पुलिस को नहीं मिली अक्षरधाम हमले के आरोपी अजमेरी की रिमांड

गुजरात , अहमदाबाद, सोमवार , 06-11-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। रविवार को जज पीबी देसाई ने अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की अक्षरधाम हमले के कथित आरोपी अब्दुल रशीद अजमेरी की 14 दिनों की रिमांड की मांग को खारिज कर दिया। और अजमेरी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गुजरात में यह पहला केस होगा जिसमें आतंकवाद जैसे बड़े अपराध में किसी जज ने एक भी दिन का रिमांड देने से मना किया हो। अब्दुल रशीद अजमेरी एक टेलर है जो 1989 से सऊदी अरब में काम कर रहा था। कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो जाने के बाद शनिवार को अजमेरी कुवैत एयरलाइन से अहमदाबाद लौटा था। एयरपोर्ट से बाहर आते ही क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अजमेरी का भाई आदम अजमेरी अक्षरधाम हमले का आरोपी रहा है लेकिन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आदम अजमेरी सहित अन्य 6 आरोपियों को निर्दोष छोड़ दिया था। 

पुलिस के अनुसार अब्दुल रशीद पहले से आरोपी नहीं था बल्कि उसका नामन जांच के दौरान सामने आया था। रशीद ने अपने भाई के बैंक खाते में 2 बार पैसे डाले थे। रशीद ने ही सऊदी अरब में गुजरात दंगों का वीडियो दिखा कर पैसे एकत्र किये थे। पुलिस की तरफ से जज को कहा गया कि पुलिस को जांच करना है कि कहीं रशीद अब भी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोएबा और जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में तो नहीं है।

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि अक्षरधाम केस के सभी 8 आरोपी सुप्रीम कोर्ट से बा-इज्ज़त बरी हो चुके हैं। जिसमें रशीद का भाई आदम भी शामिल है। इसलिए चार्जशीट के आधार पर पूछताछ का प्रश्न ही नहीं खड़ा होता। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जज ने रिमांड देने से मना करते हुए कहा कि जिस आधार पर गिरफ़्तारी की गई है उस आदम अजमेरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्दोष रिहा कर दिया है। 

रिमांड न मंज़ूर होने पर क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रिमांड भले ही न मंज़ूर किया गयो हो लेकिन अदालत से लिखित अनुमति लेकर जेल में पूछ-ताछ करने की अनुमति जरूर मिली है। यूपी एटीएस ने भी रविवार को सऊदी अरब से लौटे अबू ज़ैद को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। अबू ज़ैद आज़मगढ़ का रहने वाला है रियाद में काम करता था। उस पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से आईएसआईएस के लिए भरती का काम कर रहा था। एटीएस यूपी ने मीडिया को बताया कि ज़ैद खिलाफत का विरोध करने वाले तारिक फ़तेह की हत्या का षड़यंत्र कर रहा था। 

विपक्ष के साथ वरिष्ठ पत्रकार भी उठा रहे हैं सवाल

जिस प्रकार से पुलिस ने सूरत से कासिम और उबैद को गिरफ्तार किया था उसके बाद मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले को अहमद पटेल से जोड़ने की कोशिश की थी। शनिवार को अब्दुल रशीद की गिरफ़्तारी और रविवार को अबू ज़ैद की गिरफ़्तारी के बाद भक्त मीडिया ने मामले को खूब बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया और रशीद का रिमांड न मंज़ूर होने की खबर को छिपा दिया। इस पूरी कवायद से पुलिस और प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा हो गया है। विपक्ष ही नहीं वरिष्ठ पत्रकार भी गिरफ़्तारी पर सवाल उठा रहे हैं। 

 










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