पार्टी का आदेश ठुकराना माले विधायक के लिए पड़ा महंगा,पार्टी के सभी पदों से निलंबित

झारखंड , रांची, बुधवार , 04-04-2018


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विशद कुमार

रांची। भाकपा माले के 10वें राष्ट्रीय महाधिवेशन से एक प्रेस बयान जारी कर भाकपा माले के राज्य सचिव का. जनार्दन प्रसाद ने गिरिडीह जिले के राजधनवार विधायक राजकुमार यादव को पार्टी के सभी पदों से मुक्त कर दिया है। 

पार्टी की ओर से कहा गया है कि गत राज्यसभा चुनाव में झारखण्ड में भाकपा—माले ने भाजपा के खिलाफ एक मात्र विपक्षी उम्मीदवार कांग्रेस के श्री धीरज साहू के पक्ष में वोट देने का निर्णय लिया था। पार्टी विधायक राजकुमार यादव ने धीरज साहू को पहली वरीयता के लिए मत दिया। संभवतः इसमें किसी तकनीकी चूक की वजह से विधायक का वोट रद्द हो गया है। भाकपा—माले को इसका गहरा अफ़सोस है। भाकपा—माले इस चूक के मद्देनजर अपने विधायक राजकुमार यादव को पार्टी के सभी पदों से निलंबित करती है और पार्टी की केन्द्रीय स्तर की टीम गठित कर पूरे मामले की जाँच की कार्यवाही अविलम्ब शुरू करेगी।

पत्र में कहा गया है कि भाजपा के साथ हमेशा सांठगांठ करने वाले लोग इस तकनीकी चूक की आड़ लेकर भाकपा—माले की राजनीतिक साख, सांप्रदायिक फासीवादी शक्तियों के खिलाफ कुर्बानियों के इतिहास और कामरेड महेंद्र सिंह जैसे शहीदों की विरासत पर अपनी राजनीतिक स्वार्थ—लिप्सा में कीचड़ उछाल रहे हैं। हमारी पार्टी यह विश्वास करती है कि झारखण्ड की जनता इस दुष्प्रचार अभियान को धता बताएगी। राज्य सचिव ने कहा है कि भाकपा—माले झारखण्ड की जनता को विश्वास दिलाना चाहती है कि हम क्रन्तिकारी कम्युनिस्ट परम्परा और कामरेड महेंद्र सिंह के बलिदान को कतई धूमिल होने नहीं देंगे और झारखण्ड की जनता के हितों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने को हमेशा तैयार रहे हैं और रहेंगे।

का. जर्नादन प्रसाद ने बताया है कि माले विधायक राजकुमार यादव अभी पार्टी की स्टैडिंग कमेटी और राज्य कमेटी के सदस्य हैं, राज्यसभा चुनाव में गड़बड़ी की जांच पूरी होने तक उन्हें पद से मुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि पार्टी की केंद्रीय कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी।

राज्य सचिव ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भाजपा उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने के लिए ही राजकुमार यादव द्वारा इस तरह से वोटिंग की गयी होगी। गौरतलब है कि विधायक राजकुमार यादव ने विगत 23 मार्च को संपन्न राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी धीरज साहू के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की थी, लेकिन चुनाव के दिन यह बात सामने आयी थी कि माले विधायक ने कांग्रेस प्रत्याशी के अलावा नोटा पर भी टिक लगा दिया, जिसके कारण उनका मतपत्र रद्द हो गया। बताया गया है कि जांच में आरोप सही पाये जाने पर पार्टी उनके विरुद्ध और कड़ी कार्रवाई कर सकती है।

बताते चलें कि भाकपा-माले विधायक राजकुमार यादव ने इस संबंध में पार्टी के समक्ष अपनी सफाई भी दी, लेकिन पार्टी को शक है कि राजकुमार यादव ने राज्यसभा चुनाव में जानबूझ कर गलत तरीके से वोटिंग की, इस कारण माले ने पूरे मामले की जांच का भी निर्णय लिया है।

गिरिडीह जिला के गावां प्रखंड के बिशनीटिकर गांव के रहने वाले राजकुमार यादव वर्ष 1990 में बगोदर विधानसभा से भाकपा माले,( तत्कालीन IPF) के महेंद्र सिंह द्वारा विधानसभा चुनाव जीतने के पहले से ही भाकपा माले के सम्पर्क में आ चुके थे । वर्ष 1990 में महेंद्र सिंह के बगोदर से चुनाव जीतने के बाद राजकुमार पार्टी के साथ संगठनात्मक रूप से जुड़े। गावां प्रखंड में उस समय माइका (अभ्रक) उद्योग था। प्रखंड में बड़े पैमाने पर जमीन के थोड़े नीचे ही अभ्रक मिल जाता है। अभ्रक उद्योग में रोजगार या मजदूरी करके उनके प्रखंड के गरीब, मजदूर उस समय गुजर बसर करते थे ।

उस वक्त का. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में माइका माफिया के खिलाफ मजदूर आंदोलन की अगुआई करते हुए राजकुमार यादव बहुत तेजी से राजधनवार विधानसभा के एक क्रांतिकारी माले नेता के रूप में उभरे। पार्टी ने वर्ष 2000 में पहली बार राजकुमार यादव को राजधनवार विधानसभा चुनाव मैदान में उतारा और वे मात्र 3000 से भी कम वोट से चुनाव हारे। भाजपा के रविंद्र राय चुनाव जीत गए । उसके वाद राजकुमार यादव राजधनवार विधानसभा और कोडरमा लोकसभा में बाबूलाल मरांडी (जेबीएम) के एकमात्र निकटतम प्रतिद्वंदी रहे।  

इस बीच 23 जनवरी 2003 में कोडरमा जिला के मारकच्चो प्रखंड मुख्यालय पर जन प्रदर्शन के दौरान पुलिस गोलीकांड में उनकी हत्या की भी कोशिश की गई थी। इस बीच उन्हें कई बार झूठे मुक़दमे में फँसा कर जेल डाला गया । उन पर दो बार CCA (क्राइम कॉंट्रोल एक्ट) लगाया जा चुका था। लेकिन राजकुमार हर मामले में बरी हो गए । वर्ष 2004 में राजकुमार जेल में रहकर लोकसभा चुनाव लड़े थे और पहली बार एक लाख पैंतीस हजार वोट लाकर चौथे स्थान पर रहे थे । इस बीच राजकुमार यादव 2 बार लोकसभा चुनाव और तीन बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद बर्ष 2014 में पहली बार राजधनवार विधानसभा से चुन लिए गए थे। 

माले के सुखदेव प्रसाद बताते हैं कि इस हिसाब से अगर देखा जाय तो भाकपा माले और राजकुमार यादव पर जनता का अटूट भरोसा और विश्वास है । ऐसे में विगत 21 मार्च 2018 को राज्यसभा चुनाव के दौरान रांची में जो चूक राजकुमार यादव से हुई ,वह काफी दुखद है और भाकपा माले को इसका काफी अफसोस है।

(विशद कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल रांची में रहते हैं।)






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