अधिकारियों और खनिज माफियाओं के गठजोड़ से छत्तीसगढ़ सरकार को लग रहा है करोड़ों का चूना

छत्तीसगढ़ , , सोमवार , 04-02-2019


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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जितने भी गौण खनिज हैं उसमें भी स्थानीय लोगों को अवसर देने की बात कह रहें है। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि बड़े ठेकेदार ग्रुप बनाकर काम ले लेते हैं। बस्तर खनिज माफिया की ठेकेदारी बंद करा कर स्थानीय पढ़े लिखे लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने का वादा कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर बस्तर में ही पिपलावण्ड क्रेसर खदानों में पांचवी अनुसूची क्षेत्र के नियम-प्रावधान व ग्राम सभा के प्रस्ताव के विरुद्ध खनिज माफिया व खनिज विभाग के अधिकारी जबरन उत्खनन कर रहे हैं।

इस मामले पर उस क्षेत्र के ग्रामीणों से खोज खबर लेने पर पता चला कि क्रेसर माफिया बिना पीट पास के क्रेसर गाड़ियों में क्रेशर भरकर ले जा रहे हैं। जब इस बात की भनक ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने गाड़ियों को रोक कर पीट पास की मांग की। लेकिन उनके पास पीट पास नहीं पाया गया। इस पर वाहन चालकों ने अपनी धौंस दिखाते हुए उल्टे ग्रामीणों से ही बदतमीजी की और गालियां दी। जिसके कारण हाथापाई की स्थिति उत्पन्न हो गई। अखबारों में चल रही खबरों के अनुसार ग्रामीणों को ही अवैध वसूली करने वाला करार दिया गया है, जो कि यह प्रदर्शित करता है कि इस नियम विरुद्ध कार्य में बड़े गैंग का हाथ है, जो मीडिया से लेकर अधिकारी-कर्मचारी के साथ ही साथ पुलिस विभाग तक को अपने जेब में रखता है। जिसके कारण नियम के तहत कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करने वाले ग्रामीणों को उल्टे वसूली करने वाला बताकर एफआईआर दर्ज कर उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा रही है। 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अधिकारी-कर्मचारियों को पांचवी अनुसूची पेशा कानून का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दे रहे हैं। दूसरी तरफ खनिज विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी खनिज माफियाओं से मिलकर नियमों को ताक पर रखकर ग्रामीणों के साथ मारपीट करके राजस्व कर को चूना लगा रहे हैं। कृषि को लेकर उस क्षेत्र के 10 से 15 गांव के ग्राम सभाओं के प्रस्ताव को जिला प्रशासन और खनिज विभाग को दिया जा चुका है। लेकिन जिला प्रशासन ग्राम सभा के प्रस्ताव का पालन नहीं कर रहा है।जिसके कारण ग्रामीणों का सरकारी व्यवस्था पर मोहभंग हो रहा है। यही स्थिति बस्तर संभाग के अधिकांश खदानों पर हो रही है जिसके कारण बस्तरिया मून समाज में आक्रोश व्याप्त है। दूसरी तरफ पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के संविधान पेशा कानून का खुल्लम खुला उल्लंघन है।

ग्राम सभा द्वारा इन क्रेशर खदानों को संचालित करने के लिए गांव के बेरोजगार युवाओं की आदिम जाति सहकारी समिति बनाकर उसके माध्यम से उत्खनन करना था। खनन से प्राप्त आय का गांव के हित में उपयोग कर शिक्षा स्वास्थ्य एवं मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति और बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के मकसद से प्रस्ताव पारित किया गया है। बस्तर जैसे क्षेत्र में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए यह प्रावधान संविधान की पांचवी अनुसूची पेशा कानून में स्पष्ट रूप से संसद द्वारा कानून बनाया गया है। लेकिन इन कानूनों का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन प्रशासन व खनिज माफिया कर रहे हैं।

वहीं इस मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के गोवर्धन कश्यप कहते हैं कि समाचार पत्रों में छपी खबरों के आधार पर बस्तर तहसील के अंतर्गत पीपलावण्ड क्षेत्र में चालित क्रेशर खदानों में भू माफियाओं का हाथ होने की संभावना है। गौण खनिज उत्खनन में भू माफिया द्वारा अनुसूची पांच, पेसा एक्ट को ताक पर रखकर राजस्व को चट कर रहे हैं। इसका सर्व आदिवासी समाज बस्तर जिला पुरजोर विरोध करता है और कलेक्टर से मांग करता है कि वहां की क्रेसर खदानों को तत्काल बंद कर ग्राम सभा से विधिक रुप से सहमति प्रस्ताव लिया जाए। उसके बाद ही क्रेशर प्रारंभ की जाए। अन्यथा सर्व आदिवासी समाज खनिज माफियाओं के विरुद्ध भूमकाल दिवस 10 फरवरी के बाद वृहद जन आंदोलन छेड़ कर सभी क्रेशर खदानों को ग्राम सभाओं के अधीन कर स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाने हेतु जन आंदोलन करेगी।

 










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