येदियुरप्पा की डायरी में खुलासा; सीएम बनने के लिए दी थी जेटली, गडकरी और राजनाथ को करोड़ों रुपये की रिश्वत

ख़ास रपट , नई दिल्ली, शुक्रवार , 22-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा से जुड़े एक और सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। एक डायरी सामने आयी है जिसमें येदियुरप्पा की कलम से बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं समेत जजों और तमाम दूसरे नेताओं को करोड़ों रुपये देने के ब्योरे दर्ज हैं। “दि कारवां” के हवाले से आयी इस खबर में बताया गया है कि बीएस येदियुरप्पा ने यह डायरी अपने कर्नाटक का मुख्यमंत्री रहने के दौरान लिखी थी। डायरी में 1800 करोड़ रुपये का हिसाब किताब लिखा गया है। बताया गया है कि येदियुरप्पा की यह सीक्रेट डायरी आयकर विभाग के पास है जिसे उसने कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के घर से छापे के दौरान हासिल किया था। लेकिन इनकम टैक्स विभाग उस पर बैठा रहा और उसने कोई कार्रवाई नहीं की। इस बीच डायरी “दि कारवां” के हाथ लग गयी। 

डायरी के पन्ने बताते हैं कि  येदियुरप्पा ने बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं, उसकी केन्द्रीय समिति के नेताओं, जजों और वकीलों को 1800 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया था। येदियुरप्पा ने इन सारी पेमेंट्स को खुद अपने हाथों से कर्नाटक विधान सभा की साल 2009 की विधायक डायरी में लिखा है। उन्होंने जो कुछ भी अपने हाथों से इस डायरी में लिखा है, वह कन्नड़ भाषा में है। खास बात यह है कि इस डायरी एंट्री की कॉपी आयकर विभाग के पास सन 2017 से है।

इस डायरी में येदियुरप्पा ने अपने हाथों से बिल्कुल साफ साफ लिखा है कि उन्होंने बीजेपी की केन्द्रीय समिति को 1000 करोड़ रुपए दिए हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली को डेढ़ सौ करोड़ रुपये दिए और डेढ़ सौ करोड़ रुपये ही उन्होंने परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को दिए। इसके अलावा येदियुरप्पा ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को 100 करोड़ रुपए और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को 50-50 करोड़ रुपए दिए हैं। इसके अलावा इस डायरी में गडकरी के “बेटे की शादी के लिए” 10 करोड़ रुपए देने की बात भी दर्ज है। सबसे गंभीर बात यह है कि येदियुरप्पा की डायरी में जजों को भी 250 करोड़ रुपए दिया जाना दर्ज है। इसके अलावा उन्होंने वकीलों को 50 करोड़ रुपए (केस लड़ने की फीस) देने की बात भी दर्ज की है, लेकिन उनमें से किसी वकील का नाम उनकी डायरी में नहीं है।

डायरी में एंट्री।

कारवां के मुताबिक  बीजेपी नेताओं, जजों और एडवोकेट को भुगतान का ब्योरा डायरी के 17 जनवरी 2009 वाले पन्ने में लिखा है और बीजेपी के केन्द्रीय नेताओं को किए गए भुगतान की एंट्री 18 जनवरी 2009 की लाइन में है। यह साफ नहीं है कि ये एंट्री इन्हीं तारीखों को की गई थी या फिर बाद में इन तारीखों के आगे ये एंट्री भरी गईं। येदियुरप्पा, मई 2008 से लेकर जुलाई 2011 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे। डायरी के सभी पन्नों में बाकायदा येदियुरप्पा के साइन हैं। कारवां के हवाले से सामने आयी डायरी के इन पन्नों से पता चलता है कि आयकर विभाग और केन्द्र की बीजेपी सरकार के पास डायरी की कॉपी अगस्त 2017 से ही थी। 

इनकम टैक्स के ही एक सीनियर अधिकारी ने येदियुरप्पा की डायरी एंट्री वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक बिना साइन वाले कवर नोट के साथ सौंपी थी। उस सीनियर ऑफिसर ने उस नोट में पूछा था कि क्या प्रवर्तन निदेशालय से इसकी जांच कराना उचित होगा। लेकिन जेटली, जो कि पहले ही डेढ़ सौ करोड़ रुपये लेकर बैठे थे, उन्होंने उस अधिकारी के नोट पर ध्यान भी नहीं दिया। आपको बता दें कि 2004 और 2013 के बीच अरुण जेटली कर्नाटक के लिए बीजपी के इंचार्ज थे और उस दौरान हुए चुनावों में पार्टी का कामकाज देख रहे थे। कारवां ने येदियुरप्पा, जेटली, गडकरी, राजनाथ सिंह, आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से इन एंट्रियों पर उनका पक्ष मांगा है, लेकिन अभी तक किसी ने भी अपना पक्ष नहीं पेश किया है। 

डायरी में एंट्री।

बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व को दिए गए करोड़ों करोड़ रुपये के अलावा येदियुरप्पा की इस डायरी में ये भी लिखा है कि उन्होंने कर्नाटक में कितने करोड़ में कौन-कौन विधायक खरीदे थे। इस डायरी में जिन विधायकों के नाम हैं, उनमें से कई ने सन 2008 में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाए जाने में महत्वपूर्ण रोल निभाया था। उसी साल यानी कि 2008 के विधानसभा चुनावों में येदियुरप्पा ने कांग्रेस, जनता दल (सेक्यूलर) और निर्दलीय विधायकों को अपने पक्ष में मिलाकर बहुमत हासिल किया था। उस वक्त येदियुरप्पा को समर्थन देने वाले 6 में से 5 विधायकों को बाद में येदियुरप्पा ने कैबिनेट में शामिल किया था। इनमें से कई नेताओं के नामों का उल्लेख डायरी में है। डायरी की एक एंट्री में लिखा है कि “मुझे मुख्यमंत्री बनाने में जी जर्नादन रेड्डी की मुख्य भूमिका है।” यहां मुझे का मतलब येदियुरप्पा से है। इस एंट्री के नीचे येदियुरप्पा के साइन भी हैं।

वहीं दूसरी लाइन में लिखा है, “जर्नादन रेड्डी ने जिन लोगों को पैसे दिए- उन लोगों की डिटेल।” उस एंट्री में 8 नेताओं को 150 करोड़ रुपए देने की बात लिखी गयी है। डायरी में पीएम नरेन्द्रस्वामी का भी नाम है जिन्होंने 2008 में निर्दलीय विधायकी जीती थी और येदियुरप्पा ने उन्हें कर्नाटक का महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाया था। इसमें कांग्रेस के टिकट से जीतने वाले आनंद असनोटिकर वसंत का भी नाम है जिन्हें येदियुरप्पा ने मत्स्य पालन, विज्ञान और प्रौद्योगकि मंत्री बनाया। एंट्री में जेडीएस के टिकट से चुनाव जीतने वाले बालाचंद्रा लक्ष्मणराव जर्किहोली का भी नाम है जिन्हें स्थानीय निकाय मंत्री बनाया गया था। आनंद असनोटिकर ने जनवरी 2018 में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया और जेडीएस में शामिल हो गए। इन 8 नेताओं में से 7 नेताओं के नाम के आगे 20 करोड़ रुपए दर्ज हैं। जर्किहोली के नाम के आगे 10 करोड़ रुपए दर्ज है। कारवां ने सभी 8 विधायकों को सवाल भेजे थे लेकिन किसी का जवाब नहीं आया।

डायरी में एंट्री।

येदियुरप्पा की हैंडराइटिंग में उस नोट में लिखा है कि जी जनार्दन रेड्डी ने ही वह पेमेंट की थी। रेड्डी कर्नाटक के अमीर नेता हैं। सन 2008 की येदियुरप्पा सरकार में रेड्डी को पर्यटन, संरचना विकास मंत्री बनाया गया था। सितंबर 2011 में रेड्डी को सीबीआई ने एक अवैध खनन मामले में बेल्लारी से गिरफ्तार किया था और 2015 में जमानत पर रिहा होने से पहले उन्होंने तीन साल जेल में भी काटे थे। नवंबर 2018 में रेड्डी को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। इस बार उन्हें हजारों निवेशकों को ठगने वाली एक निजी कंपनी से 20 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के इल्जाम में पकड़ा गया था।

उन्हें जूडिशियल कस्टडी में भेजा गया, लेकिन आजकल वे जमानत पर बाहर घूम रहे हैं। दिसंबर 2018 में अवैध इस्पात खनन मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी चार्ज शीट में रेड्डी को आरोपी बनाया था। कर्नाटक लोकायुक्त ने 35 हजार करोड़ रुपए के लौह अयस्क उत्खनन घोटाले, बेलेकेरी पोर्ट मामले में रेड्डी को मुख्य आरोपी बनाया था। लेकिन ऊपर से आए रहस्यमय आदेशों को मानते हुए सीबीआई ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए मामले को बंद कर दिया। कौन था ऊपर बैठा वह शख्स जो इतने घोटालों में फंसने के बावजूद सीबीआई को तकनीकी कारणों का बहाना बनाने के रहस्यमय आदेश दे रहा था?

येदियुरप्पा पर इससे पहले कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। उन्हें एक बार जेल भी हुई थी। सन 2011 में उन पर न सिर्फ करप्शन के आरोप लगे, बल्कि उन्हें गिरफ्तार करके जूडिशियल कस्टडी में भी भेज दिया गया था। कर्नाटक के लोकायुक्त ने उन्हें सरकारी जमीन में हेराफेरी और उत्खनन घोटाले में घूस लेने का दोषी पाया था। इसी आरोप के चलते येदियुरप्पा सरकार भी गिर गई थी। घूस खिलाने के बाद उसी साल जुलाई में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था और अक्तूबर में उन्होंने विशेष लोकायुक्त अदालत के सामने सरेंडर किया था।

डायरी में एंट्री।

फिर बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया तो उन्होंने कर्नाटक जनता पक्ष पार्टी बना ली थी। इस पार्टी का रजिस्ट्रेशन 2008 में पद्मनाभा प्रसन्ना कुमार ने पहली बार कराया था। लेकिन 2014 के लोक सभा चुनावों से पहले नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की नजर खासतौर से येदियुरप्पा पर पड़ी। बाद में येदियुरप्पा करप्शन के इन मामलों से बरी हो गए। 2018 में राज्य विधान सभा चुनाव में वे बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे और फिलहाल वे राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता हैं।

डायरी में “धन प्राप्त/मुझे किया गया भुगतान” के आगे 26 लोगों की सूची भी है। इसमें 5 करोड़ रुपए से लेकर 500 करोड़ रुपए का हिसाब-किताब है। इन एंट्री में लिखा है कि दानदाताओं ने येदियुरप्पा को 2690 करोड़ रुपए की पेमेंट की थी। दूसरे कुछ नामों के अलावा इनमें बीजेपी के राज्य कैबिनेट मंत्री: बसवराज बोम्मई, अरविंद लिंबावली और मुरुगेश निरानी, बीजेपी नेता के सुब्रामणिय नायडू एवं बीजेपी विधायक: जे कृष्णा पालेमार, सीसी पाटिल और लक्ष्मण सवादी का नाम भी है। आपको याद दिला दें कि इन तीनों विधायकों को एक बार विधानसभा सत्र के दौरान “ब्लू फिल्म” देखते पाया गया था।

इस एंट्री में जिनका नाम लिखा है,  कारवां ने उन्हें भी सवालात भेजे थे, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। जिन कुछ लोगों ने जवाब दिया उन्होंने पैसे देने की बात से इनकार किया या किसी भी तरह के चंदे की जानकारी न होने का दावा किया। येदियुरप्पा परिवार के प्रेरणा ट्रस्ट ने भी 500 करोड़ रुपए का पेमेंट किया था जो कि इसी डायरी में लिखा हुआ है। वैसे येदियुरप्पा की बेटी एसवाई ने ऐसे किसी पेमेंट की बात से इनकार किया है।

आपको बता दें कि येदियुरप्पा की ये डायरी तब मिली थी जब अगस्त 2017 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कर्नाटक के सीनियर कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के घर में छापा मारा था। कॉरवां ने इन पेजों को शिवकुमार को भी दिखाया और उन्होंने भी माना कि ये वही पन्ने हैं, जो छापे में आयकर विभाग ने बरामद किए थे। हालांकि उन्होंने इससे अधिक कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इस छापे के बारे में जानकारी रखने वाले कर्नाटक के एक वरिष्ठ नेता ने भी माना कि येदियुरप्पा ने ही ये सारी एंट्री की हैं। उन नेता ने तो यहां तक कहा कि हंड्रेड पर्सेंट ये सारी उन्हीं के हाथ से की हुई एंट्रीज हैं और इस पर कतई कोई शक नहीं है।” 

(“दि कारवां” के लिए इस रिपोर्ट को निलीना एमएस और आथिरा कोनिक्करा ने तैयारी की है।)

जारी...








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