समझौते के रास्ते पर माननीय !

बड़ी ख़बर , , बृहस्पतिवार , 18-01-2018


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जनचौक ब्यूरो

 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा संकट को हल करने के लिए चारों वरिष्ठ न्यायाधीशों ने कल एक बैठक कर रोस्टर सुधार के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न बेंचों में मामलों को आवंटित करने के लिए तर्कसंगत, व्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया गया है। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के दो अन्य न्यायाधीश भी शामिल हुए। इस प्रस्ताव से यह उम्मीद जताई जा रही है कि न्यायपालिका के मौजूदा संकट को हल किया जा सकता है। लेकिन मुख्य न्यायाधीश की हठधर्मिता के कारण विवाद जस का तस बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने पिछले हफ्ते मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ अपनी शिकायत को सार्वजनिक कर दिया था। तब पूरे देश में न्यायपालिका को लेकर एक बहस छिड़ गई। बुधवार शाम को चारों न्यायाधीशों ने दो अन्य सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया।    

इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक यह प्रस्ताव आज गुरुवार को सीजेआई को सौंप दिया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न बेंचों में मामलों को आवंटित करने के संदर्भ में है।बैठक में न्यायाधीशों के बीच क्या बात हुई इसका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं हो सका है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि बैठक रोस्टर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने को लेकर था।

कल दिन में यह बैठक चारों न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीश के बीच सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर -2 में होनी थी। लेकिन कल न्यायमूर्ति जे चलमेश्वर के अवकाश पर रहने के कारण सुबह बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद शाम के वक्त न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर के आवास पर (जस्टिस चलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ) के अलावा न्यायामूर्ति डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यूयू ललित उपस्थित हुए।  

यह प्रस्ताव मुख्य न्यायाधीश को सौंपा जाएगा। मुख्य न्यायाधीश और उनके तीन अन्य सहयोगी जजों ने मंगलवार को चारों वरिष्ठ जजों को अपने चैंबर में आमंत्रित करने की पहल की थी। चारों वरिष्ठ न्यायाधीशों का कहना है कि जिस तरीके से कुछ मामलों को आवंटित किया जा रहा है,वह बंद होना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि चारों वरिष्ठ न्यायाधीशों का कहना है कि यदि इस प्रस्ताव पर मुख्य न्यायाधीश बात करना चाहते हैं तो वे तैयार हैं। सूत्रों ने कहा कि सीजेआई ने अभी तक इन मुद्दों पर ‘‘खुद का कोई प्रस्ताव नहीं बनाया है।’’

इससे पहले बुधवार को शाम चार बजे शाम करीब 4.15 बजे सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सदस्यों ने सीजेआई से मुलाकात की थी और दिल्ली के उच्च न्यायालय की तरह मामलों के आवंटन का एक रोस्टर रखने के सुझाव सहित कई आंतरिक व्यवस्था पर चर्चा की। दिलचस्प है कि जस्टिस मिश्रा दिल्ली उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश थे जब उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में मामलों को आवंटित करने का एक तरीका होता है। देश के विभिन्न भागों और अलग-अलग तरह के मामलों के लिए अलग-अलग बेंच का गठन होता है। मामलों को आवंटित करने की परंपरा जजों की विशेषज्ञता के आधार पर तय होता है।

उदाहरण के लिए, नियमित रूप से आपराधिक मामलों की सुनवाई ऐसे न्यायाधीश को दी जाएगी जो आपराधिक मामलों में विशेषज्ञता रखता है। इसी तरह से पांच न्यायाधीशों या उससे अधिक से संविधान बेंच का गठन होता है। जिसमें आमतौर पर पांच वरिष्ठतम न्यायाधीश को शामिल किया जाता है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसी प्रणाली देखी जा रही है जिसमें मामलों का तात्कालिक तौर पर आवंटन हो रहा है। ऐसे में विशेषज्ञता का कोई मायने नहीं रह जाएगा। इस बीच, बुधवार को पूर्ण सुप्रीम कोर्ट में होने वाले साप्ताहिक दोपहर के भोज में सभी न्यायाधीश उपस्थित नहीं हुए। भोज से अनुपस्थित रहने वाले न्यायाधीशों में  न्यायाधीश जे चलमेश्वर, शरद बोबडे और आदर्श गोयल शामिल हैं।  


 

 






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