बिहार के सीतामढ़ी में पुलिस का बर्बर चेहरा आया सामने, हिरासत में दो मुस्लिम युवकों की पीट-पीट कर हत्या

बिहार , , सोमवार , 11-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

पटना। सीतामढ़ी के डुमरा पुलिस हाजत में दो मुस्लिम युवकों की बर्बर तरीके से हुई पिटाई के कारण मौत हो गई। बिहार में कानून नहीं, बल्कि पुलिस का राज चल रहा है। भाजपा द्वारा पूरे देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा का जो माहौल बनाया गया है, उसी का नतीजा है कि उन्हें कहीं मॉब लिंचिंग का शिकार होना पड़ रहा है तो कहीं हाजत में ही हत्या कर दी जा रही है। आज बिहार में अपराध व हत्याएं आम बात हो गई हैं, तमाम कानूनी प्रक्रियाओं को अब प्रशासन व पुलिस ने ही किनारे लगा दिया है। पूरे सूबे में पुलिस व अपराधियों का आतंक राज चल रहा है। भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता रामेश्वर प्रसाद ने पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में उक्त बातें कहीं। इंसाफ मंच के नेता कयामुद्दीन अंसारी ने बताया कि-

पूर्वी चंपारण के चकिया थाना के रमडीहा गांव से विगत 5 मार्च की रात्रि में चकिया और सीतामढ़ी के डुमरा थाने की पुलिस ने दो मुस्लिम युवकों की हिरासत में लिय़ा था। और पुलिस हिरासत में ही दोनों युवकों की मौत हो गई। मौत की घटना की जांच करने 9 मार्च को भाकपा-माले की जांच टीम रमडीहा गांव पहुंची। इस जांच टीम में पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद और इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष आफताब आलम के अलावा कई दूसरे लोग भी शामिल थे। जांच टीम ने रमडीहा में मृतक परिजनों व ग्रामीणों से बातचीत की। जांच-पड़ताल से यह बात सामने आई कि तसलीम व गुरफान की पुलिस हाजत में हत्या की गई। 5 मार्च की आधी रात को दर्जनों पुलिस जवान दरवाजा तोड़कर घर में घुसे। दोनों को पकड़कर पीटा और फिर थाने में भी उनकी बर्बरता से पिटाई की गई। दोनों युवकों की हत्या में भाजपा-जदयू के बड़े नेताओं के हाथ होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

जांच टीम सबसे पहले मृतक तसलीम अंसारी, उम्र  - 32 वर्ष, पिता-मोलाजिम अंसारी के घर पहुंची। मृतक तसलीम अंसारी के परिजन, ग्रामीण तनवीर अहमद, पूर्व मुखिया चंदेश्वर सिंह सहित सैंकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि 5 मार्च की रात करीब 1 बजे चकिया थाने के इंस्पेक्टर संजय कुमार के नेतृत्व में 20-25 पुलिसकर्मियों ने घर का दरवाजा खटखटाया और कहा कि तसलीम से मिलना है। तसलीम घर पर नहीं थे। वे मदरसा में सोए हुए हैं। वे मदरसा के चैकीदार थे। इसके बावजूद पुलिस दरवाजा तोड़कर घर में घुस गई और तलाशी लेने लगी। घर से 3 मोबाइल पुलिस ने उठा लिया। फिर वह मदरसा गई और वहां भी तोड़-फोड़ कर मदरसे के अंदर दाखिल हो गई और तसलीम को उठा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि उस पर कुछ मुकदमे अवश्य थे। वह अरब जाने के लिए पासपोर्ट भी बना चुका था और होली के बाद वहां जाने वाला था। उक्त बातों की पुष्टि ग्रामीणों ने भी की। 

सुबह तसलीम के घर वाले चकिया थाना पहुंचे लेकिन उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया। दूसरे स्रोत से पता चला कि तसलीम को सीतामढ़ी के डुमरा थाने की पुलिस रात में ही लेकर चली गई है। 6 मार्च की दोपहर में जब ये लोग डुमरा पहुंचे तो थाने पर महज 2-3 महिला पुलिसकर्मी थीं। जिनसे कोई जानकारी नहीं मिली। जब ये लोग सदर अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि यहीं पर दोनों युवक हैं और इलाज चल रहा है। अस्पताल में 20-25 पुलिसकर्मी तैनात थे लेकिन अंदर किसी को नहीं जाने दे रहे थे। बाद में डुमरा थानाध्यक्ष द्वारा बताया गया कि दोनों की मौत हो गई है और पोस्टमार्टम के बाद लाश मिलेगी। यह सब मीडिया वालों को भी खबर मिल गई और वे लोग पहुंचने लगे। वरीय पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचने लगे और डीएसपी, एसपी और आईजी की उपस्थिति में परिजनों के बयान दर्ज कराए गए।

उसी रात गांव के दूसरे टोले से पुलिस ने 27 वर्षीय गुरफान को उठा लिया। गुरफान पहले अरब में रहते थे और विगत 4 महीने से गांव में रह रहे थे। उन पर कोई मुकदमा भी नहीं था। फिर भी पुलिस ने उन्हें उठा लिया। रात में गिरफ्तार कर उन्हें अज्ञात स्थान पर रखा गया। पुलिस ने यह कहकर उठाया कि उनसे कुछ पूछताछ करनी है। बार-बार प्रयास के बावजूद पुलिस ने परिजनों को गिरफ्तारी के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं दी। 

गुरफान के चाचा सनौवर आलम ने रात में ही थाने पर जाकर मालूम करना चाहा लेकिन उन्हें कुछ भी पता नहीं चला। बाद में इंस्पेक्टर के करीबी पप्पू कुशवाहा से मिलकर मामले की जानकारी लेनी चाही। क्योंकि उन्हें शक था कि पप्पू को सब कुछ पता है। पहले तो पप्पू ने कुछ नहीं बताया, कहा कि मामले की तहकीकात करते हैं। 12 बजे के लगभग गुरफान के चाचा सनौवर आलम को बताया कि उनका भतीजा डुमरा थाना-सीतामढ़ी में पुलिस हिरासत में है। वहां जाने पर लोगों को बताया गया कि दोनों युवक अब सदर अस्पताल में हैं। वहां पहुंचने पर पता चला कि दोनों युवकों की मृत्यु हो चुकी है। डीएसपी, एसपी और आईजी की उपस्थिति में मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज कराए गए और फिर लाश का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डेड बॉडी देखने से साफ-साफ पता चलता है कि दोनों युवकों की पीट-पीट कर बेदर्दी से हत्या की गई। उनके पैरों में कील ठोकने की निशानें थीं और शरीर जगह-जगह से जला हुआ भी था। 

सीतामढ़ी के रून्नी सैदपुर में कुछ दिन पहले मोटरसाइकिल लूट कांड हुआ था, पुलिस का कहना है कि उसी मामले में वह दोनों युवकों से पूछताछ करने ले गई थी। लेकिन उन दोनों की हत्या कैसे और क्यों हुई, इसका कोई जवाब पुलिस के पास नहीं है। इस मामले में चकिया, डुमरा व रून्नी सैदपुर के थानों और पप्पू कुशवाहा जैसे जदयू के स्थानीय नेताओं की मिलीभगत स्पष्ट रूप से दिखती है। एक जिले से दूसरे जिले के थाने में भेजने के बावजूद कहीं भी किसी भी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसपर पूर्वी चंपारण के एसपी का बयान है कि वे इस मामले में क्या कर सकते हैं। इसके पहले भी सीतामढ़ी के रून्नी सैदपुर के हाजत में माले नेता अशोक साह की हत्या कर दी गई थी। हाजत में हत्या के मामले में सीतामढ़ी के थाने पहले ही बदनाम रहे हैं। लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह बिहार में तथाकथित सुशासन का असली चेहरा है।

दबाव में डुमरा थाना प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मियों पर मुकमदा दर्ज हुआ है लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से ये लोग रून्नी सैदपुर में समर्पण करने गए, जहां उन्हें भगा दिया गया। इस मामले में रून्नी सैदपुर के थाना प्रभारी को भी सस्पेंड किया गया है लेकिन यह बहुत अपर्याप्त कार्रवाई है। इस मामले में बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

स्थानीय सांसद, विधायक, मुखिया तीनों भाजपा से है, लेकिन इनमें कोई भी पीड़ितों का हाल जानने तक नहीं आए। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त मोटरसाइकिल लूट कांड में 10 लोगों को पुलिस ने पकड़ा था जिसमें यही दो मुस्लिम थे। ऐसा लगता है कि पुलिस ने पूरी तरह सांप्रदायिक भावना से ग्रसित होकर काम किया और मुस्लिम युवकों की सचेत हत्या कर दी।इस जघन्य अपराध के खिलाफ भाकपा-माले व इंसाफ मंच ने आगामी 12 मार्च को पूरे बिहार में प्रतिवाद मार्च आयोजित करने का निश्चय किया है।

भाकपा-माले की जांच टीम मांग करती है -

1. पूरी घटना की सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने के लिए मामले की न्यायिक जांच कराई जाए।

2. घटना की लीपापोती की नियत से विसरा जांच की बात हो रही है लेकिन पोस्टमार्टम से स्पष्ट है कि दोनों युवकों की मौत निर्मम पिटाई की वजह से हुई है। इसके जख्म पूरे शरीर पर पाए गए। जांच प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिशों व साजिशों पर रोक लगाई जाए।

3. चकिया थाना प्रभारी अन्य दोनों थाना प्रभारियों व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

4. गैरजिम्मेवाराना बयान देने के लिए पूर्वी चंपारण व सीतामढ़ी के एसपी को बर्खास्त किया जाए।

5. मृतक परिजन को 25-25 लाख का मुआवजा दिया जाए तथा दोनों परिवारों में एक-एक सरकारी नौकरी दी जाए।

6. मोटरसाइकिल लूट कांड में मारे गए मोटरसाइकिल सवार के परिजन को भी मुआवजा व नौकरी दी जाए।

7. नैतिकता के आधार पर बिहार के मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।


 

 










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