परेश की बददिमागी या सत्ता की साजिश!

खरी बात , , बुधवार , 24-05-2017


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स्तुति नारायण

फिल्म अभिनेता और सांसद परेश रावल का विख्यात लेखिका अरुंधति राय पर दिया गया बेहद विवादास्पद बयान यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या यह महज हल्के दिमाग अभिनेता की बददिमागी है या सोची-समझी साजिश के तहत देश की चिंतन और विमर्श प्रक्रिया पर लगातार हो रहे हमले की कड़ी का एक हिस्सा।

अभिनेता और सांसद परेश रावल (फाइल फोटो)

बीजेपी सांसद परेश रावल ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि "पत्थरबाज को आर्मी की जीप से बाँधने के बजाय अरुंधति राय को बाँधना चाहिए।" इस ट्वीट के कुछ ही घंटों बाद यह खबर आई कि कश्मीरी युवक को जीप के बोनट से बाँधने वाले सेना के मेजर को सेनाध्यक्ष अवार्ड देंगे।

लेखिका अरुंधति राय का फाइल फोटो

एक लेखक से डर!

अरुंधति राय जैसी लेखिकाएँ जो साफ तौर पर मानती हैं कि लेखक का काम अपने नजरिए से समाज के कमजोर और इंसाफ से वंचित लोगों की कहानी लिखना है, किसी अमीर उद्योगपति या सत्ता में बैठे व्यक्ति की आत्मकथा लिखना नहीं, ऐसे बौद्धिक तेवर से उस सरकार को भला क्यों डर नहीं लगेगा, जो पूँजीपतियों के पक्ष में कड़े फैसले लेने के लिए ही बैठाई गई है। अगर समाज के यह लेखक, बौद्धिक वर्ग आम लोगों को उस शोषित, वंचित तबकों के दुःख-दर्द से जोड़ने में सफल हो गया, जो सरकारी मशीनरी और तंत्र से प्रताड़ित किए जा रहे हैं, तो जनता के वोट से जीतकर कॉरपोरेट की सेवा में लगी सरकार अपने मिशन में फेल हो जाएगी।

ऐसे में यह जरूरी है कि आम जनता को उस बौद्धिक तबके के खिलाफ लगातार डोज दिया जाता रहे, ताकि जनता सरकार के भ्रामक फैसलों की बारीकियों को समझने के लिए बौद्धिक वर्ग की ओर ना मुड़ पाए और उन्हें अपना और देश का दुश्मन समझते हुए उनके प्रति अविश्वास जताती रहे। सरकार के इसी कार्य में मदद के लिए उसे मूढ़ किस्म के लोकप्रिय व्यक्तित्वों की जरूरत है, जो खेल और फिल्म के क्षेत्र में उसे सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं। अनुपम खेर, वीरेन्द्र सहवाग और परेश रावल जैसे लोग ऐसे ही सरकारी हथियार हैं, जो छोटे-मोटे पुरस्कार आदि के बदले सरकार को मिल जाते हैं। 

अभिजीत, सहवाग जैसे कई 'हथियार'

पाकिस्तान में कैद कुलभूषण जाधव को वहाँ की अदालत में फाँसी की सजा सुनाए जाने पर गायक अभिजीत ने ट्वीट किया--"भारत में पाकिस्तानी दिखें तो उनको पेड़ से लटका दो... आपको ऐसे ज्यादातर लोग बॉलीवुड में ही या फिर भट्ट और जौहर के घर में मिल जाएँगे।" अगली ट्वीट में उन्होंने लिखा--"सारे खान चुप क्यों हैं?" इससे पहले अभिजीत ने गजल गायक गुलाम अली के कार्यक्रम पर भारत में पाबंदी के पक्ष में उन्हें भला-बुरा कहते हुए ट्वीट किया था--"कितनी बार भगाया, लेकिन इन बेशर्मों का कोई आत्मसम्मान नहीं है। इनका आतंक के अलावा कोई काम नहीं है, लेकिन हम दूसरे प्रॉस्टीट्यूट के साथ इनका पेट भी भरते हैं।"

इसी तरह दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में हिंसा के खिलाफ बोलने वाली छात्रा गुरमेहर कौर का क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग ने ट्वीट कर मजाक उड़ाया था। इस काम में अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी सहवाग का साथ दिया। रेसलर योगेश्वर दत्त ने भी गुरमेहर पर निशाना साधते हुए हिटलर और लादेन की फोटो पोस्ट की।  

इसी कड़ी में परेश रावल का ट्वीट भी सामने आया जान पड़ता है, जो निश्चित तौर पर कश्मीर के मुद्दे पर देशभक्ति और देशद्रोह की आम समझ को और भी भोथरा करने की साजिश का एक हिस्सा प्रतीत हो रहा है। 

(यह लेखक के निजी विचार हैं। 'जनचौक' का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।)






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manoj kumar :: - 05-28-2017
en sab logo ki vajah se hi gandi politics ki punch khadi ho jati hai...