आंदोलन जारी है...युवाओं की यही पुकार, बंद करो एसएससी में भ्रष्टाचार!

आंदोलन , नई दिल्ली, शनिवार , 17-03-2018


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वीना

नई दिल्ली। 

हाथ में तिरंगा झंडा लहराते नौजवानों ने भारत माता की जय...हम अपना अधिकार मांगते नहीं किसी से भीख मांगते...इंकलाब ज़िंदाबाद...एसएससी चोर है...युवाओं की यही पुकार, बंद करो एसएससी में भ्रष्टाचार...एसएससी की एक दवाई सीबीआई...सीबीआई... पूरी ताकत से नारे लगाने शुरू कर दिए हैं। 

“अभी ताकत बचा कर रखो पूरा दिन पड़ा है। उपवास भी है।” एक साथी ने सलाह दी।

यह दृश्य है कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के मुख्यालय के बाहर का। शुक्रवार, 16 मार्च 2018 को सुबह 8 बजे से ही यहां देश भर से युवा जुटने शुरू हो गए । नेहरू प्लेस मेट्रो स्टेशन के गेट नं. 2 और 4 बंद कर दिए गए। पूछने पर सुरक्षा अधिकारी बताते हैं कि उन्हें नहीं पता कि क्यों मेट्रो के ये गेट बंद किए गए हैं। एसएससी छात्रों की शांतिपूर्ण मांगों पर पहरा देने के लिए दिल्ली की पुलिस और देश के अर्द्धसैनिक बलों के जवान मुस्तैद हैं।  

फोटो : वीना

 

देश के विभिन्न राज्यों से आए एसएससी परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राएं 27 फरवरी से लगातार, दिन-रात दिल्ली के सीजीओ कॉम्पलेक्स स्थित एसएससी मुख्यालय के सामने धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार हमारी मांगे नहीं मान लेती हम यहां से नहीं जाएंगे।

 

पर सरकार या एसएससी को जैसे ये छात्र नज़र ही नहीं आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश की रहने वाली और दिल्ली में एसएससी की कोचिंग लेने वाली मीरा कहती हैं - ‘‘ आज 18वां दिन है। हम एसएससी के बिल्कुल सामने ही बैठे हुए हैं। घर के बाहर अगर कोई कुत्ता भी आकर बैठ जाता है, उसे भी दो रोटी दे देते हैं। लेकिन हमसे अभी तक एसएससी का कोई व्यक्ति मिलने नहीं आया है। मैं शुरू से आ रही हूं यहां। हमें यहां बैठने के लिए तंबू-दरी तक लगाने-बिछाने की इजाज़त नहीं है। हम रोज़ आते हैं धूप में ज़मीन पर बैठते हैं। वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए लड़कियां दो किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप पर जाती हैं। मेट्रो के वॉशरूम बंद कर दिए गए हैं।”

‘‘जबकि हमारे देश में कहा जाता है कि ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ 18 दिन हो गए हैं बेटियां रोड़ पर बैठी हैं लेकिन किसी ने कोई ख़बर तक नहीं ली है कि बेटियों का क्या हाल है?’’ 

 

मीरा कहती हैं - ‘‘हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या सरकार से नहीं है हमारी लड़ाई सिस्टम में जो करप्शन है उसके खि़लाफ़ है। हम जो मेहनत करने वाले बच्चे हैं जब सिस्टम से करप्शन ख़त्म होगा तभी हम जो हासिल करना चाहते हैं वो जीवन में हासिल कर पाएंगे, जॉब कर पाएंगे। इसीलिए अपने हक़ के लिए हम यहां हैं।’’

नाम बताने की जगह खुद को एसएससी पीड़ित कहने वाले एक छात्र कहते हैं कि आज सभी एसएससी छात्रों ने अपनी कोचिंग क्लास छोड़ी है। सब यहां पर मौजूद हैं। परिवार जन भी घर पर उपवास रखकर हमें अपना समर्थन दे रहे हैं। 

 

कोचिंग देने वाले अध्यापक और छात्रों के अलावा इस विरोध प्रदर्शन में किसी भी पार्टी-संगठन, छात्र संगठन की मदद या समर्थन नहीं लिया जा रहा है। धरने पर बैठे-बैठे ही अध्यापक छात्रों की तैयारी भी करवा रहे हैं। वो भी मुफ्त।

16 मार्च को छात्रों ने महाउपवास दिवस घोषित किया। इस महाउपवास में देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र व अध्यापक हिस्सा लेने पहुंचे। पूरे प्रदर्शन को शांति पूर्ण तरीके़ से चलाया जा रहा है। एसएससी छात्रों ने आशंका ज़ाहिर की कि कुछ लोग उनके प्रदर्शन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।


यहां एसएससी छात्र-छात्राओं में अच्छा सामांजस्य देखने को मिला। यहां आकर महसूस हो रहा है कि जैसे लड़कों का लड़कियों को छेड़ना, तंग करना बीते ज़माने की बात है। सभी लड़के बहुत तमीज़ से पेश आ रहे हैं। कहीं कोई गड़बड़, भीड़-भड़क्का न हो इसका पूरा ख़्याल रख रहे हैं। शुक्रवार को छात्रों के साथ उनके गुरुजन भी उपवास का हिस्सा बनने आए। 


एसएससी कोचिंग करवाने वाले जयपुर के अध्यापक विष्णु उपाध्याय बच्चों के भविष्य के बारे में पूछने पर कहते हैं - ‘‘ इस तरह से अगर परीक्षाएं होगी तो बच्चों के भविष्य में तो अंधकार ही दिख रहा है। हमारे राजस्थान में भी चीटिंग चल रही है। वहां पर भी ऑनलाइन पेपर में हैकिंग की जा रही है। दस लाख दो और नौकरी ले लो। इतनी परीक्षाएं करवाने की क्या ज़रूरत है फिर? बच्चे इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं? क्यों पढ़ रहे हैं, और हम क्यों पढ़ा रहे हैं?’’

विष्णु उपाध्याय और उनके साथी अध्यापक जयपुर से ग्यारह बसों में छात्रों के साथ दिल्ली महाउपवास में हिस्सा लेने आए। विष्णु उपाध्याय बताते हैं कि - ‘‘ हमने कभी उपवास नहीं किया पर आज कर रहे हैं। रात भर बस में सफर करके आए हैं। सौ बच्चे दिल्ली करें, सौ जयपुर तो सरकार नहीं सुनेगी। हम सब मिलकर प्रयास करें तो प्रभाव पड़ेगा। इसीलिए हम आए हैं। युवा आगे आएगा, हज़ारों लोग बैठेंगे तभी सरकार चेतेगी।’’

इलाहाबाद से अध्यापक श्रीकांत सिंह भी छात्रों का हौसला बढ़ाने महाउपवास में भाग लेने दिल्ली पहुंचे। श्रीकांत कहते हैं - ‘‘हम बच्चों को इसलिए पढ़ाते हैं कि उन्हें नौकरी मिले। और इस धांधली की वजह से नौकरी मिलने से रही। ऐसे में पढ़ने-पढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। हमारा पढ़ाने में और बच्चों का पढ़ने में मन नहीं लग रहा है। जब तक ये एग्ज़ाम सिस्टम ठीक न हो तब तक पढ़ने-पढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। हमने अपने कोचिंग सेंटर बंद किए हैं और यहां बच्चों के साथ आ खड़े हुए हैं।’’ 

 

हरियाणा से आई छात्रा नवोदिता कहती हैं - ‘‘जो पेपर अभी भी चल रहे हैं उनमें भी धांधली हो रही है। हम 18 दिन से लगातार बिना किसी सुविधा के यहां पर डटे हुए हैं सिर्फ इस भरोसे कि ये हमारा संवैधानिक हक़ है हमें ज़रूर मिलेगा।’’ 

 

3 मार्च से आंदोलन का हिस्सा बनी एक छात्रा ने बताया कि वो उत्तर प्रदेश से हैं। पढ़ाई के लिए परिवार के साथ दिल्ली रहने आई हैं। ये सच है कि एसएससी परीक्षाओं में धांधली होती है। हमने सबूत भी दिए हैं पर उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हमें कहा जा रहा है कि सीबीआई जांच हो रही है। पर लिखित में हमें कुछ नहीं दिया जा रहा। हमारी शुरू से ही दो मांगे हैं और वही रहेंगी। हम चाहते हैं जल्दी से जल्दी उन पर कार्रवाई हो।

आख़िर क्या हैं एसएससी परीक्षा देने वाले छात्रों की वे दो मांगें जिन्हें पूरा करना सरकार और एसएससी के लिए भारी पड़ रहा है।

 

छात्रों की मांगें -

1. सुप्रीम कोर्ट की सिटिंग बेंच के अधीन एसएससी के द्वारा गत वर्ष कराई गई सभी परीक्षाओं एवं सम्पूर्ण कार्य प्रणाली की सीबीआई से निष्पक्ष व सीमित समय में जांच हो।

2. जांच पूरी होने तक एसएससी द्वारा करवाई जाने वाली परीक्षाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाए।

 

न के बराबर रहने वाली सराकरी नौकरियों के भरोसे कितने नौजवान अपना सबकुछ दांव पर लगाकर आस लगाए बैठे रहते हैं यहां आकर पता चलता है। विरोध करना ज़रूरी लग रहा है। पर साथ ही व्यवस्था से डर भी है। 

मधेपुरा बिहार से आए एक नौजवान ने नाम न बताकर खुद को एसएससी पीड़ित कहा - ‘‘मैं 18 दिन से यहां पर हूं। मेरे पिता किसान है। ज़मीन बेचकर मुझे पढ़ने के लिए भेजते हैं। सीट खरीदने के लिए मैं कहां से 30-40 लाख रुपये लेकर आऊं?’’

बनारस से दिल्ली पढ़ाई करने आए एक युवा ने रुआंसा होकर कहा - मैं दिन में नौकरी करता हूं और शाम को पढ़ाई कर पाता हूं। यहां पर जितने भी युवा हैं वो अपने भविष्य की तैयारी के लिए आते हैं। पर हम युवाओं का मनोबल गिर रहा है। अगर आपको सीटों को 30-40 लाख में बेचना ही है तो मेरी खुराना जी से अपील है कि बोलिये तो हम युवा आपको चंदा करके पैसा देंगे लेकिन किसी के सपनों को मत तोड़िये।’’

सीजीएल का पेपर दे चुके कमलेश कुमार सैनी जयपुर राजस्थान से भूखहड़ताल में भाग लेने दिल्ली पहुंचे हैं। कमलेश बताते हैं कि एमटीएस के पेपर में पूरे देश से कुल 23 हज़ार छात्र पास किए गए हैं। जिनमें से आठ हज़ार छात्र जयपुर के अकेले आर्य कॉलेज से पास किए गए हैं। एमटीएस के पेपर में होने वाला ये सबसे बड़ा घोटाला है। एक ही कॉलेज के सेंटर से इतने छात्र पास नहीं हो सकते। इसकी जांच होनी चाहिये।

राहुल गांधी छात्रों के बीच पहुंचे। फोटो : साभार

राहुल गांधी छात्रों के बीच पहुंचे

सरकार की उपेक्षा से आंदोलनकारी छात्र बेहद दुखी और गुस्से में है। विपक्षी नेता भी अब जाकर कुछ सक्रिय हुए हैं। 

शुक्रवार शाम करीब पांच बजे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी छात्रों का समर्थन करने सीजीओ कॉम्पलेक्स धरना स्थल पर पहुंचे। राहुल ने छात्रों से कहा कि मैं तुम्हारे साथ हूं, हमें मिलकर लड़ाई लड़नी होगी। हम मिलकर लड़ेंगे तो जांच हो कर रहेगी। राहुल गांधी की मौजूदगी ने छात्रों में नया जोश भर दिया। 

योगेन्द्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की

स्वराज पार्टी के नेता योगेन्द्र यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएससी छात्रों द्वारा जुटाए एसएससी की धांधली के सबूतों को रखते हुए बताया कि एसएससी के अधिकारी छात्रों को बुलाकर धमका रहे हैं। अगर एसएससी को मानहानि या और मुकदमें करने हैं तो मुझ पर कर दें।

क्या है एसएससी?

कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) भारत सरकार की बी सी कैटेगरी में नौकरी में भर्ती के लिए परीक्षाएं करवाती है।

सीजीएल, सीएचएसएल, एमटीएस तीन बड़ी परीक्षाएं है जो एसएससी करवाती है। इन परीक्षाओं में एक बार में आठ-दस हज़ार युवाओं को नौकरी देने के लिए परीक्षाएं ली जाती हैं और इन कुछ हज़ार नौकरियों को पाने के लिए लाखों की संख्या में छात्र-छात्राएं देश भर में परीक्षाओं में बैठते हैं। सालों इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। एमटीएस की परीक्षा में करीब 70 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। सीजीएल में 30 लाख छात्रों ने पेपर दिया। यानी करोड़ों उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला एसएससी करती है।

एसएससी पर पहले भी धांधली के आरोप लगते रहे हैं। 21 फरवरी 2018 को जो सीजीएल का पेपर हुआ। इस परीक्षा के पेपर में स्क्रीन शेयरिंग की ऑनलाइन धांधली सामने आई। स्क्रीन शेयरिंग के ज़रिये परीक्षा में बैठे व्यक्ति की जगह कोई और पेपर शेयर करके जवाब दे सकता है। जब छात्रों को इसका पता चला तो उन्होंने इस धोखेबाज़ी की जांच की मांग की। 

पहले एसएससी ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इंकार किया। पर फिर दूसरे ही दिन जिस छात्र का स्क्रीन शेयरिंग सामने आया था उसे सस्पेंड कर दिया सात साल के लिए। और फिर दो दिन बाद सस्पेंड किए छात्र को नया एडमिट कार्ड दे दिया गया। जब छात्रों ने विरोध किया तो एसएससी ने कहा टेक्निकल ग़लती से हो गया। 

इसी सीजीएल पेपर की धांधली की बात की जा रही है कि उस पर सीबीआई जांच बिठा दी गई है। हांलाकि छात्रों का कहना है कि उनके पास इसका लिखित में कोई आश्वासन अब तक नहीं पहुंचा है। जांच कैसे, क्या हो रही है उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं है। छात्र सिर्फ सीजीएल की नहीं बल्कि सभी परीक्षाओं की समुचित जांच चाहते हैं। 

इसी तरह एमटीएस के पेपर में धांधली की गई। पहले 2016 में लिखित पेपर हुआ। पेपर लीक होने के चलते कैंसिल कर दिया गया। फिर सितंबर में इसका ऑनलाइन टेस्ट हुआ। जिसमें करीब 70 लाख बच्चे शामिल हुए। 15 जनवरी को इसका परिणाम आया। फिर 28 जनवरी को टीयर टू का पेपर हुआ। जिसमें करीब डेढ़ लाख नौजवानों ने हिस्सा लिया। यहां कॉपी चेक होने से पहले ही एसएससी ने प्रतियोगियों को वेरिफिकेशन के लिए बुलाना शुरू कर दिया। और इस दौरान कई प्रतियोगियों के पास अनजान नंबरों से फोन आने लगे कि आपके पहले पेपर में कुछ नंबर कम हैं। अगर कुछ लेने-देने के लिए तैयार हो तो ये कमी पूरी कर दी जाएगी। आपको नौकरी मिल जाएगी। ये बातें छात्रों के पास बतौर सबूत रिकॉडिंग के रूप में मौजूद हैं। जिसे योगेंद्र यादव ने प्रेस के सामने रखा।

2017 की सीएचएसएल की परीक्षा अभी 4 मार्च से शुरू हुई है और 28 मार्च तक होनी है। इस परीक्षा में संदीप नाम के एक छात्र को एक ही नाम और एक ही फोटो-हस्ताक्षर पर अलग-अलग पतों पर एक ही दिन की एक ही परीक्षा के 700 एडमिट कार्ड दिए गए। ये सारे एडमिट कार्ड एक ही सेंटर के हैं। इस सेंटर में सिवाय संदीप के और कोई परीक्षार्थी नहीं है। 

21 फरवरी को सीजीएल देने वाले राजस्थान के अन्नय चौधरी कहते हैं - ‘‘एसएससी जो भी सीएचएसएल, सीजीएल, एमटीएस की परीक्षाएं करवा रही है। सबमें घपला हुआ है। हमने ऐसे सबूत दिए हैं कि एक बच्चा भी समझ जाएगा कि एसएससी ने घपला किया है। फिर भी एसएससी चेरयमैन खुराना सर कह रहे हैं कि हमारे हाथ तो साफ हैं हमने घपला नहीं किया है। सर फैक्ट कुछ और कह रहे हैं आपके बयान कुछ और।’’

 

साल में दो करोड़ रोज़गार मुहैया करनवाने का वादा कर 2014 में सत्ता में आने वाली मोदी सरकार दिन-ब-दिन रोज़गार ख़त्म करती जा रही है। और जो बचे हैं उनकी एसएससी सिफी सरीखी निजी संस्थाओं की मिलीभगत से बाज़ार में बोली लगा रही हैं। 

एसएससी ने सिफी नाम की जिस संस्था को अपना आईटी वेंडर चुना है। उसका अपना इतिहास घोटाले से जुड़ा हुआ है। याद रहे कि 2005 तक सिफी सत्यम कम्पयूटर सर्विसेस का हिस्सा थी जो कि साल 2009 में 7 हज़ार करोड़ का घोटाला करने की दोषी पाई गई थी। सिफी के पुराने लेन-देन पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। 

सिफी एसएससी परीक्षाओं के लिए तमाम आईटी और डेडिकेटेड नेटवर्किंग सुविधाएं मुहैया करवाती है। सिफी और एसएससी के अधिकारी मिलकर परीक्षा सेंटरों का चयन करते हैं। अधिकतर सेंटर कंप्यूटर ट्रेनिंग दुकाने हैं जिनके पास पूरी सुविधाएं भी नहीं होतीं। सिफी के नेटवर्क के बारे भी छात्रों की शिकायत है कि वो इतना धीरे चलता है कि प्रश्न से दूसरे प्रश्न तक पहुंचने में काफी समय लगता है। कई बार तीन-चार सवाल एक क्लिक में निकल जाते हैं जो छात्र देख ही नहीं पाता। 

पिछले साल बिहार में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक एसएससी परीक्षा सेंटर चलाने वाले व्यक्ति ने आरोप लगाया कि सिफी और एसएससी के अधिकारी सेंटर देने के तीन-तीन लाख रुपये मांगते हैं। साथ ही ये भी बताया कि अधिकारियों ने उससे कोऑपरेट करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आपको 25-30 छात्रों की लिस्ट दी जाएगी जिनकी जगह स्कॉलर बैठकर परीक्षा देंगे।

एक के बाद एक घोटाला सामने आने के बाद भी एसएससी आखि़र क्यों सिफी से चिपकी हुई है? लगातार पेपर लीक होने और दूसरी तरह की अनियमितताओं के आरोपों के बावजूद सिफी को ब्लैक लिस्ट करने की बजाय एसएससी सिफी द्वारा ही परीक्षाएं करवा रही है। क्यों? छात्रों का मानना है कि एसएससी की मिलीभगत के बगैर परीक्षाओं में घोटाला-सीट बिक्री संभव नहीं है।

(वीना पत्रकार और फिल्मकार हैं।)










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shikha bharwaj :: - 03-17-2018
Very good.