जब कपड़े उतारकर अफ्रीकी महिला ने जताया अपना विरोध

विवाद , , शुक्रवार , 05-05-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। जातीय घृणा और नस्लीय सोच हमारे समाज को अपने शिकंजे में लेती जा रही है। दूर-दराज गांव के पिछड़े इलाकों की बात नहीं राजधानी दिल्ली और बंगलौर जैसे आधुनिक शहर भी इसकी चपेट में हैं। बंगलौर में अभी हाल में अफ्रीकियों के साथ बुरे बर्ताव का मामला सामने आया था। दिल्ली में तो इस तरह की घटनाओं की बाढ़ आ गई है। ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब एनसीआर के ग्रेटर नोएडा इलाके में कुछ अफ्रीकी युवकों की शक की बिना पर लोगों ने पिटाई कर दी थी। आमतौर पर इन घटनाओं में अभी तक निशाने पर पुरुष हुआ करते थे लेकिन अब महिलाएं भी इसके दायरे में आ गयी हैं।

महिला ने उतारे कपड़े

इसी तरह की एक घटना दिल्ली के मेट्रो में घटी है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जाता है कि मेट्रो में चलने के दौरान एक अफ्रीकी महिला से कुछ भारतीय यात्रियों की कहा सुनी हो गयी। जिसमें लोगों ने उसके खिलाफ जबानी गाली-गलौच शुरू कर दी। बर्दाश्त न होने पर साथ की दूसरी अफ्रीकी महिला ने मोर्चा संभाला। उसने युवकों से महिला के साथ बदतमीजी से न पेश आने की चेतावनी दी। अभी और कोई बात होती तभी उस महिला की हरकत ने लोगों को भौंचक कर दिया। उसने भरी भीड़ के सामने अपने कपड़े उतार दिए। और फिर चुनौती के अंदाज में उससे निपटने की चेतावनी देनी शुरू कर दी। जिसके बाद लोग सकते में आ गए। और फिर कुछ दूसरे लोगों के बीच-बचाव करने पर मामला शांत हुआ।

सभ्यता का दायरा टूट गया

बहरहाल इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारी सभ्यता का दायरा कब का टूट चुका है। कभी भी और कहीं भी हमारी नस्लीय घृणा छलकर सामने आ जा रही है। अभी ज्यादा वक्त नहीं हुए हैं जब मेट्रो में एक मुस्लिम बुजुर्ग को कुछ इन्हीं हालातों से गुजरना पड़ा था। जिसमें उस बुजुर्ग ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीट पर बैठे युवकों से हटने की गुजारिश की तो युवकों ने हटने की बजाय उन्हें पाकिस्तान जाकर सीट लेने की सलाह दे डाली। जिस पर बुजुर्ग नाराज हो गए और उस समय मौजूद तमाम दूसरे यात्रियों ने भी बुजुर्ग का साथ दिया। और फिर लोगों की मदद से बुजुर्ग ने उन युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी। हालांकि बाद में युवकों के माफी मांगने पर बुजुर्ग ने अपनी एफआईआर वापस ले ली। और उन्होंने भी मामले को आगे न बढ़ाना ही उचित समझा।

हम मूलतः महिला विरोधी हैं

लेकिन मौजूदा वीडियो किसी को भी शर्मिंदा करने के लिए काफी है। हम अपनी सभ्यता और संस्कृति का हवाला देकर महिलाओं को देवी मानने से लेकर क्या-क्या कहते नहीं थकते। लेकिन हमारी असलियत उस समय सामने आ जाती है जब इस तरह के मौके सामने आते हैं। और ये बार-बार साबित होता रहता है कि भारतीय समाज मूलतः महिला विरोधी, दलित विरोधी, अल्पसंख्यक और कमजोर विरोधी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की सच्चाई की हम स्वतंत्र रूप से पुष्टि तो नहीं कर सकते लेकिन इसमें दिखने वाली सच्चाई बेहद चिंताजनक है।

 

 






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