सहारनपुर शोभायात्रा का सच

विवाद , , रविवार , 23-04-2017


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अदीम राशिद

सहारनपुर का एक गांव सड़क दूधली:

दिनांक 12 अप्रैल,17 को सड़क दूधली गांव के अलावा आसपास के इलाकों के कुछ लोग (इनमें केवल एक दलित, शेष अन्य जाति) थाना जनकपुरी में अंबेडकर शोभायात्रा के लिए परमिशन लेने पहुंचे।

थानेदार ने पूछा कि आप में से दूधली गांव का तो कोई व्यक्ति है नहीं ? इस पर उन लोगों ने कहा कि थाने के बाहर 100-150 आदमी दूधली के ही खड़े हैं।

फिर थानेदार देखने के लिए बाहर आए तो वहां एक भी व्यक्ति नहीं था। इंस्पेक्टर ने ये कहते हुए परमिशन पर रिपोर्ट लगाने से इंकार कर दिया कि आप लोग मुसलमानों और दलितों को आपस में लड़वाना चाहते हैं। 

शांत रहा 14 अप्रैल का दिन

फिर अंबेडकर जयंती का दिन आया, 14 अप्रैल। इस दिन स्थानीय लोगों ने बिना किसी वाद-विवाद के बाबा साहब की जयंती को शोभायात्रा के बिना ही संपन्न कर लिया। उस दिन कोई झगड़ा फसाद नहीं हुआ। 

20 अप्रैल को फिर से शोभायात्रा निकालने की कोशिश

सुबह से ही आसपास के गांव-कस्बे से संघ के लोग शहर में इकट्ठा होने लगे और फिर ट्रैक्टर-ट्राली में ईंट तलवार आदि लेकर लगभग 12 बजे जय श्रीराम के नारे लगाते हुए सड़क दूधली गांव में पहुंच गए। 

उसके बाद प्रदर्शनकारियों और ग्रामीणों के बीच पथराव शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने संपत्ति और वाहनों को अपना निशाना बनाया और मुख्य सड़क पर चलते हुए मुसलमानों के साथ इस उद्देश्य से मारपीट की कि इल्जाम तो दलितों पर ही आएगा।

फिर पीएसी और प्रशासन के दबाव में प्रदर्शनकारी वहां से तितर-बितर हो गए।  

दलित छात्रों ने समझाया

उधर शहर के रविदास छात्रावास में भी अनुसूचित जाति के सैंकड़ों युवक इकट्ठा हो गए। ये सभी युवक ( 3 को छोड़कर ) अपने समाज के लोगों को फोन पर समझाते रहे कि ये सब कुछ संघियों का षड्यंत्र मुसलमानों और दलितों को आपस में लड़ाने के लिए है। ताकि दोनों समाज आपस में पूरे भारत में लड़ते रहें। और उनसे इनके झांसे में नहीं आने की अपील करते रहे। इसके साथ ही सभी युवक अपने लोगों को घटना स्थल पर जाने से रोकते रहे।

बाद में प्रदर्शनकारियों ने एसएसपी आवास पर आकर जमकर तोड़फोड़ की। 
 

(अदीम राशिद सहारनपुर के ही रहने वाले हैं। ये टिप्पणी उनकी फेसबुक वाल से ली गयी है। 'जनचौक' स्वतंत्र तौर पर इस घटनाक्रम की पुष्टि नहीं करता।)






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