सुप्रीम विवादः समझौते पर गतिरोध बरकरार

विवाद , , चयन करें , 19-01-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट जज विवाद के एक सप्ताह बाद भी सुलह की कोशिशें जारी हैं। लेकिन गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और उन पर आरोप लगाने वाले जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस, रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ के बीच गुरुवार को मीटिंग हुई। इस मीटिंग में जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड भी उपस्थित थे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक करीब आधा घंटे चली इस बैठक में केसों के अलॉटमेंट पर चर्चा की गई। इससे पहले चारों जजों ने 16 जनवरी को आपस में बैठकर एक प्रस्ताव तैयार किया था। इस बैठक में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड भी मौजूद थे। बैठक में केसों के वितरण संबंधी एक प्रस्ताव तैयार किया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक-

मुख्य न्यायाधीश से साथ हुई बैठक मुकदमों के वितरण संबंधी प्रक्रिया पर केंद्रित रही। इस आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की संभावना पर विचार-विमर्श हुआ। लेकिन समझौते के दस बिंदुओं वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं हो सका। दोनों पक्षों के बीच कुछ बिंदुओं पर एक राय नहीं बन सकी।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चारों जजों ने केसों के आवंटन संबंधी अपना प्रस्ताव दिया। प्रस्ताव में यह उल्लेख है कि जिस तरह से वर्तमान में केसों का आवंटन हो रहा है उसे बदला जाए। गतिरोध समाप्त करने का यही तरीका है।

मुख्य न्यायाधीश ने इस पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। इस तरह से अभी गतिरोध समाप्त होने की दिशा में कोई ठोस हल नहीं निकला है। 

दिलचस्प बात यह है कि इस गतिरोध को तोड़ने में सुप्रीम कोर्ट के अन्य जज भी पहल कर रहे हैं।सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में परंपरा के अनुसार सुबह की चाय में जस्टिस सीकरी, जस्टिस खानविलकर और जस्टिस चंद्रचूड उपस्थित थे। गुरुवार को जस्टिस सीकरी, जस्टिस रमन्ना और चंद्रचूड की उपस्थिति इस विश्वास को आश्वस्त करती थी कि इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का एक बहुत बड़ा वर्ग शामिल है। लेकिन अभी तक इस मामले में कोई पहल नहीं दिख रही है जो दोनों पक्षों को स्वीकार हो।   

 






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AP Bharati :: - 01-19-2018
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