बीजापुर कांड : मानसिक दबाव में हैं जवान लेकिन सरकार बात करने को तैयार नहीं?

स्पेशल रिपोर्ट , बस्तर, रविवार , 10-12-2017


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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर (छत्तीसगढ़)। बस्तर में बीहड़ों में स्थित कैम्पों में जवानों की हालत खराब है। दबावपूर्ण कार्य करने को वो मजबूर हैं। उनमें गुस्सा इतना है कि आम लोगों पर उतरता है या अपने और अपने साथियों के ऊपर। उनके मानसिक हालात के बारे में सरकार कभी बात करना नहीं चाहती। बस्तर में जवानों के दुश्मन सिर्फ नक्सली ही नहीं अवसाद भी है। 

जानकारी के अनुसार बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में 9 दिसम्बर की  शाम सीआरपीएफ के जवान संतकुमार ने किसी बात को लेकर साथी जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें 4 जवानों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल जवान को बीजापुर में प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर कर दिया गया है। 

घायल सीआरपीएफ जवान।

बस्तर डीआईजी पी सुंदरराज ने वारदात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना बीजापुर जिले के बासागुड़ा कैम्प में घटित हुयी है। सीआरपीएफ 168वीं बटालियन के आरक्षक संतराम ने अपने साथियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें एसआई वीके शर्मा, एसआई मेघसिंह, एएसआई राजवीर एवं आरक्षक जीएस राव की मौके पर ही सांसें थम गयीं, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस बात की बारीकी एवं तत्परता से पड़ताल की जा रही है कि उसने उक्त हत्याएं क्यों की। उन्होंने बताया कि हत्या के आरोपी कांस्टेबल संतकुमार को हिरासत में ले लिया गया है।

 

यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले दिसम्बर 2012 में दंतेवाड़ा जिले में ऐसे ही जवान ने 5 जवानों को अंधाधुंध गोली चलाकर मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना में एक जवान घायल भी हुआ था। 

जनवरी, 2017 में ही झगड़े को लेकर उत्तर बस्तर कांकेर में शस्त्र बल के जवान ने अपने प्लाटून कमांडर को गोली मार के मौत के घाट उतार दिया था। 


ऐसी दर्जनों घटनाएं बस्तर के जंगलों में जवानों के साथ घटित होती हैं। जवान पूरी तरह से मानसिक तनाव से गुजरते हैं। कभी छुट्टी न मिलने की वजह से से तो कभी आपसी टकराहट की वजह से। 


अब तक 115 सुरक्षाकर्मियों ने की है आत्महत्या 

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2007 से अब तक कुल 115 सुरक्षाकर्मियों ने आत्महत्या की है। इन दस सालों में 2017 में सबसे ज़्यादा 36 जवानों ने आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में दर्ज कारणों पर सूत्रों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों की आत्महत्या के प्रमुख कारणों में कठोर परिस्थितियों में काम, अवसाद, छुट्टी प्राप्त करने में कठिनाई और एक मामले में भाई का विवाह और होम सिकनेस है।

 

व्यक्तिगत/परिवार (50%), बीमारी संबंधी (11%), कार्य से संबंधित (8%), अनजान/जांच के तहत (18%) और अन्य (13%) के रूप में आत्महत्या के कारणों को वर्गीकृत किया गया है। 

संयोग से कुल 115 आत्महत्याओं में से 67 माओवादी हिंसा से प्रभावित इलाके में थे- बस्तर डिवीजन के सात जिलों में कांकेर, कोंडगांव, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर हैं।






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