डिप्टी जेलर ने कैद किया सरकार का झूठ

विवाद , , बुधवार , 03-05-2017


dyptijailor-naxal-chhattishgarh-government-varshadongre

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। नक्सलवाद एक बार फिर से बहस के केन्द्र में आ गया है। इसका कारण कुछ दिनों पहले छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों द्वारा अर्धसैनिक बलों (सीआरफीएफ) पर हमला कर 26 जवानों की हत्या है। छत्तीसगढ़ में पिछले 12 वर्षों में नक्सली हमलों में लगभग 965 जवान शहीद हुए हैं। इसी के आस-पास तकरीबन 930 नक्सलियों के भी मारे जाने की सूचना है। हर घटना के बाद नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने का वादा किया जाता है। लेकिन वादे और दावों के बीच नक्सलवादी घटनाओं के पीछे की हकीकत को दबा दिया जाता है। सुकमा में घटित घटना के बाद नक्सलवाद पर बहस नहीं हुई। रायपुर जेल की डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिख कर छत्तीसगढ़ की नक्सल समस्या की हकीकत और प्रशासन द्वारा उससे निपटने के तरीकों को उजागर किया है। 

इस पोस्ट के बाद ही रायपुर और दिल्ली में सत्ता के गलियारे में खामोशी पसर गई है। अब वर्षा डोंगरे पर विभागीय कार्रवाई करके उनका मुंह बंद करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन डोंगरे ने छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या की हकीकत को बेपर्दा कर दिया है। इस अधिकारी ने सरकार और प्रशासनिक मशीनरी को कटघरे में खड़ा किया है।

सरकार की मंशा पर डोंगरे ही सवाल नहीं उठा रही हैं बल्कि सुकमा एनकाउंटर में 26 सीआरपीएफ के सिपाहियों के मौत की जांच में गये पत्रकारों के सामने एक जवान ने बातों ही बातों में तंत्र की असली कहानी को कह दिया है। जवान ने कहा कि ''नक्सली क्या मारेंगे, सरकार ही हमारी सुपारी किलिंग करवा रही है।'' एक सिपाही के इस उद्गार के गंभीर निहितार्थ हैं। सिपाही भी लड़ना नहीं चाहता, माओवादी भी लड़ना नहीं चाहते, फिर भी लड़ाई हो रही है और दोनों ही तरफ से लोग मारे जा रहे हैं, तो ऐसे में ये भी सवाल उठता है कि ये कौन हैं जो इस हिंसा को जारी रखना चाहते हैं? आखिर वह क्यों इंसानी जानों से खिलवाड़ कर रहा है?

 

वर्षा के अनुसार- सच तो यह है कि सारे प्राकृतिक खनिज संसाधन इन्हीं जंगलों में हैं, जिसे उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को बेचने के लिए खाली करवाना है। आदिवासी जल-जंगल-जमीन खाली नहीं करेंगे क्योंकि यह उनकी मातृभूमि है। वो नक्सलवाद का अंत तो चाहते हैं लेकिन जिस तरह से देश के रक्षक ही उनकी बहू बेटियों की इज्जत छीन रहे हैं, उनके घर जला रहे हैं, उन्हे फर्जी केशों में फंसाकर जेल की चारदीवारी में सड़ने के लिए भेजा जा रहा है। तो आखिर वो न्याय प्राप्ति के लिए कहां जायें?

कटघरे में सरकारी नीति  

सोशल मीडिया में रायपुर जेल की डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे के पोस्ट ने नक्सलवाद पर सरकार की नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बस्तर में आदिवासियों पर फोर्स के जुल्म का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि फोर्स के जवान वहां महिलाओं से रेप कर रहे हैं। यह पोस्ट पिछले चार दिन से सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। अब राज्य सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

डीजी जेल गिरधारी नायक के आदेश पर वर्षा के पोस्ट की कॉपी सेव की गई है। जेल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। वर्षा ने लिखा कि हर वर्दी दागदार नहीं है लेकिन उन्होंने खुद एक जवान को एक 13 साल की बच्ची का फ्राक एके 47 के कुंदे से उठाते देखा। प्रतिरोध करने पर मेरे ऊपर गन टिका दिया गया। मैंने कहा मस्तक पर गोली मारो। एक लाख सैनिक तैनात कर दो लेकिन नक्सलवाद से तब तक नहीं जीत सकते जब तक जनता का विश्वास न हासिल हो। नक्सली लुटेरे हैं या नहीं आप खुद तय करें। उनके पोस्ट से सरकार में हड़कम्प मच गया है।  

रायपुर की डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे का फेसबुक स्टेटस

मुझे लगता है कि एक बार हम सभी को अपना गिरेबान झांकना चाहिए, सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जाएगी... घटना में दोनों तरफ मरने वाले अपने देशवासी हैं...भारतीय हैं। इसलिए कोई भी मरे तकलीफ हम सबको होती है। लेकिन पूंजीवादी व्यवस्था को आदिवासी क्षेत्रों में जबरदस्ती लागू करवाना... उनको जल जंगल जमीन से बेदखल करने के लिए गांव का गांव जलवा देना, आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार, आदिवासी महिलाएं नक्सली हैं या नहीं इसका प्रमाण पत्र देने के लिए उनका स्तन निचोड़कर दूध निकालकर देखा जाता है। टाईगर प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासियों के जल जंगल जमीन से बेदखल करने की रणनीति बनती है जबकि संविधान के अनुसार 5 वीं अनुसूची में शामिल होने के कारण सैनिक सरकार को कोई हक नहीं बनता आदिवासियों के जल जंगल और जमीन को हड़पने का.... 

आखिर ये सबकुछ क्यों हो रहा है। नक्सलवाद खत्म करने के लिए... लगता नहीं। सच तो यह है कि सारे प्राकृतिक खनिज संसाधन इन्ही जंगलों में है जिसे उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को बेचने के लिए खाली करवाना है । आदिवासी जल जंगल जमींन खाली नहीं करेंगे क्योंकि यह उनकी मातृभूमि है। वो नक्सलवाद का अंत तो चाहते हैं लेकिन जिस तरह से देश के रक्षक ही उनकी बहू बेटियों की इज्जत उतार रहे हैं, उनके घर जला रहे हैं, उन्हे फर्जी केशों में चार दीवारी में सड़ने भेजा जा रहा है । तो आखिर वो न्याय प्राप्ति के लिए कहां जाएं... ये सब मैं नहीं कह रही उनकी रिपोर्ट कहती है, सुप्रीम कोर्ट कहता है, जमीनी हकीकत कहती है। जो भी आदिवासियों की समस्या समाधान का प्रयत्न करने की कोशिश करते हैं चाहे वह मानव अधिकार कार्यकर्ता हो चाहे पत्रकार... उन्हे फर्जी नक्सली केशों में जेल में ठूस दिया जाता है । अगर आदिवासी क्षेत्रों में सबकुछ ठीक हो रहा है तो सरकार इतना डरती क्यों है । ऐसा क्या कारण है कि वहां किसी को भी सच्चाई जानने के लिए जाने नहीं दिया जाता ।

मैंने स्वयं बस्तर में 14 से 16 वर्ष की मुडि़या माडि़या आदिवासी बच्चियों को देखा था जिनको थाने में महिला पुलिस को बाहर कर पूरा नग्न कर प्रताड़ित किया गया था । उनके दोनों हाथों की कलाईयों और स्तनों पर करेंट लगाया गया था जिसके निशान मैने स्वयं देखे। मैं भीतर तक सिहर उठी थी...कि इन छोटी छोटी आदिवासी बच्चियों पर थर्ड डिग्री टार्चर किस लिए...मैनें डाक्टर से उचित उपचार व आवश्यक कार्यवाही के लिए कहा ।

हमारे देश का संविधान और कानून यह कतई हक नहीं देता कि किसी के साथ अत्याचार करें...।

इसलिए सभी को जागना होगा... राज्य में 5 वीं अनुसूची लागू होनी चाहिए । आदिवासियों का विकास आदिवासियों के हिसाब से होना चाहिए। उन पर जबरदस्ती विकास ना थोपा जावे। आदिवासी प्रकृति के संरक्षक हैं । हमें भी प्रकृति का संरक्षक बनना चाहिए ना कि संहारक... पूंजीपतियों के दलालों की दोगली नीति को समझें ...किसान जवान सब भाई भाई हैं । अत: एक दूसरे को मारकर न ही शांति स्थापित होगी और ना ही विकास होगा...। संविधान में न्याय सबके लिए है... इसलिए न्याय सबके साथ हो... 

हम भी इसी सिस्टम के शिकार हुए... लेकिन अन्याय के खिलाफ जंग लड़े, षडयंत्र रचकर तोड़ने की कोशिश की गई प्रलोभन रिश्वत का आफर भी दिया गया वह भी माननीय मुख्य न्यायाधीश बिलासपुर छ.ग. के समक्ष निर्णय दिनांक 26.08.2016 का पैरा नंबर 69 स्वयं देख सकते हैं । लेकिन हमने इनके सारे इरादे नाकाम कर दिए और सत्य की विजय हुई... आगे भी होगी ।

अब भी समय है...सच्चाई को समझे नहीं तो शतरंज की मोहरों की भांति इस्तेमाल कर पूंजीपतियों के दलाल इस देश से इन्सानियत ही खत्म कर देंगे ।

ना हम अन्याय करेंगे और ना सहेंगे....

 

जय संविधान जय भारत






Leave your comment