कभी सूबे में सिक्का चलता था आज कोई खैरख्वाह नहीं!

झारखंड , रांची, बुधवार , 31-01-2018


fodder-scam-court-chief-secretary-bihar

विशद कुमार

पिछले दिनों रांची कोर्ट में एक ऐसा नजारा देखने को मिला। जिसको देखकर हर कोई दुख, क्रोध, घृणा, दया और क्षोभ आदि तमाम भावनाओं से गुजर गया। सजल चक्रवर्ती कुछ दिन पहले तक झारखंड के चीफ सेक्रेटरी हुआ करते थे। लेकिन चारा घोटाले में इनका भी नाम आ गया और दोषी भी करार हो गए। सजा भी हो गई।

सच ये है कि किसी के दरोगा बनने पर पूरे गांव, प्रखंड में उसकी टशन हो जाती है, बड़े-बड़े लोग झुक के सलाम करते हैं। सजल चक्रवर्ती तो मुख्य सचिव थे। दिन में ना जाने कितने आईएएस/आईपीएस पैर छूते रहे होंगे लेकिन उस दिन उनकी बेबसी देखते बन रही थी ।

इनका वजन करीब 150 किलो है, कई बीमारियों से ग्रसित हैं, सजल ठीक से चल तक नहीं पाते। रांची कोर्ट में चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में उनकी पेशी थी। सुनवाई पहली मंज़िल पर थी, उनको चढ़ते हुए तो नहीं देख पाया लेकिन  उतरते उनको जरूर देखा, वो सीढ़ियों पर खुद को तकरीबन घसीट रहे थे, एक सीढ़ी घसीट कर उतरने के बाद फिर दूसरी सीढ़ी पर पहुँचने के लिए खुद को घसीट रहे थे। सोचिये जिसके सामने कल तक बड़े-बड़े अधिकारी गाड़ी का दरवाज़ा खोलने के लिए आतुर रहते थे वो आज दुनिया के सामने जमीन पर पड़ा हुआ एक बच्चे की तरह सबकी तरफ कातर नजरों से देख रहा था। जैसे कह रहा हो कि कोई उसे गोद में उठा ले।

कहते हैं ना "सुख के सब साथी दुख में ना कोय" इन सज्जन ने दो शादियां की लेकिन दोनों बीबियों से तलाक हो गया, वजह जो भी रही हो। कोर्ट रूम में सबका कोई ना कोई था। लेकिन इनकी आंखें जैसे किसी अपने को खोज रही थीं।

पता चला इनसे मिलने वाले कुछ  खास नहीं थे, मां-बाप रहे नहीं, एक भाई सेना में बड़े अफसर थे वो भी नहीं रहे। इन्होंने किसी  को गोद लिया था उसकी भी शादी हो चुकी है, उसे भी इनसे ज्यादा कोई मतलब नहीं रहता।

घर में कुछ बन्दर और कुत्ते पाल रखे हैं अपनों के नाम पर वो भी कहाँ हैं मालूम नहीं। ये शान, ये शौकत, ये पैसा सब क्षण-भंगुर है स्थाई तो कुछ भी नहीं है। सिवाए एक चीज़ के, वो है मौत। ऐसे कई उदाहरण मिल सकते हैं। फिर भी कई बार इंसान वही करने को मजबूर हो जाता है जो उसे नहीं करना चाहिए।

इनके  मुख्य सचिव होते इनके रुतबे को सभी जानते हैं। लेकिन जब ये रांची में जिलाधिकारी थे। तब जिलाधिकारी के तौर पर इनके कई किस्से थे, खासकर आवारागर्दी, यारबाजी, सुरा-सुंदरी के काफी लोमहर्षक कहानियां बनायी थी इन्होंने। चारा घोटाले ये फंस गये। घोटाले में नाम आने के बाद भी झारखंड की भ्रष्ट सरकारों ने इन्हें मुख्य सचिव बना डाला।

सजल चक्रवर्ती।

अब इन अधिकारी महोदय को चारा घोटाले में सजा हो गयी। ये जेल में बंद हैं। ये चारा घोटाले के मुकदमे की सुनवाई के लिए कोर्ट आये थे। जहां इनकी निरीहता देख लोगों को दया आ रही थी। मगर इनकी पिछली जिंदगियों को सोच कर लोग तमाशबीन बने रहना ही उचित समझ रहे थे। कोई भी हाथ इनकी सहायता को नहीं बढ़ा। 

पता नहीं इनकी इस हालत से दूसरा कोई सीख लेगा या नहीँ।

(विशद कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल रांची में रहते हैं।)

 










Leave your comment