बिलकिस मामला : फ़ैसले से निज़ाम फिर घेरे में?

मुद्दा , , शुक्रवार , 05-05-2017


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जनचौक ब्यूरो

गुजरात की बिलकिस बानो के मामले में बोम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इस एक फैसले के तीन हिस्से हैं।

एक- कोर्ट ने 11 दोषियों की सज़ा बरकरार रखी।

दो- सात अन्य लोगों जिसमें 5 पुलिसवाले और 2 डॉक्टर शामिल हैं, उन्हें

सबूतों के साथ छेड़छाड़ और गलत सूबत पेश करने का दोषी माना और उन्हें बरी करने के निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया।

तीन- इस मामले में सीबीआई की तरफ से तीन दोषियों को फांसी की सज़ा दिए जाने की मांग खारिज कर दी।

इस फैसले का बिलकिस समेत तमाम लोगों ने स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर कई प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

 क्या मोदी और शाह से जवाब मांगा जाएगा?

महिला एक्टिविस्ट कविता कृष्णन लिखती हैं कि बिलकिस बानो सामूहिक बालात्कार कांड में उच्च न्यायालय ने 11 दोषियों की उम्रक़ैद की सज़ा बरक़रार रखी। यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक है कि इसने गुजरात पुलिस के पांच लोगों को भी दोषी करार दिया - शायद पहली बार किसी दंगों वाले कांड में पुलिस कर्मियों को सज़ा हुई है।
इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत होना चाहिए। बिलकिस बानो ने खुद इस फैसले का स्वागत किया है। उनका बयान पढ़ने लायक है।
उन्होंने कहा - "मेरे साथी भारतीय नागरिकों, मेरे गुजराती साथियों, मुस्लिम साथियों और विश्व की सभी महिलाओं से मैं कहना चाहती हूं कि माननीय न्यायाधीशों की ओर से दिए गए इस फैसले ने न्यायपालिका पर मेरा भरोसा बरक़रार रखा है. इस फैसले ने एक बार फिर मेरी सच्चाई को दोषमुक्त साबित किया है।
एक इंसान, एक नागरिक, महिला और मां के तौर पर मेरे अधिकारों को बहुत ही क्रूरता के साथ कुचला गया था, लेकिन मैंने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा किया. अब मेरा परिवार और मैं ये महसूस कर रहे हैं कि अब हम फिर से बिना डर के ज़िंदगी शुरू कर सकते हैं."
कविता पूछती हैं कि जिस फैसले को बिलकिस बानो खुद सच्चाई और इंसानियत की जीत बता रही हैं, उसे कुछ लोग बिलकिस की हार और अन्यायपूर्ण फैसला क्यों बताने पर तुले हैं?
कविता के मुताबिक न्याय का मतलब प्रतिशोध नहीं है - सच्चाई के प्रति जवाबदेही है। बिलकिस बानो का संयमित बयान इस बात को समझता है।

हमें यह उम्मीद करनी चाहिए, मांग करनी चाहिये कि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को बरकरार रखें, न कि सीबीआई फिर मौत की सज़ा मांगे। हमें मांग करनी चाहिए कि राज्य प्रायोजित दंगों के हर मामले में इस फैसले की तर्ज पर न सिर्फ दोषियों को सज़ा हो बल्कि राज्य तंत्र - पुलिस प्रशासन - के उन तमाम लोगों को भी सज़ा हो जो पीड़ितों के बजाय दोषियों का साथ देते हैं।
और हमें यह याद करना और कराना चाहिए कि पुलिस वालों के दोषी पाए जाने के मायने क्या हैं। पुलिस वालों ने किसके इशारे पर सबूत नष्ट किये? क्या ये सवाल टीवी पर एंकर तब के गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से पूछेंगे? आखिर गुजरात पुलिस गुजरात के गृह मंत्रालय के तहत ही तो है?

'बिलकिस गुजरात का शेर'

मोहम्मद शहबाज़ मलिक के फेसबुक वॉल पर सलाम हैशटैग से हयात साहब का बयान मिलता है। वह लिखते हैं - 
बिलकिस बानो, सलाम है

इतना अपमान, इतनी दहशत के बावजूद भी ये लड़ती रहीं। डॉक्टर, पुलिसवाले जहाँ एक तरफ झूठी रिपोर्ट बनाते रहे वहीं दूसरी और बिलकिस बानो लड़ती रहीं, जूझती रहीं...

कौन आया बिलकिस बानों की मदद को, वही तीस्ता सीतलवाड जैसे वामपंथी विचारधारा वाले लोग
जो लोग महिलाओं को कमजोर समझते हैं ये उनके लिए भी सबक है
सबसे जरूरी बात पुलिस, डॉक्टर किसके ईशारे पर झूठी रिपोर्ट बना रहे थे???
गुजरात का शेर मोदी नही, बिलकिस बानो है..
बिलकिस का मुकदमा

अनिल जनविजय चंचल बीएचयू की पोस्ट शेयर करते हैं- सच कहता हूं हम पहली बार शब्द नहीं पा रहे हैं यह कहने के लिए कि हिन्दू उन्माद कितना घृणित, कुत्सित और भयावह है, जो सड़कों पर नारंगी गमछा बांधे घूम रहा है। बिलकिस मुसलमान है। महिला है। भारतीय है। गर्भवती है। गुजरात में रह रही थी। गोधरा कांड होता है। ट्रेन के एक बोगी में आग लगती है । मुसलमान दोषी बनता है। खेल देखिए। गोधरा ट्रेन को अगर कुछ मुसलमानों ने आग लगाई जैसा कि सरकार कहती है तो इसके मायने यह नहीं की देश के सारे मुसलमान दोषी मान लिए जाएं। शर्म करो, अपनी समझ पर की तुम्हारे लाख दबाव पर भी न्याय ने बिलकिस मामले में सजा सुना ही दी। बिलकिस का किस्सा हम बता भी नही सकते इतना भयावह है। 

शुक्रिया न्यायपालिका। सही मायने में यह फैसला महज उन्हें ही दोषी नही करार दे रही है, उसका इशारा इधर भी है जो हुकूमत के ऊपरी मुकाम पर है । 
हम कातिल के निजाम में जी रहे थे, यह इल्जाम लगेगा हम पर । अगली पीढ़ी लगाएगी ।"
बलात्कारियों की मांएं क्या सोचती होंगी?

नूतन यादव फेसबुक पर लिखती हैं कि बिलकिस बानो मामले के अपराधियों  का परिवार उनके बारे में क्या सोचता होगा ...जो लोग गर्भवती से बलात्कार कर सकते हैं ,जो एक छोटे बच्चे को पत्थर पर पटक कर मार सकते हैं ऐसे लोगों की पत्नियां, मांएं और बेटियां बिलकिस के बारे में कैसे और क्या सोचती होंगी ...क्या यहाँ भी धर्म आड़े आता होगा ...

संघर्ष की मिसाल

फेसबुक पर ही पत्रकार धीरेश सैनी लिखते हैं- बिल्किस बानो को सलाम।
दुनिया भर की स्त्रियों और सच्चे इंसानों के लिए संघर्ष की मिसाल।
19 साल की एक गर्भवती लड़की, जिसके परिवार को उसके सामने मारा गया हो, जिसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया हो, जिसने ख़ुद को संघर्ष के लिए मजबूत बनाए रखा हो।

सजा पाने वालों में पुलिस वाले भी हैं। कोर्ट के इस फैसले के बिना भी यह छुपा नहीं था कि गुजरात में पुलिस को क्या हिदायत दी गई थी। गुजरात नरसंहार के बहुत से हत्यारों-रेपिस्टों के अपनी कारगुजारी बेशर्मी से कैमरे के सामने बघारते हुए बयान मौजूद हैं। उन कारगुजारियों के लिए बहुसंख्यक समाज से मिला देशव्यापी समर्थन भी सामने ही है। बिलकिस बानो और दूसरी अनेक महिलाओं ने जो भुगता, उसे दूसरे हिस्सों में दोहराए जाने का सिलसिला भी मौजूद है। और बार-बार गुनाहगारों को बचा लिए जाने का सिलसिला भी।

बिलकिस बानो का संघर्ष किसी भी फैसले से ज्यादा बेशक़ीमती है। प्रेरणादायी। बहुसंख्यक समाज की उन महिलाओं के लिए भी जो धार्मिक उन्माद का शिकार होकर रेपिस्टों के साथ खड़ी हो जाती हैं और समाज को रेपिस्टों-हत्यारों के हाथ में सौंपकर ख़ुद ख़तरे में आती चली जाती हैं। यह उनके लिए भी मुश्किल पड़ने पर संघर्ष के लिए प्रेरणास्रोत।






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