दुकानदार नहीं ले रहे सिक्के, भिखारियों के सामने भुखमरी का संकट!

एक नज़र इधर भी , कोडरमा, झारखंड, मंगलवार , 28-11-2017


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विशद कुमार

कोडरमा। झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित कोडरमा में पिछले रविवार को एक अनूठा नजारा देखने को मिला। कोडरमा शहर में भिखारियों ने जुलूस निकाल कर केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए, बाजार में दुकानदारों द्वारा सिक्के नहीं लिए जाने पर सरकार की आलोचना की। जुलूस के साथ चल रहे एक वाहन पर लगे लाउडस्पीकर से अपनी मांगों के बारे में भी बताया। 

 

  • एक नज़र इधर भी
  • भीख मांगकर भी गुज़र नहीं, बाज़ार में नहीं चल रहे सिक्के
  • भिखारियों ने जुलूस निकालकर विरोध जताया
  • सरकार से इस ओर ध्यान देने की मांग

जुलूस में शामिल करीब एक दर्जन भिखारियों ने बाजार में अघोषित रूप से सिक्कों के चलन को बंद करने का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की वजह से ही बाजार में दुकानदारों ने सिक्का लेना बंद कर दिया है। इस कारण भीख मांगकर जीवन यापन करने वाले लोगों के समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है। 

उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि भीख में नोट नहीं मिलते,  सिक्के ही मिलते हैं और बाजार में दुकानदार सिक्का लेकर सामान देने से मना कर देते हैं। ऐसे में उनके लिए विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। दिन भर घूम-घूमकर भीख मांगते हैं और जो पैसे मिलते हैं, उससे वह खाने-पीने का कोई सामान भी नहीं खरीद पाते। इन लोगों ने कहा कि भिखारियों को इस समस्या से निजात दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि भिखारियों के लिए विशेष कैंप लगाया जाये और उसमें उनसे सिक्के लेकर उसे नोट में बदला जाये। यदि सरकार भिखारियों के लिए इतना भी नहीं करेगी, तो सरकार के होने का क्या फायदा। हर नेता गरीब-गुरबा की बात करता है, लेकिन सबसे गरीब लोग, जो भीख मांगकर जीवन बसर कर रहे हैं, उनकी समस्या के बारे के समाधान की कोई बात नहीं करता। ऐसी सरकार का क्या फायदा।

हमारे देश में भीख मांगना हालांकि अपराध है, लेकिन फिर भी मानवीय स्तर पर भिखारियों की इस समस्या की ओर ध्यान दिया ही जाना चाहिए। भिखारियों से जुड़े एक मामले में जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए 2009 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी कहा था कि ग़रीबी कोई अपराध नहीं है इसलिए भिखारियों को ज़बरदस्ती राजधानी दिल्ली से बाहर नहीं भगाया जा सकता। अदालत के अनुसार ऐसा करना मानवता के ख़िलाफ़ अपराध है। 

वैसे अच्छा हो कि सरकार और आरबीआई सिक्कों को लेकर साफ-साफ अपनी गाइड लाइन जारी करे और इससे भी बेहतर है कि सरकार भिखारियों के पुनर्वास और रोज़गार की कोई व्यवस्था करे, ताकि किसी को भीख न मांगनी पड़े। 






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