आदिवासियों ने प्रशासन के बाद पत्रकारों की भी ली क्लास, पत्रकार भवन का शिलान्यास रुकवाया

ख़ास ख़बर , बस्तर, छत्तीसगढ़, मंगलवार , 17-10-2017


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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर। श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ तोकापाल के भवन के लिए भूमि पूजन शिलान्यास का कार्यक्रम ग्राम सभा के विरोध के बाद नहीं हो पाया। ग्राम सभा ने इस कार्य को अवैध और असंवैधानिक करार देते हुए तहसीलदार को इसे रोकने के निर्देश दिए जिसके बाद विभागीय कर्मचारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से इसे रोक दिया।  

सक्रिय हो रही हैं ग्राम सभा

आपको बता दें कि बस्तर संभाग में पारंपरिक ग्राम सभा तेज़ी से सक्रिय हो रही हैं। यह ग्राम सभा संविधान के तहत मिले अपने विशेषाधिकारों को लेकर काफी जागरूक है और उसका खुलकर प्रयोग कर रही हैं, यही वजह है कि कभी प्रशासन और कभी कुछ पत्रकारों से भी उनका टकराव हो रहा है।

 

  • संविधान के तहत पारंपरिक ग्राम सभा को विशेषाधिकार
  • प्रशासन और बहुत से पत्रकारों तक को जानकारी नहीं 
  • नजूल की भूमि पर हर कार्य के लिए ग्राम सभा की अनुमति ज़रूरी
  •  

"असंवैधानिक था शिलान्यास"

यह शिलान्यास 15 अक्टूबर को अनुसूचित क्षेत्र बस्तर संभाग अंतर्गत ग्राम परपा तहसील तोकापाल में किया जाने वाला था। कहा गया कि यह भूमि प्रशासन ने आबंटित की है। लेकिन ग्रामीणों ने संविधान की पांचवी अनुसूची 19(5),19(6), 244(1) 13(3) क के अनुसार ग्राम सभा कर  इसे असंवैधानिक करार दिया।

मंत्री और नेताओं को होना था शामिल

बताया जा राह है कि शिलान्यास कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री केदार कश्यप के साथ-साथ भाजपा के बस्तर सांसद दिनेश कश्यप व अन्य मंत्री गण शामिल होने वाले थे, वहीं श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल होने थे लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद आधे से ज्यादा पधाधिकारी रास्ते से ही लौट गए। वहीं भाजपा मंत्रीगण आए तो लेकिन शिलान्यास कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। 

परपा की ग्राम सभा का प्रस्ताव। फोटो : तामेश्वर सिन्हा

ग्राम सभा का प्रस्ताव

ग्राम परपा में ग्राम सभा के प्रस्ताव में कहा गया कि गैर अनुसूचित व्यक्ति, संस्था, संगठन के द्वारा संवैधानिक पारम्परिक ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत परपा की बिना सहमति/अनुमति प्रस्ताव प्राप्त किये कोई निर्माण नहीं हो सकता।

कहा गया कि गाँधी चौक के पास हाईस्कूल के सामने पारम्परिक ग्राम सभा की जमीन को असंवैधानिक तरीके से अतिक्रमण कर भारत के संविधान के अनुच्छेद 244 (1), 19(5), 19(6) 13(3) क पांचवी अनुसूची का पैरा 5 एवं अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम 1996 का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

कानूनी कार्रवाई का भी प्रस्ताव पास

ग्राम सभा के प्रस्ताव में उल्लेख है कि पारम्परिक ग्राम सभा परपा इनके खिलाफ संविधान का उल्लंघन और अनिष्ठा करने के तहत आईपीसी की धारा 124 A के तहत तथा विधिक क़ानूनी कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित करती है और राजस्व अधिकारियों को निर्देश जारी करती है कि गांव में गैर अनुसूचित व्यक्ति संस्था को पारंपरिक ग्रामसभा की बिना अनुमति के किसी भी प्रकार की निर्माण पर कार्रवाई कर रोक लगाए।

 

  • हर अवैध कब्ज़े और अतिक्रमण के खिलाफ आदिवासी सक्रिय
  • संविधान के तहत जल-जंगल-ज़मीन बचाने की लड़ाई
  • पारंपरिक ग्राम सभा ले रही है कड़े फैसले

 

"न लोकसभा, न विधानसभा, सबसे बड़ी ग्राम सभा"

दरअसल जैसे ही ग्रामीणों को इस अतिक्रमण की जानकारी मिली वैसे ही परपा के मांझी मुखिया माटी पुजारी सिरहा टोटम मुकवान, महिलाएं व बच्चे भी इस कार्य को रोकने के लिये गांव की जलनी माटी याया (ग्राम प्रमुख देव) की गुड़ी में जमा होने लगे। माता गुड़ी में ही माटी की सेवा अर्जी कर माटी पुजारी की अध्यक्षता में सभी कोयतुर व ग्रामीणों ने इस निर्माण को असंवैधानिक कार्य बताते हुए इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।

बस्तर के ग्राम परपा में हुई ग्राम सभा। फोटो : तामेश्वर सिन्हा

इसके बाद ग्रामीणों ने रैली की शक्ल में उक्त स्थल की ओर जाकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण लोकसभा ना विधानसभा, सबसे ऊंची ग्रामसभा, जय बस्तर-जय संविधान की नारे लगा रहे थे। इसके बाद तहसीलदार तोकापाल को मौके पर तलब कर पारम्परिक ग्रामसभा का प्रस्ताव दिया गया, जिसपर तहसीलदार ने कार्यवाही की।

ग्राम सभा की अनुमति ज़रूरी

ग्राम परपा में ग्राम सभा के प्रस्ताव में कहा गया कि अनुसूचित ग्राम परपा के आधीन पारम्परिक ग्राम सभा की जमीन अर्थात समस्त नजूल भूमि  पर सार्वजनिक उपयोग सरकारी निर्माण हेतु भूमि चयन अधिग्रहण पारंपरिक ग्राम सभा के निर्णय के उपरान्त ही किया जाए तथा गैर अनुसूचित व्यक्ति, परिवार, संस्था, संगठन के द्वारा अतिक्रमण भूमि को शून्य घोषित करते हुए भविष्य में पूरी तरह रोक लगाई जाए। इस हेतु प्रस्ताव पारित कर कार्यवाही के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को निर्देशित किया जाता है।

तहसीलदार से मुलाकात करते ग्रामीण।  फोटो : तामेश्वर सिन्हा

जमीन आबंटन की प्रक्रिया नहीं- तहसीलदार

तोकापाल तहसीलदार नेहा भेड़िया ने कहा की शिलान्यास का कार्यक्रम तो था लेकिन तहसील से किसी भी प्रकार का जमीन से सम्बन्धित पत्र व्यवहार नहीं किया गया था और न ही जमीन आबंटन की प्रक्रिया की गई है। जहां तक उन्हें जानकारी है पंचायत को संघ द्वारा आवेदन देकर पत्रकार भवन का शिलान्यास किया जा रहा था।

तहसीलदार ने कहा की वह आबादी जमीन है जो ग्राम जमीन में आती है जिसके लिए ग्राम सभा का प्रस्ताव अनिवार्य है। यह शिलान्यास भारत के संविधान व अनुसूचित क्षेत्र के तहत अवैध है।

ग्राम सभाएं लगातार सुर्खियों में

बस्तर संभाग बस्तर जिले के जगदलपुर तहसील का ग्राम कवापाल हाल ही में सुर्खियों में आया जहा 56 ग्रामीणों को जेल में डाल दिया गया था। ग्रामीणों पर आरोप था कि उन्होंने सड़क निर्माण के लिए पेड़ काटे, आजादी के 70 सालों बाद भी जिला मुख्यालय से 30 किमी दूरी पर स्थित कावापाल मूलभूत सुविधाओं सड़क, बिजली, पेयजल का मोहताज है, जबकि पारम्परिक ग्राम सभा कावापाल ने प्रशासन को मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था हेतु बकायदा संवैधानिक प्रस्ताव पास कर भेजे थे  लेकिन वहीं दूसरी ओर परपा ग्राम में बिना ग्राम सभा के अनुमति के पत्रकार भवन के निर्माण  के लिए शिलान्यास किया जा रहा था। 

सवाल यह है की शिलान्यस कार्यक्रम में सत्ता के नेता शामिल होने वाले थे क्या उनको कावापाल की बदहाली नजर नहीं आती है? और इधर असंवैधानिक निर्माण हेतु जमीन अतिक्रमण में बढ़चढ़ कर भागीदारी कर रहे हैं।

मंत्री जी का उद्घाटन भी असंवैधानिक!

आप को बता दे कि उत्तर बस्तर कांकेर जिले अंतर्गत ग्राम साल्हेभाठ में नवनिर्मित महाविद्यालय भवन के उद्घाटन को ग्राम वासियों ने असंवैधानिक करार दिया था। ग्रामवासियों का कहना था था ग्राम की जमीन में महाविद्यालय  का निर्माण हुआ है लेकिन इसके लोकार्पण की सूचना पारम्परिक ग्रामसभा व ग्रामीणों को ही नहीं दी गई। ग्रामसभा ने कहा कि गांव के महाविद्यालय भवन का उद्घाटन कोई मंत्री क्यों करेगा? उच्च शिक्षा मंत्री के उद्घाटन को असंवैधानिक करार देकर ग्राम सभा ने ग्राम प्रमुखों से दोबारा उद्घाटन कराया था। यही नहीं ग्राम सभा ने बिना अनुमति के उद्घाटन कराने पर प्रशासन के ऊपर जुर्माना भी लगाया था।  

पिछले दिनों अफसरों को पढ़ाया था संविधान

आपको बता दें कि बस्तर संभाग अनुसूचित क्षेत्र अंतर्गत आता है जहां संविधान की पांचवी अनुसूची लागू है, लेकिन प्रशासन भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची तथा अनुच्छेद 244 (1) की जानकारी के अभाव में इसका पालन कराने में असमर्थ साबित हो रहा है। हाल ही में आदिवासी समाज द्वारा संविधान की पांचवी अनुसूची को लागू कराने को लेकर सड़क की लड़ाई लड़ी गई थी तथा बस्तर सम्भाग आयुक्त रेंज आईजी व 7 जिलों के कलेक्टर व एसपी को सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के पदाधिकारियों ने 6 घण्टे की मैराथन बैठक लेकर पांचवीं अनुसूची संविधान का पाठ पढ़ाकर पालन करने की नसीहत दी थी। इसके साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि यदि प्रशासन इसका उल्लंघन करता है तो आईपीसी 124 सेक्शन के तहत राजद्रोह का मामला दर्ज कराया जाएगा। आदिवासी समाज ने अधिकारियों से अनुच्छेद147 के तहत गवर्मेन्ट ऑफ इंडिया सर्विस कोड की पालन करने को कहा है।  यही नहीं अब ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा का विस्तार हो रहा है। चाहे वो एन एम डी सी द्वारा पाइप लाइन बिछाने को लेकर ग्राम सभा हो, या विकास के मुद्दों को लेकर ग्राम सभा। इसके प्रस्ताव को ही  ग्रामीण सबसे मजबूत मानते हैं। भारत के संविधान के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने भी वेदांता के फैसला में  कहा है कि न लोकसभा, न विधानसभा सबसे ऊँची पारम्परिक ग्राम सभा। 

बस्तर में यह भी देखने को मिल रहा है कि संविधान का पालन कराने में बस्तर के आदिवासी आगे है वो संविधान की सेवा अर्जी (पूजते) हैं। मावली भाटा व सालेभाट में भी संविधान की सेवा अर्जी करते हैं। कोयतुर गणतंत्र के जनक भी अपने पुरखों की व्यवस्था को ही मानते हैं।

(लेखक युवा पत्रकार हैं और पत्रकारिता के माध्यम से समाजसेवा का उद्देश्य लेकर चल रहे हैं।) 

 










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pradeep uikey :: - 10-23-2017
parsiahe

Machindra bhil :: - 10-21-2017

arjun minz :: - 10-20-2017
Gaon ke sath shhari chhetro me aadivasi ko bhi jagrup karne ki jarurat hai kyoki shahri chhetro ke aadivasi shhar ko gair smajhte hai balki hai aadivasi jmin me gair swedhanik tarike se

Agapit Ekka :: - 10-17-2017
आदिवासियों को जागृत करना बेहद जरूरी है। जागरूकता के अभाव में वे इस देश के 'मालिक' होने पर भी जिल्लत भरा जीवन जीने को विवश किये जा रहे थे। किंतु अब और नहीं। आपकी धारदार और तथ्यपरक लेख लोगों का मार्गदर्शन जरूर करेगी।

?? ???? ????? :: - 10-17-2017
भारतीय आदिवासियों की संस्कृति और सभ्यता को संरक्षित किया जाय

?? ???? ????? :: - 10-17-2017
भहरत के मूलनिवासी आदिवासी यानी भारतवासी लोगों को भारतीय संविधान में प्रदत्त मूलभूत अधिकारों के संरक्षण एवं प्राप्ति हेतु एकजुट होकर क्रियान्वयन करने के लिए आदिवासी समुदाय को सतत संघर्ष करना समय की पुकार है

?? ???? ????? :: - 10-17-2017
आदिवासियों को ऐतिहासिक क्षतिपूर्ति के तहत समुचित प्रतिनिधित्व और अधिकार दिए जाएं

R K Dhruw :: - 10-17-2017
Good action. Jai adiwasi. Jai sanvidhan. Lekhak ka social work sarahniya hai. Kotisah naman. Jai sewa 🙏

R K Dhruw :: - 10-17-2017
Good action. Jai adiwasi. Jai sanvidhan. Lekhak ka social work sarahniya hai. Kotisah naman. Jai sewa 🙏

?? ???? ????? :: - 10-17-2017
भहरत के मूलनिवासी आदिवासी यानी भारतवासी लोगों को भारतीय संविधान में प्रदत्त मूलभूत अधिकारों के संरक्षण एवं प्राप्ति हेतु एकजुट होकर क्रियान्वयन करने के लिए आदिवासी समुदाय को सतत संघर्ष करना समय की पुकार है

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भहरत के मूलनिवासी आदिवासी यानी भारतवासी लोगों को भारतीय संविधान में प्रदत्त मूलभूत अधिकारों के संरक्षण एवं प्राप्ति हेतु एकजुट होकर क्रियान्वयन करने के लिए आदिवासी समुदाय को सतत संघर्ष करना समय की पुकार है

Dhansai netam :: - 10-17-2017
महत्वपूर्ण व सही प्रतिक्रिया लेखक को कोटि कोटि शुभकामनाएँ

Dhansai netam :: - 10-17-2017
महत्वपूर्ण व सही प्रतिक्रिया लेखक को कोटि कोटि शुभकामनाएँ

SRGawde Narayanpur :: - 10-17-2017
Good action.I agree with you n go ahead.