गुरदासपुर में कांग्रेस ने छीनी बीजेपी की सीट

चुनाव , , रविवार , 15-10-2017


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जनचौक ब्यूरो

 

नई दिल्ली। गुरदासपुर। गुरदासपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस को जीत मिली है। कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ ने भाजपा प्रत्याशी स्वर्ण सलारिया को 1 लाख 93 हजार 219 वोट से हराया। ये सीट प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना के निधन (27 अप्रैल) के बाद खाली हुई थी। वे भाजपा के संासद थे। गुरदासपुर सीट हारने के बाद भाजपा के पास लोकसभा में अब 281 सीटें रह गई हैं। सुनील जाखड़ को 4 लाख 99 हजार 752, वहीं सलारिया को 3 लाख 6 हजार 533 वोट मिले। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मेजर जनरल (रिटा.) सुरेश खजूरिया को महज 23 हजार 579 वोट मिले। उनकी जीत की खास बात यह भी है कि वह गुरदासपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहे।

सुनील जाखड़ पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के पुत्र हैं। राजनीति उन्हें विरासत में मिली है। लेकिन विरासत की राजनीति में कदम रखने के बाद उनकी यह जीत इतनी आसान नहीं रही। 21 साल में दो लोकसभा चुनावों में हार के बाद उनको यह जीत नसीब हुई है। इस जीत पर कांग्रेस नेता खासे उत्साहित हैं।

पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्द्धू ने जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि-

‘‘हमने सोनियाजी, राहुलजी को लाल रिबन से पैक कर जीत का गिफ्ट भेज दिया है। पंजे के थप्पड़ की गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी।’’

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरदासपुर उपचुनाव में कांग्रेस की जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि-

‘‘यह जीत 2019 में कांग्रेस की विजय का संकेत और राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की नींव है।’’  

सुनील जाखड़ ने अपनी जीत का श्रेय पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया है। वह कहते हैं-

 ‘‘यह जीत हमारी नहीं बल्कि पार्टी की है। सभी ने चुनाव में उतनी ही भूमिका निभाई जितनी मैंने। यह संगठित जीत है, जिसमें नेता व कार्यकर्ता सभी शामिल है।’’ 

अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़

सुनील की जीत से प्रदेश कांग्रेस में नई बहस

सुनील जाखड़ की इस जीत ने कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम किया है। यह बात सही है कि पंजाब विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस ने जीती थी और राज्य में कांग्रेस की सरकार है। लेकिन ऐसे समय में जब भाजपा चुनाव जीतने के लिए हर स्तर पर जाने को तैयार दिख रही है, ऐसे में जाखड़ की जीत न सिर्फ राष्ट्रय स्तर पर बल्कि कांग्रेस के अंदर के भी नए बहस को जन्म दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषक यह अंदाजा लगा रहे हैं कि कांग्रेस में अच्छी पकड़ होने के कारण सुनील जाखड़ अपने को कैप्टेन के उत्तराधिकारी के बतौर भी पेश करने की कोशिश कर सकते हैं। पंजाब की राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह देखना रोचक होगा कि वह कांग्रेस के मिशन 2022 यानि अगले विधानसभा चुनाव में किस भूमिका में होंगे।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके है कि यह उनका राजनीति में अंतिम कार्यकाल है। वह इस कार्यकाल के बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेंगे। फिलहाल पंजाब में कैप्टन के मुकाबले कांग्रेस के पास कद्दावर नेता नहीं है। वैसे नवजोत सिंह सिद्धू इसके लिए आगे आने की कोशिश में लगे दिखते हैं।

11 अक्टूबर को था चुनाव

गुरदासपुर उपचुनाव में 11 अक्टूबर को वोट डाले गए थे। इसमें 15.22 लाख मतदाताओं में से 56 फीसदी लोगों ने वोटिंग की थी।

2014 के लोकसभा चुनाव में गुरदासपुर में 70 फीसदी वोटिंग हुई थी। अप्रैल में विनोद खन्ना के निधन के बाद ये लोकसभा सीट खाली हुई थी।

विनोद खन्ना बीजेपी के टिकट पर यहां से 4 बार (1998, 1999, 2004 और 2014) सांसद रहे थे।

कुछ दिन पहले कांग्रेस कैंडिडेट जाखड़ ने उपचुनाव को मोदी सरकार का टेस्ट करार दिया था।

गुरदासपुर संसदीय सीट में 9 विधानसभा क्षेत्र भोआ, पठानकोट, गुरदासपुर, दीनानगर, कादियां, फतेहगढ़ चूड़ियां, डेरा बाबा नानक, सुजानपुर और बटाला हैं।

 

 

 










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