मेरे खिलाफ जारी गैरजमानती वारंट के पीछे बीजेपी सरकार का हाथ: तोगड़िया

गुजरात , अहमदाबाद, शुक्रवार , 05-01-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। 21 पूर्व अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम में तत्कालीन बीजेपी के वरिष्ठ नेता आत्माराम पटेल की धोती खींचने, मारने तथा हत्या का प्रयत्न करने के केस के सन्दर्भ में विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया पर अहमदाबाद की मेट्रो कोर्ट ने नॉन बेलाबल वारंट जारी किया है। मेट्रो कोर्ट ने इस केस में तोगड़िया समेत 39 लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया है।

20 मई 1996 को सरदार पटेल स्टेडियम में बीजेपी द्वारा सभा रखी गई थी। सभा के दौरान बीजेपी के दो गुट एक हुजूरिया (केशुभाई पटेल गुट) और दूसरा खजूरिया (शंकर सिंह वाघेला गुट) आपस में भिड़ गए। यह सम्मेलन हुजूरिया और खजूरिया के बीच हुए समझौते के बाद हुआ था। आत्माराम इस सम्मेलन में शंकर सिंह वाघेला के समर्थक के तौर पर हाजिर थे। दूसरे गुट के कार्यकर्ताओं ने आत्माराम पटेल की धोती खींच कर पिटाई की थी। पटेल को जान बचाकर भागना पड़ा था। उस क्रूर भीड़ से बचने के लिए वहां से गुज़र रही पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बस में चढ़ कर उन्हें भागना पड़ा था। 

जनचौक ने इससे पहले पूर्व मुख्य मंत्री सुरेश मेहता के हवाले से लिख चुका है कि इस शर्मनाक घटना के पीछे भी मोदी शाह जोड़ी थी। घटना के बाद पुलिस फ़रियाद हुई थी। इस फ़रियाद में प्रवीण तोगड़िया, बीजेपी विधायक बाबू जमनादास, कॉर्पोरेटर कृष्णवदन ब्रह्म भट्ट उर्फ़ कोको, इलेश पटेल, एडवोकेट मिनेश वाघेला सहित 39 बीजेपी कार्यकर्ताओं का नाम था। खजूरिया काण्ड के समय आत्माराम वाघेला के साथ खजुराहो गए थे। बताया गया कि इसी का बदला लेने के लिए हमला किया गया था। इन सब के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। यह केस लम्बे समय से पेंडिंग था। कुछ समय पहले राज्य सरकार ने केस वापस लेने की अर्जी की थी लेकिन कोर्ट ने अर्जी रद्द कर केस चलाने का निर्णय लिया। जिसके बाद अदालत से कई बार समन जारी हुआ। परन्तु बार-बार समन के बावजूद कोई हाजिर नहीं हो रहा था। अंततः गुरुवार को अदालत ने सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जरी कर दिया। 

तोगड़िया का कहना है कि वारंट से पहले समन जारी होना चाहिए था जो हुआ नहीं। तोगड़िया ने इस केस को हाईप्रोफाइल केस बताते हुए आगे कहा कि इस केस में development हो और राज्य के गृह मंत्री को जानकारी न हो ऐसा नहीं हो सकता। तोगड़िया के अनुसार इस development के पीछे राज्य सरकार का गृह विभाग है। जबकि राज्य के गृहमंत्री ने वारंट जारी होने की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। तोगड़िया ने आगे कहा कि हम लोग पिछले कुछ समय से राम मंदिर पर कानून बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। इस मांग पर मुझे चुप रहने की सलाह दी जाती है। मुझ पर न बोलने तथा इस मुद्दे  को छोड़ने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा मूंगफली, कपास इत्यादि के न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर भी कुछ न बोलूं इसका भी भारी दबाव है। जबकि राज्य के किसानों को डेढ़ गुना भाव देने का वादा किया गया था।

आप को बता दें आत्माराम पटेल उस समय बीजेपी के सांसद चुने गए थे। जब 1984 की लोकसभा में बीजेपी की तरफ से मात्र दो सांसद चुन कर गए थे। एक दक्षिण से थे और दूसरे आत्माराम पटेल। आत्मा राम 1975 से 84 तक बीजापुर से विधायक रह चुके हैं। 1998 में आत्माराम पटेल एनडीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। 






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