येरूशलम में अमेरिकी दूतावास खुलने के साथ खून से नहा उठा फिलिस्तीन, इस्राइली हमले में 58 की मौत

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, मंगलवार , 15-05-2018


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प्रदीप सिंह

नई दिल्ली। येरुशलम में अमेरिकी दूतावास खोलने का शांतिपूर्वक विरोध कर रहे फिलिस्तीनी नागरिकों पर इस्राइली सेना ने हमला कर दिया। इस हमले में करीब 58 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई और 770 से अधिक फिलिस्तीनी घायल हुए हैं। येरुशलम में अवैध रूप से अमेरिकी दूतावास बनाने का भारी पैमाने पर विरोध हो रहा था। लेकिन इस्राइल ने विरोध को दरकिनार करते हुए कल दूतावास का उद्घाटन समारोह रखा था। इस समारोह के विरोध में लगभग 40,000 फिलिस्तीनी गाजा सीमा पर इकट्ठा हो गए थे। इस्राइली सेना ने सीमा पर हमला कर दिया।  सेना ने हमास के सात ठिकानों पर भी हमला किया। जिसमें हजारों लोग घायल हुए हैं। इस्राइल के इस हमले का पूरे विश्व में विरोध हो रहा है। इस हमले के बाद एक बार फिर अरब देशों में तनाव देखने को मिल सकता है। 

फिलिस्तीनियों पर हमले और हत्या की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने कड़ी निंदा की है। मानवाधिकार आयोग ने कहा कि, ‘‘दर्जनों की चौंकाने वाली हत्या और सैकड़ों लोगों को हमले में घायल करने की घटना अब रुकनी चाहिए। इस अपमानजनक मानवाधिकार उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित किया जाना चाहिए। हमले में पीड़ित लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की जरूरत है।’’ 

फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा।

इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच तनाव और हमला नई बात नहीं है। लेकिन जिस तरह इस्राइल एक एक करके फिलिस्तीन के क्षेत्रों पर कब्जा कर रहा है वह बहुत ही निंदनीय है। खास बात ये है कि येरुशलम में फिलिस्तीनी क्षेत्र में ही अमेरिका का दूतावास बनाया गया।  इस्राइल का कहना है कि अमेरिकी दूतावास के आधिकारिक उद्घाटन के लिए येरूशलम में कई देशों के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को बुलाया गया था। फिलिस्तीनी इसका बेवजह विरोध कर रहे थे। 

14 मई, 2018 को गाजा सीमा पर प्रदर्शन कर रहे फिलिस्तीनियों पर इस्राइली सुरक्षा बलों ने आंसू गैस छोड़े। उसके बाद गोली चलाई।   

फिलिस्तीनियों ने येरुशलम में अमेरिकी दूतावास खोलने को राष्ट्रीय आपदा बताते हुए एक सभा बुलाई थी। फिलिस्तीनियों ने ही इस्राइल को बनाने में मदद की थी। अब वही इस्राइल पूरे फिलिस्तिीन को अपने कब्जे में कर लेना चाहता है। गाजा में स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस्राइल सेना की गोली से मरने वालों की संख्या 58 हो गई है। फिलिस्तीन ने इस्राइल के इस हमले का विरोध करने के लिए समूचे अरब राष्ट्रों से अपील की है। फिलिस्तीन ने बुधवार को आम हड़ताल की घोषणा की है। उच्च अरब निगरानी समिति ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। 

इस घटना के बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक करके सुरक्षा मामलों की समीक्षा की। अमेरिकी ह्वाइट हाउस ने   इस हमले के लिए फिलिस्तीन को ही जिम्मेदार ठहराते हुए जारी बयान में कहा कि ‘‘गाजा-इस्राइल सीमा पर दर्जनों फिलिस्तीनियों की मौत का जिम्मेदार ‘हमास’ है। फिलिस्तीनियों ने हमास के नेतृत्व में सीमा पर सनकभरा प्रदर्शन किया। फिलिस्तीन अभी भी हमास के साथ बना हुआ है।’’ ह्वाइट हाउस के प्रवक्ता राज शाह ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन इस्राइल के ‘‘खुद को बचाने का अधिकार’’ का समर्थन करता है।  

फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा।

दक्षिण अफ्रीका ने गाजा की मौतों पर इस्राइल की कड़ी निंदा की है। दक्षिण अफ्रीका ने सोमवार को बयान जारी कर इस्राइल से अपने राजदूत को बुलाने का आदेश दिया है। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ‘‘इस्राइल को हमास के खिलाफ खुद को बचाने का अधिकार है। हर राष्ट्र को अपनी सीमाओं की रक्षा करने का अधिकार है। हमास कहता है कि उसका इरादा इस्राइल को नष्ट करना है और उसके लिए सीमापार से हजारों लड़ाकों को भेजना है। हम संकल्प के साथ कार्य करना जारी रखेंगे हमारी संप्रभुता और हमारे नागरिकों की रक्षा के लिए है।’’  

फिलिस्तीन के प्रमुख मोहम्मद अब्बास ने प्रमुख नेताओं की एक बैठक बुलाई है। जिसमें पीएलओ और फतह सेंट्रल कमेटी के लोगों से गाजा के वर्तमान स्थिति पर चर्चा होगी। गाजा पट्टी में इस्राइल के हमले से पूरे विश्व समुदाय में आक्रोश है। अमेरिका को छोड़कर बाकी देश इस घटना के लिए इस्राइल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मिस्र ने वैध और अपने अधिकारों की मांग करते हुए शांति पूर्वक मार्चों के खिलाफ बल प्रयोग करने की निंदा करते हुए कहा कि  फिलिस्तीन में इसका नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। 

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावाद जेरिफ ने येरुशलम में अमेरिकी दूतावास खोलने के दिन को ‘‘शर्मनाक दिन’’ बताया है। ईरानी विदेश मंत्री ने ट्वीट किया कि फिलिस्तीन के लोग बहुत ही सीधे-सादे लोग हैं। वे लंबे समय से विश्व के ‘‘खुले बंदी’’ के रूप में जीवन बसर कर रहे हैं। अब ट्रंप गैरकानूनी दूतावास खोल कर अरब एकता का ध्यान भटकाना चाहते हैं।  तुर्की ने इस घटना की निंदा करते हुए अमेरिका और इस्राइल दोनों को जिम्मेदार ठहराया है। तुर्की सरकार के प्रवक्ता बेकिर बोजदाग ने कहा कि ऐसी हत्याएं और हमले इस्राइल लगातार कर रहा है। अरब देशों के राजनीतिक संगठन ज्वाइंट लिस्ट के चेयरमैन अयमान ओदेह ने इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह ‘‘खून में नहाना’’ है।

  








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