईओ के बयान सुबह 11 बजे शुरू हो गए थे। बचाव पक्ष के वकील वहाव खान ने चीफ आईओ से क्रॉस करीब पूरा कर लिया था। दोपहर 2.30 बजे वहाव खान ने निवेदन किया कि लंच ब्रेक के नाम से ही 1/2घण्टे की मोहलत दे दीजिए।

वहाव खान ने कहा कि सर हाईकोर्ट में एक मामले की पेशी है। 1/2 घण्टे की मोहलत दे दीजिए। लेकिन जज ने ब्रेक देने से मना कर दिया और कहा कि बयान आज ही पूरे करने हैं। वहाव खान ने 3.15 बजे क्रॉस पूरा किया तब जज ने 20 मिनट का ब्रेक दिया। इसके बाद दूसरे आरोपियों के वकीलों ने क्रॉस कर चीफ आईओ से सवाल किए। चीफ आईओ के बयान रात 7.30 बजे पूरे हुए। उसके बाद सभी कोर्ट से निकले।

(नोट-एआरलाइव न्यूज से इनपुट लिए गए हैं।)








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