हिन्दू धर्म कोई एक चीज़ नहीं है महाराज!

धर्म-संस्कृति , , मंगलवार , 11-04-2017


hindu-relegion-marriage

जनचौक ब्यूरो

"आप तो हिन्दू लगते हो। रिश्तेदारियों में शादियां तो मुसलमानों में होती हैं।"

उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में इस तरह की धारणाएं या भावनाएं देखने को मिलती हैं। जबकि ऐसा नहीं है कि यह सब हिन्दू धर्म में नहीं होता।

हिन्दू धर्म के भीतर भी इस तरह की कई परंपराएं हैं। और इनमें कुछ ग़लत नहीं है, लेकिन ऐसे मसलों पर यहां एक बड़ा वर्ग मरने-मारने को तैयार हो जाता है। दरअस्ल यह हमारी अज्ञानता का नतीजा है। 

इसके अलावा यह भी सच है कि आज ऐसा समय है जब हिन्दू धर्म को लेकर एक ख़ास तरह की संस्कृति और नैतिकता थोपने की कोशिश की जा रही है और इससे अलग हर बात को पाश्चात्य संस्कृति या मुसलमानों से जोड़कर खारिज करने की कोशिश की जा रही है।

ऐसे समय में यह जानना बेहद ज़रूरी है कि यूपी-हरियाणा या उत्तर भारत ही पूरा देश नहीं है और वही सही नहीं है जो हम जानते या मानते हैं। और आप यह भी जान लीजिए कि उत्तर भारत में भी शादी-ब्याह को लेकर कोई एक तरह की मान्यता या परंपरा नहीं है।

पत्रकार साथी धीरेश सैनी ने इसी सिलसिले में सोशल मीडिया पर अपने संस्मरण साझा किए, जिसपर तमाम प्रतिक्रियाएं मिलीं। आप यह सब पढ़कर जान सकते हैं कि हमारे देश और हिन्दू धर्म के भीतर ही कितनी विविधता है और ऐसे मामलों में धर्म या नैतिकता की दुहाई देकर तीरो-तलवार निकालने की कतई ज़रूरत नहीं है।

 

विवाह समारोह में जश्न। प्रतीकात्मक तस्वीर


पहला अधिकार बहन की बेटी का

धीरेश सैनी लिखते हैं- 

चाय की दुकान पर महाराष्ट्र के दोस्ताना मिजाज के एक युवक लक्ष्मण जाधव से मुलाकात हुई। लक्ष्मण ने बताया कि उसकी शादी उसके सगे मामा की बेटी से हुई है।

हमारी बगल में बैठे युवकों में यह सुनकर कानाफूसी शुरू हो गई। ये युवक बोलचाल से हरियाणा के लग रहे थे और महाराष्ट्रियन युवक की तरह ही शायद घूमने के इरादे से शिलांग आये थे।

तिलक लगाए और शिव की तस्वीर वाली टीशर्ट पहने बैठे युवक के मुंह से बहन के साथ शादी की बात उन्हें अजूबी लगी।

आखिर एक युवक ने कहा, "आप तो हिन्दू लगते हो। इस तरह की शादियां तो मुसलमानों में होती हैं।"

लक्ष्मण जाधव ने हैरानी जताई और कहा कि हमारे यहां यह सामान्य है। मेरे मामा ने कहा तो इंकार करना नैतिकता भी नहीं थी। मेरी सरकारी नौकरी लगी तो माँ ने ही कह दिया था कि तुझ पर पहला अधिकार तुम्हारे मामा की बेटी का ही बनता है। 

हिन्दू विवाह की प्रतीकात्मक तस्वीर

मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। कई साल पहले केरल जाते हुए ट्रेन में आंध्र प्रदेश के एक युवक वेंकट से मुलाकात हुई थी। लंबे सफर में सीटें एक साथ होने की वजह से हमारी थोड़ी निकटता हो गई थी।

वेंकट की नई-नई सरकारी नौकरी लगी थी और उसकी पोस्टिंग एर्नाकुलम में थी। अगले महीने उसकी शादी होनी थी।

मैंने कहा कि दहेज बटोरगे तो बोला कि बहन की बेटी से शादी है, ज्यादा दबाव नहीं दे सकता हूं। सरकारी सर्विस लगी है तो रिश्ते खूब आ रहे हैं लेकिन पहला अधिकार बहन की बेटी का ही था।

मैंने इस बात का जिक्र करते हुए अपने इलाके के युवकों से कहा कि हिन्दू धर्म कोई एक चीज़ नहीं है। हजार परंपराएं, हजार विविधताएं मौजूद होती हैं। अच्छा-बुरा, पवित्र-अपवित्र हर जगह वही नहीं होता जो हमें किसी खास दायरे में पैदा होने के साथ घुट्टी की तरह सिखा दिया जाता है।

ट्रेन में ही एक बार एक ईरानी युवक फैसल मिला था। कजन से शादी की परंपरा का जिक्र आने पर उसने बताया था कि मौसी की बेटी से शादी नहीं की जा सकती है, क्योंकि मौसी तो मां ही ठहरी। शायद हमारे इलाके में मुसलमानों में खाला के बेटे-बेटी से शादी की मनाही नहीं है।

निकाह की प्रतीकात्मक तस्वीर



ईरानी युवक को हिन्दी में सहज होकर बातचीत करते देख मैं है
रान रह गया था जबकि वह तीन महीने से ही हिन्दुस्तान में था। फैसल के मुताबिक, उसे हिन्दी अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान ने सिखाई थी। मतलब कि वह ईरान में कंप्यूटर पर हिन्दी फिल्में जमकर देखा करता था।


धीरेश सैनी की इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए इस तरह की शादियों के अपने अनुभव साझा किए।

विवाह बंधन की प्रतीकात्मक तस्वीर


पंजाब राव मेश्राम लिखते हैं-

अलग अलग जगह अलग अलग परंपराएं हैं। हम मामा की लड़की से शादी कर सकते हैं पर बुआ-चाचा या मौसी की लड़की से नहीं।

आन्ध्रप्रदेश के मेरे एक मित्र ने अपनी बड़ी बहन की लड़की से शादी की थी और कहता था यह वहाँ सामान्य है।

आश्चर्य होता है तब जब पाँच पतियों की एक पत्नी द्रौपदी तथा ब्रह्म की अपनी लड़की सरस्वती से शादी को पवित्रता/ मान्यता देने वाले लोग नखरा दिखाते हैं।
 

 प्रतीकात्मक तस्वीर


राजपाल दाहिया के मुताबिक

15 साल पहले परिवार के साथ केरल जाने का मौका मिला।

स्वागत किया एक महिला ने। घर चलने का आदेश हुआ। एक घर में ले जाकर बैठा दिया। चाय पकोड़े लिए। परिचय होने पर होस्ट महिला ने मम्मी पापा से मिलाया।

थोडी देर में एक जवान आया और बोला चलो घर खाना तैयार है। हमने होस्ट महिला से पूछा कहां?, तो कहा मेरी ससुराल में। कितनी दूर?, तो बोली 100 मीटर। ये कौन?, जवाब मिला पति बुआ का लड़का। वो भी उच्च ब्राह्मण 


कुमार सत्येंद्र लिखते हैं

भारतीय नौ सेना में नौकरी करने के दौरान मैं ऐसे संबंधों का साक्षी रहा हूँ और बिहारी होने के कारण कुछ विचलित भी हुआ था। किन्तु ऐसे संबंध उन राज्यों के लिए बहुत ही सामान्य है।

अपने मित्र विजय पवार से ही तब जाना था कि मुंबई के पुलिस को मामा क्यों लोग कहते हैं और इस संबोधन से पुलिस वाले क्यों चिढ़ते हैं।
 

मेहंदी रचे हाथ। विवाह की एक रस्म 


अनवर अली कहते हैं

अलग अलग परंपराएं,  मान्यताएं, रिवाज़ हैं। सभी को अपनी अपनी तरह से रहना पसंद हैं। रहन-सहन, खान-पान भिन्न हैं उन्हें एक सा नहीं बनाया जा सकता। विभिन्नता में एकता भारत की शान रही है, जिसे कुछ लोग नष्ट करना चाहते हैं।
सभी धर्मों और रिवाज़ों का आदर करिये।


अनघ शर्मा लिखते हैं

केरल में मामा भांजी की शादी की प्रथा तो सैकड़ों सालों से है।


हरपाल गाफ़िल कहते हैं

हमारी दिक्कतें असल में यहीं से शुरू हो जाती है जब हम उत्तरी भारत को ही सारा जहां मान बैठते हैं। हम अंधे कुएँ के मेंढक से भी बदतर हैं ।


विजय शंकर चतुर्वेदी लिखते हैं

कर्नाटक में वधू के माँ-बाप वर के साथ रहने चले आते हैं, जबकि गाय पट्टी में बेटी के घर का पानी भी पीना हराम है!


सत्य नारायण
भी बताते हैं कि मेरा दोस्त है जिसने इस तरह की शादी की है।

विवाह बंधन की प्रतीकात्मक तस्वीर


यूपी-हरियाणा में भी है ऐसी परंपरा

कौशल किशोर बताते हैं-

हमारे उन्नाव और उसके पड़ोसी हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, कन्नौज, कानपुर आदि जिलों में यादवों, कई पिछड़ी जातियों और कई दलित जातियों में सगे मामा की बेटी से शादी आम चलन है। मेरे गांव के पुराने रिश्तों में इसकी तादाद आधे से भी ज्यादा होगी। यादवों में दिशा वाली शर्त होती है, जैसे बेटी की शादी पश्चिम और बेटे की शादी पूरब में। और लोगों में यह शर्त नहीं है।


नरेश सैनी लिखते हैं

हरियाणा में तो इस तरह की शादियां आम बात हैं। सगी मौसी व सगी बुआ की लडकी से शादी। सामान्य वर्ग व अनुसूचित परिवारों में ऐसी बहुत सी शादियों में मुझे स्वंय जाने का अवसर मिला है। कुछ दिन पहले ही 12 वीं पास कर चुकी मेरी एक छात्रा की शादी उसकी सगी बुआ के लड़के से हुई है। इसमें हिन्दू-मस्लिम वाली कोई बात नहीं है।

...






Leave your comment