आखिर किसने किया है इस भीड़ को तैयार?

मुद्दा , , मंगलवार , 04-12-2018


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जनचौक ब्यूरो

(कल बुलंदशहर में हिंदू कट्टरपंथियों के नेतृत्व में भीड़ द्वारा की गयी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या पर कई तरफ से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उन्हीं में से कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाओं को हम यहां दे रहे हैं-संपादक)

अंशुल कृष्णा की फेसबुक वॉल से-

भीड़ को तैयार देश के ही नहीं,

दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री ने किया है,

उसे उकसाया भड़काया उनके नीचे वाले लोगों ने है,

और मौन समर्थन इसी सिविल सोसाइटी के उन लोगों ने दिया है,जो लगते तो ज़िंदा है लेकिन होते दरअसल मरे हुये ही हैं,

बात किसी सुबोध कुमार या किसी अखलाक की नहीं, बात तो उस हिम्मत की है जो लोगों में नेताओं के द्वारा भरी जाती है और सुनिश्चित किया जाता है कि तुम्हें कुछ नहीं होगा,

क्या कोई हिन्दूवादी संगठन चाहे वो संघ हो,या विहिप या कोई और छुटभैया दल आया ?

एक हिन्दू अफसर की हत्या के विरोध में?

अगर यही हत्या किसी मुसलमान ने की होती तो क्या हालत होती?

यही दोगलापन है हिंदुत्व के ठेकेदारों का?

ये वे गिद्ध हैं जो हिन्दू बनाम मुसलमान होते ही जीभ निकाले चले आते हैं,

लेकिन बात जब हिन्दू अफसर की हिन्दू दंगाइयों के द्वारा की गई हत्या की होती है तो बिल्कुल चुप हो जाते हैं,

एकदम मौन हो जाते हैं,

सोच कर देखिये इसी उत्तरप्रदेश के दलाल भेड़िये केरल बंगाल तक की खबर निकाल कर ले आते हैं,

लेकिन बुलंदशहर उनसे अछूता रह जाता है,

मेरा हिंदूवादी मुख्यमंत्री उससे भी बड़ा हिंदूवादी प्रधानमंत्री और सबसे बड़ा हिंदूवादी संगठन संघ आज तीनों ही मौन हैं।

एक दो दिन का शोर और बात खत्म...और इंसाफ़? 

वो तो सियासत के जूतों तले रौंद दिया गया है, और लोकतंत्र सिसकियां ले रहा है।

आप या तो घोड़े बेच के सो रहे हैं या मर चुके हैं,

नहीं तो वे सिसकियाँ आपको भी सुनाई देतीं।

लेखक अशोक कुमार पांडेय जी ने सौ टका सच बात लिखी है।

हिन्दू धर्म और हिंदुत्व का फर्क़ समझिये।

हिन्दू वह पुजारी था जिसने नमाज़ियों के लिए मंदिर खोल दी थी बुलंदशहर में, हिन्दुत्व के अलम्बरदार वे जिन्होंने बुलंदशहर में एक हिन्दू पुलिस ऑफिसर को घेर कर मार डाला.

हिन्दू धर्म अपनी आस्थाओं पर निर्भर है हिन्दुत्व को नफ़रत करने के लिए रोज़ नए शत्रु चाहिए.

बुलंदशहर में इंस्पेक्टर की नृंशस हत्या के लिए योगी सरकार जिम्मेदार- रिहाई मंच

सुप्रीमकोर्ट की निगरानी में गठित की जाए एसआईटी

गौरक्षकों की खुली चुनौती जो उनकी अराजकता को रोकेगा मारा जाएगा चाहे वो पुलिस ही हो

बुलंदशहर कांड संघ-भाजपा की साजिशों का नतीजा,

अखिल भारतीय किसान महासभा की प्रेस विज्ञप्ति

अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा ने बुलंदशहर कांड को संघ-भाजपा की विभाजनकारी राजनीति को बढ़ाने की साजिश करार दिया है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि देश के किसानों की एकता और उनके आंदोलन को तोड़ने की इस साम्प्रदायिक साजिश का मुंहतोड़ जवाब दें। उन्होंने इस घटना में संघी गुंडों द्वारा गोली मार कर एक पुलिस अधिकारी और एक अन्य की हत्या की भी कड़ी निंदा की।

कामरेड शर्मा ने कहा कि मोदी-योगी सरकार हर मोर्चे पर विफल है। यह सरकार किसानों-मजदूरों का दमन करने वाली और बड़े पूंजीपतियों को देश के संशाधन लुटाने वाली साबित हुई है। उन्होंने कहा कि मोदी-योगी देश में चल रहे किसान आंदोलन और उसके पक्ष में समाज के हर तबके के समर्थन से घबरा गए हैं। ऐसे में 2019 के चुनावों के लिए इस सरकार के खिलाफ देश भर में बन रही किसानों-मजदूरों की एकता से घबराकर यह सरकार अब किसान आंदोलन के गढ़ों में साम्प्रदायिक विभाजन के षड्यंत्र रच रही है।

रिहाई मंच का बयान

रिहाई मंच ने गौगुण्डों द्वारा पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की नृंशस हत्या के लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीमकोर्ट की निगरानी में मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है। मंच ने गौरक्षा के नाम पर देश को गृहयुद्ध में झोंकने वाली हथियारबंद सेनाओं पर तत्काल प्रतिबंध की मांग की है। बुलंदशहर जिले के कोतवाली क्षेत्र स्याना में दंगे का षड्यंत्र करने वालों को पुलिस द्वारा रोकने पर गौरक्षा दल, बजरंगदल, आरएसएस, हिंदू युवा वाहिनी के गौ गुण्डों द्वारा किए गए उत्पात के बाद रिहाई मंच ने आकस्मिक बैठक की। सूबे में गुण्डाराज के खिलाफ आज शाम को गांधी प्रतिमा, हजरतगंज लखनऊ पर इंसाफ पसन्द अवाम धरना दे रहा है।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा है कि प्रदेश ही नहीं पूरे देश को सांप्रदायिक हिंसा में झोंककर सरकारों के संरक्षण में हिंदुत्ववादी संगठन देश में गृह युद्ध जैसे हालात पैदा कर रहे हैं। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या को षड्यंत्र करार देते हुए बताया कि वे अखलाक मामले में जांच अधिकारी रह चुके हैं। कल तक मासूमों को दौड़ा-दौड़ा कर मारने वालों द्वारा दुस्साहसिक तरीके से पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर मारना, वीडियो बनाना बताता है कि हमलवारों को योगी-मोदी सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त है। जिस तरह से गोली मारकर हत्या की गई उसने साफ कर दिया है कि ये हथियारबंद संगठन हैं। इस घटना ने साफ किया कि अगर इनकी अराजकता को रोकने की कोशिश किसी ने की चाहे वो पुलिस ही क्यों न हो वो उसको भी ये संगठन मौत के घाट उतार देंगे। पुलिस चैकी चिंगरावठी को आग के हवाले करना और पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की निर्मम हत्या का वीडियो बनाकर उसे वायरल कर गौगुण्डों ने सरकारों को खुली चुनौती दी है जिसके आगे योगी नतमस्तक हो चुके हैं।

रविंद्र पटवाल की फेसबुक वाल से-

कल की वीभत्स घटना पर सोशल मीडिया में ग़मज़दा माहौल है। सभी मध्यवर्ग के तबके में राज्य, केंद्र सरकार को लेकर अविश्वास और हताशा देखी जा सकती है।

भीड़ की हिंसा अभी तक किसी राह चलते ग़रीब मुस्लिम को मारती थी, आज क़ानून को और शांति की अपील कर रहे एक इंस्पेक्टर को जिस तरह गाड़ी से लटका कर मारा है, उसने फ़ासीवादी हिंदुत्व के चेहरे को साफ़-साफ़ सामने लाकर खड़ा कर दिया है।

जिन्हें उम्मीद थी कि भाजपा को चुनाव में परास्त कर वे फ़ासीवादी समाज बनने से भारत को रोक लेंगे, और अपने घर में गुड़ के साथ मूंगफली टुंग रहे थे, उन्हें आज विकल्प इन राजनीतिक अड्डेबाज़ो में ढूंढने पर फिर बड़ा छलावा मिलेगा।

गांव-बस्ती मोहल्ले के बेरोज़गार युवाओं की फ़ौज के पास गाय की रक्षा, धर्म रक्षा और मंदिर बनाओ की जिहादी मानसिकता उसे इसी सोशल मीडिया के ज़रिये रोज़-रोज़ दसियों दफ़ा साइबर सेल से मिलती है, जिसका मोदी जी ने 2 साल पहले ज़िक्र किया था कि 2019 का चुनाव पार्टियों के बीच मोबाइल ऐप के ज़रिए होगा।

अगर आप विकल्प कांग्रेस सपा बसपा में देखते हैं तो ये भी तो साथ ही खड़ी हैं पीछे से। उन्हें सिर्फ़ इंतज़ार रहता है कि इसका उल्टा रिएक्शन हो तो हमें भी वोट मिले।

सब कुछ हमसे ही सम्भव है। और वह अगर आप आज सोच रहे हैं तो आप लेट हो चुके हैं। अभी इसी वक़्त जितना आपके वश में है, इस देश को बचाने के लिये अपने आस-पास इसी सोशल मीडिया को भारतीय नागरिक बनने में इस्तेमाल करें।

उपेंद्र चौधरी के फेसबुक वाल से-

सत्ता की खुराक जब घृणा और द्वेष बन जाय,तो दुखद रूप से जंगलराज क़ायम होने लगता है। योगीराज इस मायने में मुलायमराज से कहीं आगे खड़ा दिखायी पड़ता है। मुलायमराज में गाड़ियों के बोनट पर समाजवादी झंडे को लहराने वाले 'ग़ुड़ों' को बहुत दूर से ही पहचाना जा सकता था।मगर,योगीराज में घृणा और द्वेष को सीने में संजोये हुये 'ग़ुड़ों' को पहचान पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया है।

जब इन 'ग़ुडों' के घृणा-द्वेष,'सामूहिक अभिव्यक्ति' पाने को आतुर हो जाते हैं,तब वह किसी एसएचओ सुबोध कुमार सिंह की बलि ले लेते हैं। इस तरह की घटनाओं से धर्म-मज़हब का जो स्वरूप सामने आता है, वह उसके मानने वालों के मनोवैज्ञानिक रूप से बीमार होने का सुबूत देता है। मनुष्य जब तर्क छोड़कर,किसी सोच और परंपरा की खींची हुई लकीर पर पीढ़ियों से चलते हुए उसे गहरा करने लगता है,तब ठहरी हुई सोच की गाद धर्म के साथ मिलकर सामूहिक मनोविकार बन जाती है।आजकल हमरा पूरा समाज इसी गाद और मनोविकार के बीच में फंसा हुआ है।

हिन्दू और मुसलमान, दोनों ही तरह के 'लोगों' को सोचने की ज़रूरत है कि इस धार्मिक गाद और सामूहिक मनोविकार के बीच पलते हमारे छोटे-छोटे बच्चों के आने वाले दिन कैसे होंगे ? अच्छे होंगे या भयावह होंगे ? अगर हम अपने बच्चों के हित-अहित की निगाहों से सोचें,तो शायद कुछ-कुछ तार्किक होने लगे, वर्ना आने वाले दिनों में हमारे-आपके घरों से भी 'सुबोध कुमार सिंह' हो जाने का कभी न ख़त्म होने वाला सिलसिला चल पड़े !

क्या हम इस 'मूर्खतापूर्ण' आहूति को देने के लिये तैयार हैं ? अगर नहीं, तो ख़ुद को जानवरों की तरह उन्मादी भीड़ का हिस्सा होने से रोकना होगा और होश-ओ-हवास में रहने वाले एक सभ्य समाज के निर्माण में भागीदार होना होगा, क्योंकि अपने होश में रहने वाला एक नागरिक समाज ही किसी "जंगलराज" की बेहोशी पर होश की लगाम लगा सकता है।








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