गुजरात में रशादी को मिला दलित नेता राजू सोलंकी का साथ

गुजरात , अहमदाबाद, मंगलवार , 14-11-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष आमिर रशादी मदनी ने कांग्रेस द्वारा मुसलमानों को दरकिनार करने और सॉफ्ट हिंदुत्व पर जाने का इल्ज़ाम लगाया था और कांग्रेस से जनसंख्या के अनुपात में 18 सीटों की मांग की थी। जिसका खुद मुसलमानों ने ही विरोध किया था। परन्तु रविवार को उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष को वरिष्ठ दलित बुद्धिजीवी और नेता राजू भाई सोलंकी का साथ मिल गया। 

सोलंकी ने एक लिखित बयान में कहा कि “कुछ दिन पहले राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने मुसलमानों के लिए गुजरात कांग्रेस से 18 सीटें मांगी थी। दूसरे ही दिन कांग्रेस के मुसलमान विधायक ने कहा कि मौलवी लोग राजनीति से दूर ही रहें तो अच्छा रहेगा। अब जब इस देश में नागा बाबाओं के बीच में प्रधानमंत्री होने की स्पर्धा चल रही है तब मौलवियों को खामोश रहने की सलाह बिल्लियों से कांपते चूहों ने दी है। ” राजू सोलंकी ने जनचौक संवाददाता से बातचीत में कहा कि प्रश्न यह नहीं है कि किसने किसके लिए कितनी सीट मांगी। प्रश्न यह है कि सेक्युलर कहे जाने वाली कांग्रेस मुसलमानों को दरकिनार कर रही है। राहुल गाँधी मन्दिर-मन्दिर जा रहे हैं मीडिया भी कांग्रेस के हिंदुत्व वाले एजेंडे की खूब सरहना कर रही है। कल तक मीडिया को राहुल पप्पू लगते थे। अब एक परिपक्व नेता हमें चिंता इस बात की है। आज मुसलमानों को सेक्युलर कहे जाने वाली कांग्रेस किनारे कर रही है। कल यह दलितों को भी किनारे लगा सकती है। दलित मुसलमान को एक साथ खड़े होने की ज़रूरत है। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि दोनों एक दूसरे के साथ जैविक रूप से जुड़े हुए हैं। 

राजू सोलंकी ने पाटीदार समाज से लगातार मन्त्रणा करने और लगभग उतनी ही जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक समाज को दो तीन सीट पर समेटने पर प्रश्न करते हुए लिखा कि “कांग्रेस ने इस चुनाव में फिर से सॉफ्ट हिन्दुत्व का सहारा लिया है। राहुल ने पूरे गुजरात के नामी मंदिरों में जाकर घंटा बजा दिया है। मीडिया बहुत खुश है। गुजरात के अखबार लिखते हैं, “राहुल चोटीला माताजी का मंदिर सिर्फ पंद्रह मिनट में चढ़कर उतर गए। राहुल ने क्या फुर्ती दिखाई है।” अभी दो साल पहले जिस इन्सान को आप पप्पू-पप्पू कहते थकते नहीं थे, वह अचानक तेज तर्रार कैसे हो गया, धीर गंभीर कैसे हो गया, देश का पीएम मैटीरियल कैसे बन गया। मीडिया को कांग्रेस का सोफ्ट हिन्दुत्व बहुत भाया और मीडिया ने च्यवनप्राश की तरह लोगों को चटाया और सभी ने चाट भी लिया।

राहुल की कांग्रेस से कोई यह सवाल नहीं पूछता कि भैया गुजरात विधानसभा की 44 सीटें जिसकी झोली में है ऐसे प्रभुत्वशाली समुदाय के साथ हर रोज मंत्रणा करते हैं तो जिस समुदाय की इतनी ही तादाद होकर भी जिसे आप दो-चार सीटें देते हो उसे क्यों आप टेकन फोर ग्रान्टेड गिनते हो?

उन्होंने कहा कि 2004 में उन्होंने अपनी किताब ‘भगवा तले अंधेरा’ में एक विश्लेषण किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि 1981 में मुसलमानों के 9 विधायक थे। वांकानेर में पीरझादा मंजूर हुसैन, जामनगर में मोहमद हुसैन बलोच, सिद्धपुर में शरीफभाई भट्टी, गोधरा में अब्दुल रहीम खालपा, ठासरा में यासीन मियां मलेक, भरुच में अहमद पटेल, सुरत (पश्चिम) में मोहमद सुरती, कालूपुर में मोहमद हुसैन बारीजीया और जमालपुर में लालभाई कुंदीवाला थे। गोबर मंडली ने हार्ड हिन्दुत्व क्या चलाया कि कांग्रेस भी सोफ्ट हिन्दुत्व पर चल पड़ी। नतीजा यह हुआ कि आज सिर्फ दो विधायक रह गये हैं। और सबसे भयानक बात तो यह है कि इन सारी सीटों पर अब सवर्ण जातियों के लोग चुनकर आते हैं और वह भी कमल के निशान पर।

गुजरात में इस बार जो सत्ता विरोधी लहर है, वह शायद ही किसी और चुनाव में रही होगी। अगर इसके बावजूद कांग्रेस हार जाती है तो मुसलमानों को राजकीय विकल्प के बारे सोचना पड़ेगा।”

राजू सोलंकी ने बताया कि गोधरा से अब्दुल रहीम खालपा विधायक हुआ करते थे उनके बाद वह सीट हरेश भट्ट के पास चली गई, सिद्धपुर से शरीफ भाई भट्टी जीता करते थे अब जय नारायण व्यास और बलवंत सिंह जमालपुर भी मुस्लिमों के हाथ से फिसली तो भूषण भट्ट के पास गई किसी के पास जवाब है कि मुसलमानों के हाथ से फिसलने वाली सीटें सवर्णों के पास ही क्यों जाती हैं। 

जमालपुर से बहुजन समज पार्टी के उम्मीदवार जावेद कुरैशी का कहना है कि मौलाना रशादी मदनी के दौरे के बाद मुसलमान और मुसलमानों की नुमाइंदगी पर चर्चा शुरू हुआ है यह चर्चा गुजरात के मुसलमानों और उलेमाओं को शुरू करनी चाहिए थी अब भी समय है दलित मुस्लिम एक साथ बैठकर चर्चा करें और सेकुलरिज्म के नाम पर ठगने वालों को सबक सिखाएं वरना 2017 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद मुसलमानों को 2019 समझाया जायेगा ।

गुजरात में मत के आधार पर  मुस्लिम बहुल सीटें निम्न हैं 

   विधानसभा           मुस्लिम मतदाता 

जमालपुर          108364

दरियापुर                78550

वागरा             78210

भरूच              74215

वेजलपुर            98567

लिम्बायत          64363

जम्बुसार           61332

गोधरा             48368

बापूनगर           46065

सूरत पूर्व          45771

अबडासा           44719

सिधपुर            42769

धोराजी            42585

रावपुरा            41616

सोमनाथ          40358

आनन्द           40256

वटवा            37990

मांडवी           37626

महुधा           36356

खंबलिया           36241

दसाडा             34782

अंजार             34776

भुज              32698

उमरेठ            32435

जामनगर ग्राम्य    32697

सावरकुंडला        30120

नडियाद           33479

जामनगर दक्षिण   32709

मोरबी           32187

कपडवंज         32105

ठासरा           32735

जूनागढ़         30453

अंकलेश्वर        30116

मांगरोल         30552

बाला सिन्नौर     29892

महेम्दाबाद        29785

पेटलाद          29911

बड़ोदा सिटी      29803

मोडासा         28792

दाहोद          27404

कर्जण         27230

अकोटा        26112

गांधीधाम      25404

वडगाम       25680

कडी         25045

मातर        25209






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