गुजरात पुलिस के तानाशाह रवैये को लेकर संगठनों ने जताया एतराज

गुजरात , अहमदाबाद, शुक्रवार , 23-02-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। अहमदाबाद में पिछले दिनों जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस द्वारा अपनाए गए रवैये पर सामाजिक संगठनों ने कड़ा एतराज जाहिर किया है। 

गौरतलब है कि रविवार के दिन अहमदाबाद बंद के कॉल के समय जिग्नेश मेवानी को अहमदाबाद के सरसपुर से जबरन गिरफ्तार कर पहले अहमदाबाद के क्राइम ब्रांच फिर वहां से एसओजी ऑफिस ले जाया गया था। संगठनों का कहना है कि किसी भी चुने हुए नुमाइंदे की इस प्रकार की गिरफ्तारी की घटना पहली बार देखी गई। जिसमें गिरफ्तार कर उसको अपने साथियों से अलग एसओजी की ऑफिस में रखा गया। आपको बता दें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप वह संस्था है जो बड़े अपराधियों और आतंकवादियों से निपटने के लिए काम करती है एसओजी की ऑफिस में किसी नेता या एमएलए को नहीं रखा जाता है। इस घटना को लेकर अल्पसंख्यकों और दलितों के भीतर रोष है।

हमारी आवाज़ और हमारा अधिकार संस्था ने गुरुवार के दिन जिग्नेश मेवानी और जेएनयूएसयू के पूर्व प्रेसिडेंट मोहित पांडे को अहमदाबाद के रखियाल विस्तार में एक सभा को संबोधित करने के लिए आमंत्रण दिया था। 10 दिन पहले सभा की अनुमति मांगे जाने के बावजूद 2 दिन पहले रखियाल पुलिस स्टेशन ने परमिशन देने से मना कर दिया। इसको लेकर सिटी पॉइंट होटल में एक प्रेस वार्ता हुई।

जिसमें हमारी आवाज के कौशर अली सैय्यद ने सीधे तौर पर क्राइम ब्रांच के जेके भट्ट पर आरोप लगाया कि उनका रवैया अल्पसंख्यकों, दलितों को लेकर भेदभावपूर्ण है। यही नहीं वो संविधान की कसम खाने के बावजूद उसके प्रति वफादार ना होकर अपने आकाओं के प्रति वफादार हैं। सैय्यद ने कहा कि उन्हें संविधान की किताब तोहफे में देने का फैसला किया गया है। ताकि उनको याद रह सके कि उन्हें वफादारी संविधान के प्रति निभानी है न कि दिल्ली और गांधीनगर में बैठे हुए लोगों के प्रति।

दलित-मुस्लिम एकता मंच के कलीम सिद्दीकी ने कहा कि जेके भट्ट डीजी वंजारा बनना चाहते हैं उन्हें याद रखना चाहिए कि डीजी वंजारा को 7 वर्ष जेल में बिताने पड़े थे। जिस प्रकार से अपने साथ घटी घटना के बाद प्रवीण तोगड़िया ने उन्हें लीगल नोटिस भेजा है और 15 दिनों की कॉल डिटेल मांगी है। उसी प्रकार से हम लोग भी मांग करते हैं कि जेके भट्ट साहब की 17, 18 और 19 की कॉल डिटेल की जांच होनी चाहिए। ताकि पता चल सके वो उस दिन किन-किन लोगों के संपर्क में थे और किसके आदेश पर प्रोटोकॉल तोड़कर लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की। बीजेपी को समझना चाहिए कि अब जिग्नेश मेवानी केवल दलितों के नेता नहीं बल्कि दलित, अल्पसंख्यक और मजदूरों, किसानों के नेता भी बन गए हैं। वो 2019 के लिए दबे-कुचलों के लिए एक उम्मीद हैं।

अहमदाबाद के रखियाल में जिग्नेश मेवानी और मोहित पांडे के संबोधन के प्रोग्राम की अनुमति रखियाल पुलिस स्टेशन से मांगी थी राजपूत ने मीडिया को अनुमति पत्र की अर्जी दिखाते हुए कहा कि हम लोगों ने 12 तारीख को रखियाल पुलिस स्टेशन से सम्मेलन करने की परमिशन मांगी थी लेकिन दो दिन पहले उन्होंने परमिशन देने से मना कर दिया। पुलिस ने कहा कि कानून व्यवस्था खराब हो सकती है इसलिए पुलिस परमिशन नहीं मिलेगी। राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के सह संयोजक भरत शाह ने कहा कि जिग्नेश मेवानी की गर्दन दबा कर उसे जबरन गाड़ी में बिठाकर पुलिस ले गई। हम लोग साथ में थे और हम साथ में जाना चाहते थे फिर भी पुलिस अकेले जिग्नेश मेवानी को ले गई और घंटों तक हम लोगों को पता नहीं चला कि मेवानी कहां हैं। 

इसी तरह से अंबेडकरवादी ईश्वर भाई ने मेघानी नगर पुलिस स्टेशन से भानु भाई को श्रद्धांजलि का प्रोग्राम करने के लिए अनुमति मांगी थी लेकिन पीआई गोहिल ने अर्जी पत्र उनके मुंह पर फेंकते हुए कहा कि हम इस प्रकार के किसी भी प्रोग्राम की अनुमति नहीं दे सकते हैं।

जिस प्रकार से गुजरात में दलित मुस्लिम एकता बढ़ती जा रही है उसी के साथ भारतीय जनता पार्टी की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। क्योंकि दोनों को मिलाकर जनसंख्या 17% हो जाती है यही उसके लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। आपको बता दें 18 फरवरी को जिग्नेश मेवानी ने मात्र अहमदाबाद बंद का कॉल दिया था लेकिन सरकार और पुलिस के रवैये के कारण पूरे गुजरात में जगह-जगह चक्का जाम हुआ था। उसके बाद सरकार भानु भाई के केस में अधिकतर शर्तें मानने के लिए तैयार हो गई थी।



 










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