क्या छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के नाम पर पत्रकारों की हत्या की साज़िश रची जा रही है?

सवाल दर सवाल , बस्तर, शुक्रवार , 08-12-2017


chhattisgarh-bastar-threat-maoist-police-journalist

तामेश्वर सिन्हा

बस्तर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के नाम पर क्या पत्रकारों की हत्या की साज़िश रची जा रही है? आज यह सवाल यहां पत्रकार जगत में हर कोई पूछ रहा है। दरअसल पिछले दिनों माओवादियों की ओर से पत्रकारों की हत्या की धमकी और अब उसके खंडन के पर्चे जारी होने के बाद यह सवाल उठा है कि अगर माओवादियों ने पत्रकारों की हत्या की धमकी के पर्चे जारी नहीं किए तो फिर किसने किए? कौन  है जो पत्रकारों की हत्या करना चाहता है? और क्यों? 

माओवादियों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए स्पष्टीकरण दिया है कि “पत्रकारों की हत्या का बैनर पोस्टर हमने जारी नहीं किया है। इसका भाकपा (माओवादी) की किसी भी ईकाई से कोई सम्बन्ध नहीं है।”

नक्सलियों के नाम पर पहले जारी किए गए धमकी भरे पर्चे।

पहले दी गई थी धमकी

आपको बता दें कि बीजापुर जिले के आवापल्ली क्षेत्र में कथित तौर पर माओवादियों की ओर से गलत रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की हत्या की धमकी जारी की गई थी। इस संबंध में बीती 13 नवंबर को ऐसे धमकी भरे पर्चे-बैनर तहसील कार्यालय में चस्पा किए गए थे। इससे पत्रकार जगत में काफी रोष व्याप्त था। इसके विरोध में पत्रकारों ने माओवादियों से जवाब जानने के लिए एक यात्रा भी निकाली थी।

भाकपा (माओवादी) का स्पष्टीकरण

अब भाकपा (माओवादी) की दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी के हवाले से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्टीकरण दिया गया है कि पत्रकारों की हत्या के धमकी भरे पर्चे उनके नहीं हैं।

भाकपा (माओवादी) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति।

 

माओवादियों ने लिखा है कि “ हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि न हमने ये पर्चे या बैनर जारी की है और न हमारी पार्टी की तरफ से पत्रकारों को डराने-धमकाने की राजनीति या कोई नीति है।” 

अपने इस स्पष्टीकरण में भाकपा (माओवादी) ने आगे कहा है कि “यह भाजपा सरकार, पुलिस और अग्नि जैसे प्रतिक्रांतिकारी गिरोह का कार्य है जिसे माओवादियों से जोड़ा जा रहा है। पत्रकारों की जनपक्षधर आवाज को कुचलने के लिए सरकार साजिश कर रही है। जिसकी हम निंदा करते हैं।” 

विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस की स्वतंत्रता की माओवादी पार्टी समर्थक है। इसमें किसी भी प्रकार के पर्चे को बिना जांचे परखे भ्रामक प्रचार से पत्रकारों को दूर रहने की बात कही गई है।

पर्चा जारी करने वालों की पहचान हो : गणेश मिश्रा

इस पूरे प्रकरण में बीजापुर प्रेस क्लब अध्यक्ष गणेश मिश्रा ने कहा कि कथित पर्चा काण्ड से जुड़े लोगों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। नक्सलियों द्वारा इस मामले में स्पष्टीकरण देने के बाद स्पष्ट हो चुका है राज्य में नक्सलियों के नाम पर पत्रकारों की हत्या का साज़िश रची जा रही है।

आपको बता दें कि बस्तर में सरकार द्वारा पत्रकारों के ऊपर पुलिसिया दमन के दर्जनों मामले हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने में सरकार पीछे नहीं है। इस मामले में भी अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर पत्रकारों की हत्या का पर्चा किसने जारी किया? फिलहाल पुलिस प्रशासन की तरफ से इस मामले में किसी भी प्रकार का जवाब नहीं आया है। 










Leave your comment