अनर्थ : पुलिस ने नक्सली कोसी सोढ़ी के नाम पर आम आदिवासी महिला पोडियम जोगी को मार गिराया?

बड़ी ख़बर , बस्तर, रविवार , 24-12-2017


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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर। पुलिस पर नक्सलियों के नाम पर आम आदिवासी ग्रामीणों को फर्जी मुठभेड़ में मारने का एक बार फिर आरोप लगा है। आरोप है कि बीजापुर में पुलिस द्वारा नक्सली नेता पापाराव की सहयोगी कोसी सोढ़ी बताकार मुठभेड़ में मारी गई महिला एक आम आदिवासी महिला थी। महिला के पिता ने सरकार से न्याय की मांग की है।

आदिवासियों का कहना है कि बस्तर के जंगलों में दिखने वाला हर शख्स पुलिस और सुरक्षाबलों को नक्सली नजर आता है। उनका कहना है कि जंगल के रखवाले आदिवासी जंगल में नहीं दिखेंगे तो फिर कहां दिखेंगे! 

आदिवासियों के मुताबिक वे सबके लिए साफ्ट टारगेट हैं और एक-एक कर मौत के मुंह में समा रहे हैं। पुलिस और सुरक्षाबलों को यह भी नहीं मालूम रहता कि जिसे वो खूंखार, वारंटी बता रहे हैं उसका नाम क्या है? बस उसे मारना मूल उद्देश्य रह जाता है।

मुठभेड़ में मारी गई पोडियम जोगी।


हाल ही में 15 दिसंबर को पुलिस ने कोसी सोढ़ी को नक्सली बताकर मारने का दावा किया था जबकि मरने वाली महिला जारपल्ली गांव की पोडियम जोगी थी।


सोनी सोरी गांव पहुंची

इस घटना की पूरी जानकारी लेने आदिवासी नेत्री सोनी सोरी, लिंगा कोडोपी, पत्रकार पुष्पा रोकड़े, नितिन रोकड़े और उसूर ब्लाक अध्यक्ष पुनेम जारपल्ली गाँव पहुंचे। उनके मुताबिक पूरा घटनाक्रम चौंकाने वाला है। 

पत्रकार पुष्पा रोकड़े बताती हैं कि जिला मुख्यालय के उसूर ब्लाक के जारपल्ली गाँव की एक महिला जिसे पुलिस ने मुठभेड़ में मार कर नक्सली बताया था उसके बारे में गांव के लोगों ने बताया कि मारी गई महिला का नाम पोडियम जोगी है। जबकि पुलिस ने प्रेस रिलीज में उसका नाम इनामी और पापा राव की गनमैन के नाम पर कोसी सोढ़ी बताया है।

रिश्तेदार के घर आई थी जोगी 

गाँव वालों ने बताया कि 15 दिसबंर 2017 को मड़ावी आयते नामक रिश्तेदार के घर पोडियम जोगी आई थी। जब वह सुबह 9 बजे अपने घर जाने के लिया हाथ में झोला लिए जा रही थी उसी समय रास्ते में उसे पुलिस ने घेर लिया। इसपर डरकर पोडियम जोगी दौड़ने लगी। लगभग 500 मीटर दौड़ने के बाद एक घर में अन्दर जैसे ही पोडियम जोगी जा ही रही थी कि उस पर सुरक्षाबल के जवानों ने गोली चला दी। पोडियम जोगी घायल होके फिर भागने लगी। भागते हुए एक घर की बाड़ी में जा पहुंची जहां उसे मौत के घाट उतार दिया गया। गोली की आवाज से आसपास के घरों से जब लोग बाहर आए तो देखा जवानों ने एक महिला को जल्दी-जल्दी प्लास्टिक में लपेट लिया है। शव ले जाने के लिए गाँव के चार लड़कों से मारपीट भी की गई। गाँव के चार लड़के शव को चारपाई में पामेड थाना ले गए। चंद घंटो के बाद गाँव की महिलाएं एकजुट होकर पामेड थाने पहुंची। 

'शव मांगने पर भी पीटा'

सोनी सोरी को गाँव वालों ने बताया कि जब महिलाएं पोडियम जोगी का शव मांगने लगीं तो उन्हें मारा पीटा गया। उन्हें कभी सुकमा जाने को तो कभी बीजापुर जाने की बात कही गई। गाँव की महिलाएं वापस लौट गई लेकिन पोडियम जोगी का शव लेकर जो लड़के गए थे उन्हें नही छोड़ा गया। अगले दिन 16 दिसंबर को उन लड़कों को छोड़ा गया। लड़कों ने गाँव आकर बताया कि पोडियम जोगी का शव बीजापुर में है, तब गाँव वाले 16 को ही बीजापुर शव लेने गए जहां उन्हें 17 दिसंबर को पोडियम जोगी का शव दिया गया। 

पोडियम जोगी के गांव पहुंची आदिवासी महिला नेता सोनी सोरी।


सोनी सोरी ने बताया कि गाँव वाले पोडियम जोगी का शव गाँव वापस लाने का बाद बिना अंतिम संस्कार किए श्मशान में 20 तारीख तक रखे हुए थे। जहां गावं के लड़के शव को जानवरों से बचाने के लिए रात-दिन पहरा देते थे। 20 दिसंबर को देर रात सोनी सोरी जारपल्ली गाँव पहुंची और 21 तारीख की शाम तक पोडियम जोगी का अंतिम संस्कार किया गया।


सोनी सोरी ने बताया कि न्याय की मांग लेकर गाँव वाले 6 दिन तक पोडियम जोगी का शव रखे हुए थे। उनका अंतिम संस्कार भी आदिवासी रीतिरिवाज से नहीं किया गया है। न्याय की आस में पिता पोडियम दुल ने शव को जमीन में दफना दिया।

 

पोडियम जोगी के पिता ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उनकी बेटी के लिए न्याय हो क्योंकि वही घर की इकलौती कमाने वाली थी। वही पिता, भाई और पूरे घर का भरण-पोषण करती थी, लेकिन नक्सली बता कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। 


पुलिस के दावे झूठे?

पत्रकार पुष्पा रोकड़े कहती हैं कि पुलिस जिसे जंगल में मारना बता रही है, उसे पूरे गाँव में दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया है। यही नहीं पूरे गांव में कई महिलाओं और लड़कों से मारपीट भी की गई है। जिस बाड़ी में पोडियम जोगी को मारा गया वहां अभी तक खाली खोखे मौजूद थे। इस पूरी घटना से ग्रामीण अभी भी सदमे में हैं। 

पत्रकार पुष्पा रोकड़े बताती हैं कि गाँव में मड़ावी नन्दा, तेलम हुगा, हडमा मदकांम, सतीश पोयम, देवा कुंजाम, हिरमा आदि ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई है। 

आंदोलन की चेतावनी

सोनी सोरी के मुताबिक किसी और की मौत एक निरीह महिला को मिली। सोनी बताती हैं कि उन्हें औपचारिक तौर पर गाँव बुलाया गया था। ग्रामीणों में सरकार को लेकर काफी गुस्सा है। इसी गुस्से को जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों को नक्सली बताकर एक-एक कर मार रही है, इससे अच्छा है कि सबको एक साथ मार दे। उन्होंने कहा कि इसको लेकर आन्दोलन किया जाएगा। 










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Narsingh :: - 12-25-2017
तकलीफ देह , जलता बस्तर

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