गुजरात में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों के खिलाफ कई संगठनों ने संभाला मोर्चा, आयोग को दिया ज्ञापन

गुजरात , अहमदाबाद, बृहस्पतिवार , 16-11-2017


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जनचौक ब्यूरो

अहमदाबाद। गुजरात में कुछ मुस्लिम संगठनों ने राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त से चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराने की कोशिश की शिकायत की है। चुनाव आय़ुक्त को सौंपे एक ज्ञापन में इन संगठनों ने कहा है कि धार्मिक उन्माद भड़काए जाने के जरिये पूरे चुनाव के वातावरण को प्रदूषित किया जा रहा है। 

ज्ञापन में कहा गया है कि “हमलोग समाज के जागरूक नागरिक होने तथा सामाजिक कार्यों से जुड़े होने के कारण अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए आप को एक भयंकर षड्यंत्र की सूचना देना चाहते हैं। आचार संहिता के लागू होने के बाद से ही कुछ राजनैतिक लोगों द्वारा सूबे में मुस्लिम विरोधी वातावरण खड़ा करने का प्रयत्न किया जा रहा है। सोशल मीडिया को इसका सबसे बड़ा माध्यम बनाया गया है। हमारे संज्ञान में कुछ वीडियो आये हैं जिसमें मुस्लिम और इस्लाम के नाम से एक विशेष समुदाय में भय पैदा किया जा रहा है”। 

उन्होंने बताया कि एक अन्य वीडियो में मुसलमानों की जनसंख्या को लेकर बहुसंख्यक समुदाय को डराया जा रहा है। वीडियो में एक महिला बताती है कि जब देश आजाद हुआ तो मुसलमान मात्र 4% थे ये बढ़ोतरी अब 400% हो गई है। जबकि सच्चाई ये है कि 1951 की जनगणना के अनुसार देश में हिन्दू 84.1%, मुस्लिम 9.8%, इसाई 2.3%, सिख 1.8%, बौद्ध 1.89% और जैन 0.46% थे। 2011 की जनगणना के अनुसार सभी धर्मों की जनसंख्या में साधारण वृद्धि हुई है 1947 से पहले अखंड भारत में हिन्दुओं की जनसंख्या 66% थी बंटवारे के कारण हिन्दुओं की जनसंख्या प्रतिशत में असाधारण वृधि हुई।                 2011 की जनगणना के अनुसार गुजरात में मुस्लिम मात्र 9.67% हैं जो गुजरात की कई दूसरी जातियों से भी कम हैं। फिर भी मुसलमानों की जनसंख्या का भय बहुसंख्यक समाज को सोशल मीडिया के माध्यम से दिखाया जा रहा है। जिसके चलते अल्पसंख्यकों में एक दूसरे तरह का भय पैदा हो रहा है। 

ज्ञापन के मुताबिक वीडियो में बताया गया है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में पुलिस भी जाने से डरती है लव जिहाद, केरल, पश्चिम बंगाल, कश्मीर, गोधरा, भिवंडी इत्यादि का ज़िक्र करते हुए बहुसंख्यक सामुदाय को मुसलमानों के खिलाफ एक होने के लिए कहा गया है। वीडियो में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के 3 दिन में ही हिदुओं ने एक होकर मुंबई के मुसलमानों को सबक सिखाया था जैसी बातें कही गई हैं। वीडियो के अंत में कहा गया है कि जागो हिन्दू जागो। हिन्दू खतरे में है। नहीं जागे तो कब देश इस्लामिक राष्ट्र बन जायेगा पता भी नहीं चलेगा। 

संगठनों ने कहा कि मुसलमानों के नाम से हिन्दुओं को डरा कर वोटों का ध्रुवीकरण करने का प्रयत्न हो रहा है। जबकि सच्चाई बिल्कुल अलग है। 2012 में Centre for research and debates in development policy के अभ्यास में बताया गया कि गुजरात में मुस्लिम समुदाय सबसे शोषित और वंचित है। गुजरात के सवर्ण जाति के हिन्दुओं की तुलना में शहरी मुसलमानों में 800% अधिक गरीबी है। ग्रामीण मुसलमान ग्रामीण सवर्ण हिन्दुओं के मुकाबले 200% अधिक गरीब है। गुजरात में हिन्दू मुस्लिम दंगों का इतिहास रहा है। जब भी दंगे हुए सबसे अधिक नुकसान अल्पसंख्यक समुदाय को ही हुआ है। राज्य में कुछ राजनैतिक दल दंगे से अपनी रोटी सेकने की फ़िराक में हैं।

इंसाफ फाउंडेशन ने बताया कि पालडी में पोस्टर लगाये जाने, नेताओं के मीडिया में दिए बयान, सोशल मीडिया में मुस्लिम विरोधी टिप्पणियां राज्य में भय का वातावरण पैदा कर रही हैं। पालडी में ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा अधिकतर मुस्लिम घरों पर लाल स्याही से X का निशान भी एक षड्यंत्र हो सकता है। क्योंकि पालडी में मुस्लिम परिवारों के गिने चुने मकान होने के बावजूद अधिकतर निशान मुस्लिम फ्लैट और सोसाइटी पर ही क्यों लगाये गए। पालडी को जुहापुरा बनाने के पोस्टर में भी अभी तक प्रशासन अथवा पुलिस द्वारा जांच नहीं की गयी। इसलिए चुनाव आयोग को अपनी तरफ से उस मामले की जांच करनी चाहिए।

इससे पहले हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश को सोशल मीडिया के माध्यम से HAJ और बीजेपी के तीन बड़े नेताओं को RAM बताकर धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाकर ध्रुवीकरण करने की कोशिश की गई थी। इस घटना के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई दिखती। 

दरियापुर विधायक ने पुलिस के उच्च अधिकारियों पर बीजेपी की मदद करने तथा उन्हें चुनाव में पराजित करने का आरोप मीडिया के माध्यम से लगाया था। परन्तु अभी तक इस आरोप की जांच नहीं की गई। यदि आरोप झूठे भी हैं तो आरोप कर्ता के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि मीडिया में ऐसे आरोप के बाद जनता के मन में भय और शंका जन्म लेती है। 

 

  • साप्रदायिक ध्रुवीकरण की इन कोशिशों पर रोक रोकने की मांग
  • कहा-दोषियों के खिलाफ हो कार्रवाई

 

ज्ञापन में कहा गया है कि चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है कि वो भयमुक्त चुनाव कराये। सांप्रदायिकता फ़ैलाने के खिलाफ कड़ाई से निपट कर आचार संहिता एवं जनप्रतिनिधि कानून को सही से अमल में लाए। 

लिहाजा संगठनों ने चुनाव आयोग द्वारा एक समिति बनाकर सोशल मीडिया पर चलने वाली आपत्तिजनक चीजों की जांचकर उन्हें तत्काल रोकने की मांग की है। साथ ही इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी करने की मांग की है। साथ ही चुनाव आयोग संप्रदायिकता रोकने के लिए क्या क़दम उठा रहा है उसकी जानकारी प्रेस वार्ता के माध्यम से जनता को भी अवगत कराए। ज्ञापने देने वाले संगठनों के नाम इंसाफ फाउंडेशन और हमारी आवाज संस्था। इन लोगों ने चुनाव आयोग को उन वीडियो की सीडी भी सौंपी जिनके जरिये इस तरह का जहर फैलाया जा रहा है।


 






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?????? joshi :: - 11-17-2017
गुजरात के चुनाव २०१९ के चुनाव की रिहर्सल है. किसी भी दम पर वे इसे जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं,कोई भी हथकंडा अपना सकते हैं. शैतान भी इनकी हरकतों के सामने मैदान छोड़ कर भाग सकता है.