गुजरात में अल्पसंख्यकों को लेकर कांग्रेस-बीजेपी की नई रणनीति

गुजरात , अहमदाबाद , शनिवार , 21-10-2017


bjp-gujrat-politics-election-gayasuddin-latif-pppandey

कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। राहुल गांधी गुजरात आते हैं तो मंदिर मंदिर घूम रहे हैं पाटीदार, दलित और पिछड़ों के आदोलन के बीच हिंदुत्व की प्रयोगशाला में राहुल गाँधी को मिल रहे जन समर्थन से पूरी कांग्रेस गदगद है। दूसरी तरफ अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी से जनता का मोहभंग हो रहा है। जातीय समूहों के नेता होने के बावजूद हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवानी का कद राज्य के किसी भी नेता से बड़ा हो गया है। पहले हार्दिक पटेल के खिलाफ कांग्रेस ने पिछड़ों के अधिकार (आरक्षण) की रक्षा के लिए युवा नेता अल्पेश ठाकोर को पिछले दरवाज़े से खड़ा कर किया। जिससे परिस्थिति पिछड़ों और पाटीदारों के टकराव की पैदा हुई। परन्तु बहुत ही चालाकी से तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने आरक्षण बचाओ आन्दोलन को नशामुक्ति आन्दोलन में परिवर्तित करा दिया।

मृत पूर्व माफिया लतीफ और पीपी पांडेय के साथ बूटलेगर।

जातिवादी टकराव तो टल गया लेकिन आनन्दीबेन पटेल की यह चालाकी अब बीजेपी के गले की फांस बन गयी है। क्योंकि पाटीदारों के साथ-साथ पिछड़ों का सेंटिमेंट भी सरकार के खिलाफ ही चला गया। जिसके चलते अब बीजेपी को पाटीदार और पिछड़ों दोनों के वोट खिसकते नज़र आ रहे हैं। फिर इन दोनों विकासों के बीच ऊना की घटना से नाराज पूरे राज्य के दलित सड़क पर आ जाते हैं। नतीजतन राज्य के दलितों को जिग्नेश मेवनी जैसा नेता मिलता है जो गांव गांव घूम कर “कुत्ते और कौवे की मौत मरूंगा लेकिन बीजेपी को वोट नहीं दूंगा” की शपथ दिला रहा है। हिंदुत्व की प्रयोगशाला में खुद उसके ही बनाए हथियार उसके खिलाफ चलाए जाएंगे। और बीजेपी को ऐसे दिनों का सामना करना पड़ेगा ये बात दिल्ली और यूपी में बैठे किसी शख्स के लिए कल्पना से भी परे है लेकिन सच यही है। 

बीजेपी को सबसे अधिक उम्मीद शहरी और 15% जनसंख्या वाले आदिवासी वोटरों से है। राहुल गांधी का अगला दौरा आदिवासी बेल्ट में ही है। इन सब के बीच एक बड़ा प्रश्न है कि गुजरात की राजनीति में 10% की जनसंख्या वाले मुस्लिम वोटर कहां हैं? राज्य में 21 सीटें ऐसी हैं जहां पर मुसलमानों की संख्या 25% से अधिक है लेकिन एंटोनी की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस मुसलमानों से दूरी रखने में ही फ़ायदा देख रही है लेकिन साथ ही मुस्लिम वोटों को हासिल करने की रणनीति भी बना रखी है। रणनीति के अनुसार कांग्रेस बीजेपी का भय दिखा रही है।

मुसलमानों को समझा रही है जो कांग्रेस के टिकट पर लड़े वही मुसलमान है अन्य किसी दल से लड़ने वाले बीजेपी के एजेंट हैं। इसके अलावा कांग्रेस मुस्लिम इलाकों में 80 और 90 के दशक की राजनीति को फिर से जिंदा कर रही है। जब अब्दुल लतीफ़ (रईस) जैसे डॉन पांच जगह से चुनाव लड़ते हैं और सभी पांच सीटों पर चुनाव जीत भी जाते हैं। अन्य मुस्लिम नेता भी कहीं नवाब खान तो कहीं वहाब खान के आशीर्वाद से चुनाव जीतते थे। मुसलमानों के बीच इस प्रकार की राजनीति कांग्रेस के बड़े नेताओं ने फैलाई थी बीजेपी ने इन डॉनों के नाम से ज़बरदस्त ध्रुवीकरण कर गुजरात की सत्ता में ऐसी पकड़ बनाई कि वो आज तक उनके हाथ से नहीं गयी।

 

  • दंगे,तस्करी और डॉन लतीफ के लिए जाना जाता था दरियापुर
  • कांग्रेस रही है इस तरह की राजनीति की सूत्रधार

 

पुराने शहर का दरियापुर कभी दंगे, तस्करी और डॉन लतीफ़ के नाम से ऐसा बदनाम हुआ कि आज भी दरियापुर की पहचान कुछ ऐसी ही बनी हुई है। कांग्रेस पार्टी ने दरियापुर से विधायक गयासुद्दीन शेख़ को फिर से उम्मीदवार बनाया है। 10 वर्ष से विधायक होने के कारण जनता में असंतोष है। दरियापुर में 46% मुस्लिम मतदाता हैं। पिछले चुनाव में गयासुद्दीन शेख मात्र 2600 वोटों से जीते थे। गयासुद्दीन शेख़ के समर्थन में दो बुट्लेगरों ने मोर्चा संभाल लिया है। जिनमें एक डीजी वंजारा तो दूसरा पीपी पाण्डेय का मुखबिर है। गयासुद्दीन शेख के विकल्प के तौर पर अब्दुल अहद खान ने पूर्व पार्षद राजू मोमिन को शंकर सिंह वाघेला के जनविकल्प से मैदान में उतार दिया है। राजू मोमिन को वहाब गैंग का समर्थन हासिल है। अब्दुल अहद के पिता डॉन वहाब खान थे। 15 वर्ष जेल में रहने के बाद 2014 में उनका देहांत हो चुका है। वहाब के संबंध दाऊद इब्राहीम से भी थे। 

आम आदमी पार्टी भी मैदान में

इन सब के बीच आम आदमी पार्टी ने भी दरियापुर से शफी शेख को उम्मीदवार बनाया है शफी शेख का कहना है कि मैं इस पक्ष में हूं कि दरियापुर से मुस्लिम ही विधायक बने लेकिन गयासुद्दीन शेख को साबित करना पड़ेगा कि वह मुझसे बेहतर प्रत्याशी हैं। कांग्रेसी मुसलमान ही मुसलमान हैं यह बात समझ से परे है। चुनाव में उमीदवार को काम की बुनियाद पर चुना जाना चाहिए। हम जनता से मोहल्ला क्लीनिक, स्कूल और दिल्ली में आम जन के हितों में किया गए कामों की बुनियाद पर वोट मांग रहे हैं। जिस कारण हमें अन्य मोहल्लों से भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। 

अहमदाबाद की दानीलीमड़ा सीट से शैलेश परमार चुनाव जीतते हैं जो अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। इस सीट पर 49% मुस्लिम मतदाता हैं। कांग्रेस पार्टी शरीफ खान के आशीर्वाद से यह सीट जीतती है शरीफ खान डॉन नवाब खान के बेटे हैं। शरीफ खान ने अपने भतीजे शहजाद खान के लिए जमालपुर विधानसभा की मांग की है। युवा कोटे से शहजाद खान को सीट मिलने की संभावना भी है। अहमदाबाद की तीन सीटों पर मुसलमानों का दबदबा है जिस वर्चस्व का लाभ इन लोगों को स्वाभाकि तौर पर मिलता है। 


 










Leave your comment