भ्रष्टाचार की सड़क और जवानों की शहादत

छत्तीसगढ़ , बस्तर, बुधवार , 21-03-2018


chhattisgarh-bastar-sukma-road-corruption-martyrdom

तामेश्वर सिन्हा

बस्तर (सुकमा)। छत्तीसगढ़ में आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए सरकार लोक सुराज अभियान के जरिये जनता से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है। लोक सुराज अभियान के तीसरे चरण में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बस्तर के सुकमा जिले के इंजरम में 11 मार्च को बाइक पर सवार होकर नेशनल हाईवे का अवलोकन कर बस्तर में विकास की बात कहते हुए नक्सल मुक्त होने का संदेश दिया था। इंजरम से भेज्जी तक सड़क का नामकरण शहीद जगजीत सिंह के नाम पर करने का ऐलान भी किया, दरअसल उस सड़क की वास्तविक तस्वीर अलग है, सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। 

इंजरम से भेज्जी तक करीब 30 किलोमीटर सड़क का नामकरण शहीद जगजीत सिंह के नाम पर किया गया है। फोटो साभार

 

आपको बता दें कि  शुरू के डेढ़ किलो मीटर की सड़क को सीएम को दिखाने के लिए डामर की काली चादर ओढ़ा दी गई थी, उसके बाद की सड़क पूरी तरह उखड़ गई है। अब सड़क पर चढ़ाए गए डामर को निकाला जा रहा है। जबकि सड़क का निर्माण 2014 में शुरू किया गया था। 8 माह की अवधि में इसे पूरा कर लिया गया था। सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई घटिया सामग्री के वजह से सड़क जल्द ही जर्जर हो गई।  अब दुबारा मरम्मत की जरूरत पड़ गई है। 

 

इंजरम से भेज्जी की दूरी करीब 18 किमी है। पहली सात किमी की सड़क लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई जा रही है, वहीं 8 किमी से भेज्जी तक पुलिस हाउसिंग बोर्ड़ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इंजरम शून्य से 7 किमी सड़क की लागत एसओआर दर से 45 प्रतिशत अधिक है। इसकी कुल लागत 4 करोड़ है। लेकिन वर्तमान में जितनी सड़क बनी है उसकी हालत देखकर ऐसा कहीं से भी नहीं लगता कि अभी तक इसके निर्माण में एक करोड़ भी खर्च किये गये होंगे।


आपको मालूम होना चाहिए कि बस्तर में सड़कों की सुरक्षा में जवानों ने अपनी जानें गंवा दी हैं आज उन्हीं सड़कों को मरम्मत की दरकार पड़ गई हैं। यानी मरम्मत के लिए भी फिर से जवानों की तैनाती होगी। फिर नक्सली हमले का डर बना रहेगा। आखिर कब तक जवान सड़कों की सुरक्षा देते रहेंगे और नक्सलियों का शिकार होते रहेंगे। 


राज्य सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों में निर्माणाधीन सड़कों का काम शीघ्र पूरा करने के लिए वहां काम रहे ठेकेदारों और मजदूरों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात करती है। नक्सली लगातार सड़क निर्माण को लेकर वारदात को अंजाम भी देते हैं। सुरक्षा बल के जवान सड़क सुरक्षा को लेकर अपनी जान भी गंवा रहे है। तो वहीं एक ओर शहादत पर भारी भ्रष्टाचार हो गया है और उसी सड़क के नाम पर मुख्यमंत्री जी विकास के दावे भी कर रहे हैं। 

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री रमन सिंह के सुकमा दौरे के 72 घन्टे के भीतर ही नक्सलियों ने अपनी मौजूदगी दर्शाने  के लिए सीआरपीएफ जवानों पर हमला कर दिया था, जिसमें 9 जवान शहीद हो गए थे। 

(तामेश्वर सिन्हा छत्तीसगढ़ के तेज-तर्रार युवा पत्रकार हैं और तमाम जोखिम उठाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हैं।)






Leave your comment











eshwar kurre :: - 03-22-2018
nice👌👌👌👌