रमन जी, काश आम गर्भवती को भी आपकी बहू की तरह वीआईपी ट्रीटमेंट मिल सकता!

ख़ास ख़बर , रायपुर, बृहस्पतिवार , 16-11-2017


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तामेश्वर सिन्हा

रायपुर (छत्तीसगढ़)। दिखावे और ईमानदारी में किस तरह फर्क है इसका उदाहरण एक बार फिर छत्तीसगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह  ने अपनी बहू की डिलीवरी किसी बड़े थ्री या फाइव स्टार अस्पताल में करवाने की बजाय एक सामान्य से सरकारी अस्पताल में करवाकर लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि वे भले ही राज्य के मुख्यमंत्री हों लेकिन वो भी आम आदमी की तरह ही अपने बहू की डिलीवरी एक सरकारी अस्पताल में करवा रहे हैं।

लेकिन यह डिलीवरी जिस तरह हुई, मुख्यमंत्री की बहू के लिए जिस पैमाने पर अस्पताल में व्यवस्था की गई और जिसके चलते अन्य सामान्य मरीजों को दिक्कतें हुईं, वह अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। 

मुख्यमंत्री रमन सिंह अपनी पोती के साथ। फोटो साभार

 

  • मुख्यमंत्री जनता को नहीं दे पाए सही संदेश
  • रमन सिंह की बहू को मिला वीआईपी ट्रीटमेंट
  • आम गर्भवती को तो एक बेड तक नसीब नहीं

सरकारी अस्पताल का इस्तेमाल!

मुख्यमंत्री रमन सिंह की पोती का जन्म रायपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल में हुआ। 11 नवंबर को उनके बेटे अभिषेक की पत्नी ऐश्वर्या ने अस्पताल में बिटिया को जन्म दिया। इस मौके की तस्वीरें पूरे देश भर में वायरल हुईं। रमन सिंह को बधाई मिली लेकिन जिस सरकारी अस्पताल में सीएम की बहू को प्रसूति के वक्त  वीआईपी ट्रीटमेंट मिला, उसी वक्त सामान्य और गरीब परिवार की गर्भवती महिलाओं को बिस्तर साझा करना पड़ा। यही नहीं अस्पताल के डॉक्टरों के कमरे को भी पुलिस कंट्रोल रूम में तब्दील कर दिया गया था। 

एक बेड पर दो-दो गर्भवती

इस दौरान अंबेडकर अस्पताल के वार्ड नम्बर 2 में समरीन देवांगन और दुर्गावती फ़रिहार भर्ती थीं और ये दोनों गर्भवती महिलाएं अस्पताल के एक ही बेड पर एडमिट थीं। बात सिर्फ दुर्गा और समरीन की नहीं है, बल्कि इनकी तरह आरती, खोनी बाई, निशा परवीन ,चन्दा वर्मा, क्रांति चौहान, दुर्गा संघारे जैसी कई महिलाओं की स्थिति रही। 

रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल का दृश्य। फोटो साभार

जिन गर्भवती महिलाओं को बड़ी ही सावधानी औऱ सुरक्षा के साथ अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं मिलनी चाहिए वो एक दूसरे के पेट पर पैर रखे हुए पड़ी रहीं। आलम यह भी था कि बिस्तर तो दूर कुछ गर्भवती महिलाओं को कड़ाके की ठंड में नीचे भी सोना पड़ा। 

सरकारी स्वास्थ्य सेवा बदहाल

आपको बता दें कि प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बदहाली जगज़ाहिर है। लोग सरकारी अस्पतालों में जाने से कतराते हैं और निजी अस्पतालों में इलाज कराना बेहतर समझते हैं। गर्भाशय कांड, नसबंदी कांड, आंख फोड़वा कांड के नाम से यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं कुख्यात रही हैं। 

और अब एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि एक ओर प्रदेश के मुखिया की बहू का वीआईपी ट्रीटमेंट तो दूसरी ओर अन्य महिलाओं को बिस्तर तक नसीब नहीं हैं? बताया जा रहा है कि इस दौरान भी अस्पताल में कुल 700 मरीजों की क्षमता के विपरीत करीब 1200 मरीज भर्ती थे।  






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