गौ-गुंडों के शिकार हुए अयूब मेव की पत्नी ने शुरू की नई ज़िंदगी, देवर के साथ निकाह

अच्छी ख़बर , अहमदाबाद, शुक्रवार , 02-02-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। ग़म के अंधेरे को पीछे छोड़कर अयूब मेव की विधवा ने रोशनी की ओर एक कदम बढ़ाया है। उन्होंने अब अपने बच्चों साथ नई ज़िंदगी शुरू की है। और इसमें साथ दिया है उनके परिवार और समाज ने। जी हां, परिवार और समाज के बड़े-बुजुर्गों की पहल पर अयूब मेव की पत्नी सरीना बानो और देवर आरिफ मेव का निकाह कराया गया है। 

आपको याद होगा कि अहमदाबाद के अयूब मेव को 2016 में कथित गौरक्षकों ने पीट-पीटकर मार डाला था। अयूब मेव एक ड्राईवर थे। उनके दो बच्चे थे। वे पत्नी, मां-बाप और भाई के साथ अहमदाबाद के वटवा में रहते थे। 13 सितंबर, 2016 को अहमदाबाद के आनन्द नगर में खुद को गौरक्षक कहने वाले गुंडों ने उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी थी, जिसके चार दिन बाद उनकी हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। 

अयूब की हत्या के बाद उनकी पत्नी और बच्चे अकेले हो गए थे परन्तु बीती 28 जनवरी को अयूब की पत्नी का विवाह देवर आरिफ मेव (मृतक अयूब के भाई) से हो गया। इससे अयूब के दोनों बच्चों को पिता का साया और पत्नी को जीने का एक सहारा मिल गया है। परिवार में अयूब की कमी तो है लेकिन इस शादी के बाद परिवार फिर संगठित हो गया है। 

शुरू में अयूब की पत्नी सरीना बानो सदमे में होने के कारण शादी के लिए तैयार नहीं थीं। मेव समाज के सेक्रेटरी हबीब मेव बताते हैं कि “हम लोग चाहते थे कि अयूब की पत्नी की शादी अयूब के भाई आरिफ से हो जाये तो बेहतर है, क्योंकि किसी और से शादी के बाद अयूब के बच्चे को वह कितना अपनाता है यह प्रश्न था। इसलिए हम लोग कोशिश कर रहे थे कि दोनों की शादी हो जाये तो यह समस्या हल हो जाएगी। शुरू में दोनों तैयार नहीं थे लेकिन धीरे धीरे दोनों तैयार हो गए और रविवार, 28 जनवरी को निकाह भी हो गया।” 

मौलाना महबूबुर्रहमान कासमी ने बताया “इस्लाम में बेवा से विवाह करने को अच्छा कार्य बताया गया है। पैगम्बर इस्लाम मोहम्मद (स.) ने 25 वर्ष की आयु में 40 वर्षीय हज़रत खदीजा (रजि.) से विवाह किया था जो एक विधवा थीं। अयूब की पत्नी के दो बच्चे हैं। अब इन बच्चों को चाचा के रूप में पिता मिल गया। घर उजड़ने से बच गया। यह विवाह नहीं होता तो बहुत सी समस्याएं पैदा होतीं। इस्लाम में विधवा से शादी करना पुण्य का कार्य है।”

अयूब के परिवार और समाज के लोगों को बस यही अफसोस है कि सरकार ने एक मुस्लिम होने की वजह से अयूब के परिवार से भेदभाव किया और एक रुपये की मदद नहीं दी। उनके मुताबिक देशभर में गाय के नाम पर कई हत्याएं हो चुकी हैं लेकिन ज़्यादातर मामलों में पीड़ित पक्ष को कोई मुआवज़ा नहीं मिला, जबकि यूपी में अख़लाक़ की हत्या के एक आरोपी की जेल में बीमारी से मौत होने पर भी वहां की सरकार और केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा उसके परिवार की लाखों रुपये देकर मदद करते हैं। गुजरात सरकार ने खुद पाटीदार आन्दोलन के समय मारे गए पाटीदारों के परिवारों को लाखों रुपये की सहायता दी। 

हबीब मेव ने कहा कि “गुजरात सरकार ने भले ही मुस्लिम होने के कारण अयूब के परिवार को एक रुपये की मदद नहीं की, लेकिन समाज के लोग परिवार के साथ खड़े रहे। जमीअत उलेमा हिन्द, कच्छ मुस्लिम समाज और पार्षद तौफिक खान ने परिवार को आर्थिक सहायता दी। पूर्व विधायक साबीर काबलीवाला ने दो सेकंड हैंड ऑटो रिक्शा देकर मदद की। सबसे बड़ी मदद हैदराबाद स्थित सियासत अख़बार के एडिटर जाहिद अली खान के माध्यम से हुई। सियासत अख़बार के ज़हीरुद्दीन अली खान ने अहमदाबाद स्थित इंसाफ फाउंडेशन के तल्हा खान और कलीम सिद्दीकी से संपर्क कर अयूब के परिवार और हमलोगों से बात कर अख़बार के माध्यम से परिवार की मदद की अपील की। जिसके बाद देश ही नहीं विदेशों से भी अयूब की पत्नी और मां के खाते में लोगों ने पैसे जमा कराए। 

भेदभाव मात्र गुजरात सरकार ने नहीं बल्कि अन्य राजनैतिक दलों ने भी किया। कांग्रेस, बीएसपी या आम आदमी पार्टी भी अयूब के परिवार की मदद को आगे नहीं आई। 

विवाह के बाद आरिफ मेव ने बताया कि हम लोग भाई के मौत के बाद किसी के पास आर्थिक मदद के लिए नहीं गए थे। फिर भी कुछ लोगों ने आगे आकर मदद की।

सरकार द्वारा मदद पर पूछे जाने पर आरिफ ने बताया कि दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने सरकारी अधिकारियों से मुआवज़े के लिए बात की थी परन्तु सरकार की तरफ से कोई नहीं आया। ऊना वाले आये थे तो केवल सिंह राठोड़ ने मुख्यमंत्री से फोन पर बात की थी, उन्होंने कुछ करने का आश्वासन दिया था लेकिन फिर सरकार द्वारा कुछ नहीं किया गया। 

आरिफ ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने आर्थिक सहायता करने तथा परिवार को सदमे से निकलने में मदद की।










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Ahmad Imam :: - 02-02-2018
यह एक बहुत बड़ा और अच्छा काम हुआ है और यह वक्त का तकाजा है कि हर एक मुसलमान पुरे के पुरे इस्लाम में दाखिल हो जाए। ताकि अल्लाह रबुलइज्जत की रहमत हम तमाम मुसलमान पर बरसे और हमारा पालनहार हम से राजी हो जाए। आमीन।

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