येदुरप्पा को सरकार गठन के बुलावे पर कांग्रेस ने कहा-गवर्नर ने किया है मोदी के इशारे पर संविधान का एनकाउंटर

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 17-05-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। कर्नाटक के गवर्नर वाजूभाई वाला ने बीएस येदुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए आमंत्रित कर तकरीबन 17 साल बाद एक बार फिर मोदी को संकट से उबार लिया है। इसके पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी के लिए उन्होंने 2001 में राजकोट की अपनी विधानसभा सीट खाली की थी। हालांकि उस समय उठाया गया कदम किसी संवैधानिक समीक्षा के दायरे में नहीं आता था लेकिन इस बार वाजूभाई वाला के फैसले पर सवाल उठ रहा है। सवाल ये पूछा जा रहा है कि आखिर एचडी कुमारस्वामी के समर्थन में कांग्रेस और जेडीएस के 116 विधायकों के रहते राज्यपाल कैसे बीजेपी नेता येदुरप्पा को मौका दे सकते हैं जिनके पास बहुमत का जादुई आंकड़ा भी नहीं है। 

ये खुले तौर पर राजभवन का हार्सट्रेडिंग को बढ़ावा देना हुआ। कांग्रेस ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उसका कहना है कि गर्वनर ने सभी संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर इस काम को किया है। बीएस येदुरप्पा कल सुबह 9.30 बजे राजभवन में शपथ लेंगे। इसके साथ ही गवर्नर ने उन्हें विधानसभा के फ्लोर पर अपना बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया है।

राज्यपाल दफ्तर और बीजेपी आफिस किस तरह से एक दूसरे से मिलकर काम कर रहे थे उसका नमूना कर्नाटक बीजेपी का एक ट्वीट है। जिसमें गवर्नर दफ्तर के आधिकारिक घोषणा से पहले ही 8.30 बजे रात को येदुरप्पा के शपथ ग्रहण कार्यक्रम की जानकारी दे दी गयी थी। हालांकि गलती का अहसास होने पर बाद में पार्टी ने उस ट्वीट को डिलीट कर दिया।

कांग्रेस ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि वाजूभाईवाला ने गवर्नर की आफिस को नीचा दिखाने, संविधान को रौंदने, कानून की धज्जियां उड़ाने और बीजेपी के मुखौटे के तौर पर काम किया है। गवर्नर की कार्यवाही अनैतिक, गैरकानूनी और असंवैधानिक है। पीएम मोदी ने गवर्नर के हाथों संविधान का एनकाउंटर करने का काम किया है।

दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद पर विराजमान हैं। उन्हें पक्षपातपूर्ण तरीके से काम नहीं करना चाहिए जो पूरी तरह से अवैधानिक है। वो चुनाव पूर्व गठजोड़ को आमंत्रित करने के लिए बाध्य हैं क्योंकि विधायक भौतिक तौर पर राजभवन पर मौजूद थे।

राज्यपाल का निमंत्रण पत्र।

चिदंबरम ने सवालिया लहजे में पूछा कि एक पार्टी जो बहुमत में नहीं है कैसे बहुमत का निर्माण कर सकती है? अल्पमत कैसे बहुमत में तब्दील हो सकता है जब तक कि खरीद-फरोख्त न हो?

पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता कपिल सिबल ने कहा कि कर्नाटक के गवर्नर सुप्रीम कोर्ट और संविधान से बंधे हुए हैं। कांग्रेस और एडी कुमारस्वामी के पास बहुमत है लेकिन गवर्नर उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं कर रहे हैं। ऐसा न करके वो बीजेपी को खरीद-फरोख्त का मौका दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब उनके पास दो ही विकल्प हैं एक राष्ट्रपति और दूसरा सुप्रीम कोर्ट। कहां जाए जाए इस पर पार्टी में विचार करने के बाद ही फैसला होगा।

इस घटनाक्रम के बाद विधायकों के खरीद-फरोख्त की आशंकाएं काफी बढ़ गयी हैं। क्योंकि बीजेपी के पास महज 104 विधायक हैं। जो सामान्य बहुमत से 8 कम हैं। इन विधायकों को जुटाने के लिए उसे कांग्रेस और जेडीएस खेमे को खंगालना होगा। जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी की मानें तो बीजेपी ने इस काम को शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि उनके कई विधायकों से बीजेपी के नेताओं ने संपर्क किया है। और एक विधायक के उनके पक्ष में जाने के लिए 100 करोड़ रुपये तक का प्रस्ताव दिया है। 

कुमारस्वामी ने बिल्कुल धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर बीजेपी उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश करेगी तो उन्हें भी ये काम आता है। और बहुत सारे बीजेपी विधायक ऐसे हैं जो उनकी तरफ आने के लिए तैयार हैं। हालांकि बीजेपी ने कुमारस्वामी के इस आरोप का खंडन करते हुए उसे पूरी तरह से मनगढ़ंत करार दिया है। एएनआई के मुताबिक कांग्रेस के कुश्तगी से विधायक अमरेगौड़ा लिंगानगौड़ा पाटिल बैय्यापुर ने बताया कि बीजेपी ने उनसे संपर्क किया और उनसे पाला बदलने की गुजारिश की। 

इसके पहले आज शाम को जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष जी परमेश्वर के नेतृत्व में नवनिर्वाचित विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गवर्नर से मुलाकात की। और आज सुबह दोनों दलों के विधायकों की बैठक में नेता चुने जाने की उन्हें सूचना दी। साथ ही उन 117 विधायकों की उन्होंने सूची सौंपी जिनका उन्हें समर्थन हासिल है। इसमें बीएसपी का भी एक विधायक शामिल था। कुमारस्वामी ने गवर्नर से इन विधायकों की राजभवन के सामने परेड कराने तक का प्रस्ताव रखा लेकिन वाजूभाई वाला ने उसे मना कर दिया।

राज्यपाल से मिलने के बाद कुमारस्वामी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “जेडीएस और कांग्रेस के चुनाव बाद गठबंधन और बीएसपी के साथ चुनाव पूर्व गठजोड़ को मिलाकर उनके पास कुल 117 विधायक हैं। और उनके समर्थन का पत्र गवर्नर को सौंप दिया गया है।”

कुमारस्वामी ने कहा कि गवर्नर ने उन्हें बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बारे में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा करने के बाद वो कोई फैसला लेंगे और फिर उसकी सूचना उन्हें देंगे।

उसके बाद कांग्रेस और जेडीएस अपने-अपने विधायकों को अलग-अलग सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में जुट गए। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के विधायक वहीं बंगलुरू में कहीं टिकाए जाएंगे जबकि जेडीएस के विधायकों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। दोनों दलों के लिए अपने विधायकों को बीजेपी के संपर्क में आने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती हो गयी है। 










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Rahul :: - 05-17-2018
Bjp ne rajyapal ne savidhan ka encounter kehna galat hoga sahi sahbad hai " savidhan ka rape kiya gya hai" or Isko samuhik balatkar bhi kha ja sakta hai kyoki isme or bhi shaktiya shamil hai. Bhut hi jagab gatnye roj roj is desh me ho rahi hai. Desh ki court bhi janta ko nyay nahi de pa rahi hai. Ek hi bat ke liye 2 niyam. ESA to samntvadi or manu ke kanoon me hota hai. Aaj sahi me ye saaf saaf dukh raha hai ki savedhanik sanstaye hi savidhan ko khtam karne ke liye kaam kar rahi hai. Phir chahe court ho ya rajyapal ya election commison . Or desh ka PM