हरियाणा में छात्रसंघ चुनाव डायरेक्ट कराने की मांग कर रहे छात्रों पर बरपा पुलिस का कहर, कई छात्राएं भी घायल

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली/रोहतक, शुक्रवार , 12-10-2018


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धीरेश सैनी

नई दिल्ली/रोहतक। हरियाणा की भाजपा सरकार पर अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के नाम पर आरएसएस की स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जीत तय करने की साजिश का आरोप लगा रहे विभिन्न छात्र संगठनों की संघर्ष समिति के आंदोलन पर जगह-जगह पुलिस का कहर बरपा है। प्रत्यक्ष चुनाव की मांग कर संघर्ष समिति के कन्वेनर शाहनवाज समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हैं।

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में पुरुष पुलिसकर्मियों ने ही आंदोलनकारी छात्राओं के साथ मारपीट, हाथापाई और खींचातानी की। घायल छात्र-छात्राओं को पुलिस अपने साथ पकड़ कर ले गई है। रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) में पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। इनसो के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप देशवाल समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी स्टूडेंट्स पुलिस की हिरासत में हैं।

मौके पर मौजूद पुलिस।

हरियाणा में भाजपा सरकार छात्र संघ चुनाव के नाम पर अजीबोगरीब नाटक करने पर आमादा है। इसे अप्रत्यक्ष चुनाव कहा जा रहा है। सीधे चुनाव न कराकर क्लास रिप्रेजेंटेटिव (सीआर) चुने जाएंगे जिन्हें एक जगह इकट्ठा कर अध्यक्ष वगैरह चुन लिए जाएंगे। एबीवीपी के अलावा बाकी छात्र संगठन इसे धांधली करार देते हुए संयुक्त संघर्ष समिति बनाकर प्रत्यक्ष चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

छात्र नेताओं का आरोप है कि कक्षाओं में मॉनीटर की तरह चुनाव कर लेने और फिर एबीवीपी को थोप दिए जाने के प्रबंध किए गए हैं। आरोप है कि प्रशासन को पहले ही नामों की लिस्ट भी दे दी गई हैं। रोहतक में छात्रों ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने की कोशिश भी की थी पर छात्रों को रोक लिया गया था। इस प्रदर्शन में दिग्विजय सिंह चौटाला भी शामिल हुए थे। 

आज नामांकन का दिन था पर एबीवीपी के अलावा बाकी सभी प्रमुख छात्र संगठनों ने चुनाव का बहिष्कार कर हड़ताल का आह्वान किया था। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में थर्ड गेट बंद कर कैंपस में धरने पर थे। करीब ढाई घंटे तक बैठे रहने पर भी यूनिवर्सिटी प्रशासन या जिला प्रशासन उदासीन बना रहा तो थर्ड गेट के बाहर सड़क जाम का निर्णय लिया गया।

आंदोलनकारी छात्र-छात्राएं गेट से निकल ही रहे थे कि पुलिस और पैरा-मिलिट्री फोर्स ने बिना किसी चेतावनी के लाठीचार्ज कर दिया। छात्राओं को भी बुरी तरह पीटा गया। आरोप है कि लेडीज पुलिस नदारद थी और फोर्स पुरुष ही छात्राओं के साथ खींचातानी कर रही थी। एसएफआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और संयुक्त संघर्ष समित के कन्वीनर शाहनवाज, आंबेडकरवादी छात्र संगठन, डीएएसएफआई की छात्रा सुश्री प्रवीण, एसएफआई की सुमन, जैनी आदि को गंभीर चोटें हैं। लहूलुहान छात्र-छात्राओं को पुलिस पकड़ कर ले गई है। इनके अलावा भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं घायल हैं।

हरियाणा के कई विवि में लाठीचार्ज।

रोहतक में एमडीयू में विभिन्न डिपार्टमेंट्स से इनसो, एसएफआई, छात्र एकता मंच, एनएसयूआई, जीएसबीयू, एएमवी, एएसबी आदि संगठनों के आह्वान पर छात्र प्रदर्शन करते हुए संयुक्त संघर्ष समिति के आंदोलन के तहत यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-1 की तरफ बढ़ रहे थे। इस गेट तक न पहुंचने देने के लिए पुलिस ने बैरीकेड्स लगा रखे थे। पुलिस ने आंदोलकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। पुलिस स्टूडेंट्स के सिरों को निशाना बनाकर हमला करने में गुरेज नहीं कर रही थी। इनसो के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप देशवाल सहित बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स को पुलिस ने पकड़ रखा है।

एसएफआई के निवर्तमान अध्यक्ष सुमित, एनएसयूआई के प्रदीप आदि छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है। सरकार चाहती है कि या तो एबीवीपी को चुनो या लाठी-गोली खाओ। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के एसएफआई के नेता पवन कुमार टांक ने जनचौक को बताया कि घायल छात्र-छात्राओं को लेकर चिंता की स्थिति बनी हुई है। पुलिस उनके समुचित इलाज का इंतजाम करे और उनकी स्थिति से अवगत कराए, इसके लिए नागरिक समाज से सहयोग की अपील भी की गई है। सिरसा, कैथल, जींद आदि जगहों से भी स्टूडेंट्स के आंदोलन की खबरें आ रही हैं।  

यूथ फॉर स्वराज ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उसने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 22 साल बाद हरियाणा में छात्र संघ चुनाव की घोषणा किये जाने पर यूथ फ़ॉर स्वराज ने भी स्वागत किया था । उम्मीद बनी थी कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के पुनः आरम्भ होने से राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी। मगर सरकार ने अपने दावों के उलट परोक्ष चुनाव की प्रणाली घोषित करके अपनी अलोकतांत्रिक समझ का परिचय दे दिया। 

प्रदर्शनकारी छात्र।

सरकार ने इसके आगे जाते हुए पूरी चुनाव प्रक्रिया में प्रशासनिक दखल को बढ़ा दिया व सदस्यों को नामित करने का अधिकार दे दिया । इस तरह पदाधिकारियों के चुनाव के समय नामित सदस्यों का समर्थन सरकार समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को मिल सके ।

एबीवीपी को छोड़ कर अन्य सभी छात्र संगठन सरकार द्वारा तय इस चुनाव प्रणाली का लगातार विरोध कर रहे हैं । सरकार ने छात्र संगठनों की आवाज सुने बिना चुनाव की तारीख तय कर दी। चुनाव प्रणाली पर सवाल उठा रहे छात्र संगठन चुनाव के बहिष्कार का निर्णय ले चुके हैं । मगर सरकार अपनी जिद पर अडिग रह कर एबीवीपी को स्थापित करने पर आमादा है। कुरुक्षेत्र व रोहतक में छात्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन कर रहे हैं ।

मगर अलोकतांत्रिक खट्टर सरकार को विरोध की आवाजें स्वीकार नहीं हैं। इसलिए पुलिस को लगाकर छात्रों पर लाठीचार्ज करवा कर गिरफ्तारी करवाई की गई। जिसमें कई छात्र व छात्राएं घायल हुए है।

 

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