बीजेपी दलित सांसद ने पीएम को लिखा पत्र, कहा-डीएम, एसपी सुनते नहीं, सीएम ने डांट कर भगा दिया

उत्तर प्रदेश , , शनिवार , 07-04-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। डीएम, एसपी सुनते नहीं और मुख्यमंत्री ने डांट कर भगा दिया। यह गुहार भारतीय जनता पार्टी के रॉबर्ट्सगंज से सांसद छोटेलाल खरवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लगाई है। उन्होंने लिखा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिकायत को सुनते ही नहीं। पत्र में खरवार ने कहा है कि योगी उन्हें डांट कर भगा देते हैं।

खरवार ने यह भी शिकायत की है कि प्रशासन और जिला अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते और उनके साथ भेदभाव करते हैं। अपने शिकायत पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय और संगठन मंत्री सुनील बंसल का जिक्र किया है। इसके अलावा उन्होंने अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग में भी शिकायत की है।

अपने पत्र में सांसद ने कहा है कि वो पिछले तीन साल से चंदौली जिला प्रशासन और वन विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जो उनके संसदीय क्षेत्र से लगा हुआ इलाका है। जब योगी मुख्यमंत्री बने तो लगा था मामला हल होगा लेकिन उल्टा उनकी जमीन को ही वन विभाग की जमीन बता दी गई। खरवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ पार्टी के क्षेत्रीय नेता साजिश कर रहे हैं और विपक्षी दलों के साथ मिलकर उनके खिलाफ काम कर रहे हैं।

आज तक की खबर के अनुसार मोदी को लिखे पत्र में भाजपा सांसद ने कहा है कि जिले के आला अधिकारी उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। मामले में भाजपा सांसद ने दो बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की, लेकिन सीएम ने उन्हें डांटकर भगा दिया। सांसद ने कहा कि पार्टी के कुछ लोग उनके खिलाफ टिकट काटने की साजिश भी रच सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘हां, मैं पार्टी से नाराज हूं। प्रधानमंत्री को लिखकर दिया है, क्योंकि मेरे खिलाफ साजिश की गई है। सपा-बसपा के साथ-साथ भाजपा के लोगों ने मिलकर मेरे भाई को ब्लॉक प्रमुख के पद से हटवाया है, हमारे ऊपर हमले हुए हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘विरोधियों ने मेरे कान पर पिस्टल लगाया, लेकिन पुलिसवालों ने कोई सुनवाई नहीं की, हम थानेदार से लेकर डीजीपी तक से मिल चुके हैं, हमारी बात किसी ने नहीं सुनी।’

खरवार ने शिकायत में कहा है कि प्रदेश में जब अखिलेश सरकार थी, उस समय 2015 में नौगढ़ वन क्षेत्र में अवैध कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री समेत कई लोगों से की, लेकिन कार्रवाई की बजाय अधिकारियों ने मेरे घर को ही वन क्षेत्र में डाल दिया। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश पर दोबारा पैमाईश में सच सामने आया कि मेरा घर वन क्षेत्र में नहीं है।

खरवार ने कहा, ‘मैं पार्टी क्यों छोडूंगा? भाजपा किसी की बपौती नहीं है, मेरी भी पार्टी है। मैं अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष हूं, मेरे साथ ऐसा सुलूक हो सकता है, तो किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है।’

दलित समाज में पार्टी के प्रति असंतोष पर रॉबर्ट्सगंज सांसद ने कहा, ‘मुझे लगता है कि दलितों में आरक्षण को लेकर असंतोष बढ़ा है। हाल के दिनों में जिस तरीके का फैसला, सुप्रीम कोर्ट में आया है, उसके बाद से दलितों के बीच चिंता बढ़ गई है। मुझे प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष पर पूरा भरोसा है, जल्दी ही सब ठीक होगा।

इस बीच बीजेपी के एक दलित सांसद डॉ.यशवंत सिंह ने भी बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दलितों के साथ हो रहे अन्याय पर कड़ा विरोध दर्ज किया है। उत्तर प्रदेश के नगीना क्षेत्र से सांसद य़शवंत ने अपने पत्र में लिखा है कि “मैं दलित समाज के जाटव समाज का एक सांसद हूं। आरक्षण के कारण ही मैं सांसद बन पाया हूं। योग्यता ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेंज से एमडी की डिग्री तथा अमेरिका से USMLE परीक्षा उत्तीर्ण आदि-आदि है। मैं समझता हूं कि आरक्षण के कारण ही मुझे सांसद बनने का अवसर मिला है। मेरी योग्यता का उपयोग नहीं हो पा रहा है।”

यशवंत सिंह का पत्र।

उन्होंने बिल्कुल शिकायती लहजे में कहा कि “जब मैं चुनकर आया था तभी आप से प्रमोशन में आरक्षण हेतू बिल पास कराने हेतू अनुरोध किया था। समाज के विभिन्न संगठन दिन-रात हम लोगों को इस प्रकार का अनुरोध करते हैं परंतु चार वर्ष बीत जाने के बाद भी इस देश के लगभग 30 करोड़ दलितों के प्रत्यक्ष हित हेतू आपकी सरकार द्वारा एक भी कार्य नहीं किया गया।”

अंत में उन्होंने कहा है कि “हम भाजपा के दलित सांसद अपने समाज की रोज-रोज की प्रताड़ना के शिकार हैं। हमारा जवाब देना मुश्किल है। कृपया दलित समाज के हितों का विशेष ध्यान देते हुए आरक्षण बिल पास कराएं। बैकलाग की भर्ती निकलवायें उन्हें भरवाएं तथा प्राइवेट नौकरियों में भी आरक्षण लागू कराएं तथा एससी-एसटी एक्ट में कोर्ट के फैसले के खिलाफ पैरवी करके इस निर्णय को पलटवाएं।”




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